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बीजेपी सरकारों में ही हिं’सा क्यों?

हिसाम सिद्दीक़ी 

नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के जरिए लाए गए शहरियत तरमीमी कानून के खिलाफ पूरे मुल्क में मुजाहिरे (प्रदर्शन) और धरने हो गए अभी भी हो ही रहे हैं। इन मुजाहिरों में लाखों की तादाद में मुल्क के हिन्दू मुसलमान और सभी मजाहिब व तबकों के लोग यानी मर्द औरतें सभी सड़कों पर आ गए अब भी यह सिलसिला जारी है।

सबसे ज्यादा और बड़ी तादाद मे ंलोग केरल, महाराष्ट्र, बंगाल और उत्तर प्रदेश की सड़को पर उन्नीस दिसम्बर को आए। कन्याकुमारी से पंजाब, महाराष्ट्र, असम से राजस्थान तक कोई भी प्रदेश ऐसा नही है जहां लाखों लोगों ने सड़कों पर उतर कर इस कानून की मुखालिफत न की हो।

बेश्तर प्रदेशों में यह धरने और मुजाहिरे पुरअम्न तरीके से निपट गए कही किसी ने एक पत्थर तक नहीं फेंका लेकिन उन प्रदेशों जहां बीजेपी की सरकारें है। या दिल्ली जहां की पुलिस बीजेपी सरकार के कण्ट्रोल में है या बंगाल जहां बीजेपी किसी भी तरह सत्ता पर काबिज होना चाहती है, उन्हीं में हिं’सा भी हुई और पुलिस ने बर’बरियत के तमाम रिकार्ड भी कायम कर दिए।

सरकार और पुलिस की बरबरियत में उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरे फेहरिस्त है। असम का भी कमोबेश ऐसा ही हाल रहा जहां पुलिस एक्शन में गुवाहाटी में ही पांच नौजवानों की मौ’त हो गई। यहां यह जिक्र भी जरूरी है कि गुवाहाटी में पुलिस की गो’ली से म’रने वाले सभी पांच नौजवान हिन्दू ही थे।

उत्तर प्रदेश, असम, गुजरात, हरियाणा वगैरह में अम्न व अमान के साथ होने वाले मुजाहिरो में हिं’सा हुई यह हिं’सा आखिर क्यों हुई इसकी असल वजह से बीजेपी सरकारों में बैठे लोग ही बखूबी वाकिफ हैं। अब तो पूरा देश इसकी अस्ल वजह से वाकिफ हो चुका है। वह वजह यह है कि उन्नीस दिसम्बर को जब पूरे देश में लोग सड़कों पर उतरे तो उनमें मुसलमानों के मुकाबले हिन्दुओं की तादाद कई गुना ज्यादा थी।
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इससे पहले पन्द्रह दिसम्बर को दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया युनिवर्सिटी के तलबा पर अमित शाह की दिल्ली पुलिस ने बर’बरियत दिखाई थी फिर उत्तर प्रदेश पुलिस ने अलीगढ मुस्लिम युनिवर्सिटी के निहत्थे तलबा पर अपनी ताकत का मुजाहिरा किया था। उससे पूरे मुल्क की अहम युनिवर्सिटियों के तलबा में नाराजगी की जबरदस्त लहर दौड़ गई थी।

अलीगढ मुस्लिम युनिवर्सिटी और जामिया के तलबा पर मजालिम के खिलाफ हैदराबाद युनिवर्सिटी, बंगलूरू युनिवर्सिटी, तमिलनाडु की कई युनिवर्सिटीज, बंगाल की जाधवपुर और कोलकाता युनिवर्सिटीज के अलावा मुल्क के कई आईआईटी और आईआईएम युनिवर्सिटीज समेत तकरीबन बीस से ज्यादा युनिवर्सिटीज निफ्ट की लड़कियां और सफदरजंग मेडिकल कालेज समेत कई मेडिकल कालेजों के रेजिडेट डाक्टर तक मैदान में आ गए थे। यह सब अट्ठारह दिसम्बर तक हो चुका था।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया युनिवर्सिटी और अलीगढ मुस्लिम युनिवर्सिटी के तलबा पर पुलिस ज्यादतियों के खिलाफ मुल्क की बीसों युनिवर्सिटीज हद यह कि बनारस हिन्दू युनिवर्सिटी और सम्पूर्णानन्द संस्कृत युनिवर्सिटी तक के तलबा के सामने आने पर पूरा आरएसएस कुन्बा यह देख कर परेशान हो उठा कि मरकजी सत्ता में मई 2014 मे नरेन्द्र मोदी के आने के बाद से कभी घर वापसी, कभी लव जे’हाद, कभी लिं’चिंग, कभी पाकिस्तान तो कभी पुलवामा के बहाने मुल्क के हिन्दुओं और मुसलमानों के दरम्यान नफरत की जो मजबूत दीवार खड़ी की गई थी वह एक ही झटके में गिर गई।

यह बात बीजेपी और आरएसएस को पसंद नहीं आई। इसी लिए उन्नीस दिसम्बर के मुल्कगीर (देशभर में) मुजाहिरों के प्रोग्राम मे हिं’सा करा दी गई। इससे पहले लखनऊ की एक प्राइवेट इंटीग्रल युनिवर्सिटी के तलबा ने कैम्पस के अंदर मुजाहिरा किया था तो बीजेपी के लोग एक कार और एक एसयूबी में सवार होकर वहां पहुचे थे और पथराव किया था। उनकी इस हरकत का वीडियो वायरल होता रहा लेकिन योगी पुलिस ने उस वीडियो पर कोई कार्रवाई नहीं की।

उन्नीस दिसम्बर को लखनऊ के परिवर्तन चौक पर मुजाहिरा करने का एलान कई एनजीओ और हिन्दू मुसलमानों ने मिल कर किया था मुजाहिरे में मुसलमानों के मुकाबले कई गुना ज्यादा हिन्दू मर्द, औरतेंऔर नौजवान शरीक हुए पूरी कामयाबी और अम्न व अमान के साथ यह मुजाहिरा दोपहर बाद तकरीबन साढे तीन बजे खत्म हो रहा था।

मुजाहिरीन (प्रदर्शनकारी) अपने घरों को वापस जा रहे थे तभी अचानक पच्चीस-तीस लोगों का एक गरोह चेहरे को कपडो ंसे ढके हुए आ पहुचा और पथराव करने लगा। इस गरोह में कौन लोग शामिल थे इसका पता तो पुलिस आज तक नहीं लगा सकी लेकिन जो लोग पुरअम्न तरीके से मुजाहिरे में शामिल हुए थे उन्हीं पर पुलिस ने लाठियां भी चलाई और उन्हीं की गिर’फ्तारियां भी हुई।

अब तकरीबन हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं लखनऊ की खदरा, सतखण्डा और पुराने लखनऊ की एक तीसरी पुलिस चौकी मे आग लगाने का काम किन लोगों की हरकत थी इसका कोई वीडियो पुलिस सामने नहीं लाई है। लेकिन हिं’सा का इल्जाम लगाकर शहर भर में मुसलमानों और फिरकावाराना हम आहंगी यानी हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए काम करने वाले एनजीओज में शामिल हिन्दुओं के खिलाफ पुलिस ने अंधाधुंध कार्रवाई शुरू कर दी। यह देखे बगैर कि हिं’सा करने में कौन मुलव्विस था, कौन नहीं आंख बंद करके गिरफ्तारियां शुरू हो गई। देखते ही देखते पांच सौ से ज्यादा लोगों को हिरासत में ले लिया गया और जितने लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया उनमें चंद के अलावा सभी पर संगीन दफाआत में फर्जी मुकदमे कायम कर दिए गए।

वजीर-ए-आला योगी आदित्यनाथ और डीजी पुलिस ओ पी सिंह दोनों ने ही वाजेह (स्पष्ट) कर दिया कि हिं’सा मुसलमानों ने ही की है। चीफ मिनिस्टर योगी का बयान आ गया कि हिं’सा करने वालों से पूरा इंतकाम (बदला) लिया जाएगा। उनके इस बयान को प्रदेश की पुलिस ने मुसलमानों पर जुल्म व ज्यादती करने का लाइसेंस समझ लिया।

अगले दिन यानी बीस दिसम्बर को जुमा था जुमे की नमाज के बाद प्रदेश के तकरीबन तमाम जिलों में मुजाहिरे हुए तो पुलिस ने भी पूरी तरह बेलगाम होकर मुसलमानों को सबक सिखाने का काम किया। खुद पुलिस ने कई शहरों में तोड़-फोड़ की जिसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे लेकिन वजीर-ए-आला योगी आदित्यनाथ ने चूंकि बदला लेने का एलान कर रखा था इसलिए तोड़-फोड़ में हुए नुक्सान की भरपाई मुसलमानों से कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

योगी आदित्यनाथ यह भूल गए कि अब वह मुस्लिम मुखालिफं तंजीम (संगठन) हिन्दू युवा वाहिनी के बानी (संस्थापक) न होकर मुल्क के संविधान के मुताबिक हलफ लेकर दुनिया का छठा मुल्क कहे जाने वाले सबसे बड़े प्रदेश के चीफ मिनिस्टर बन चुके हैं वह गलती करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तो करा सकते इंसाफ कर सकते हैं। लेकिन अपने ही अवाम से इंतकाम (बदला) लेने जैसी बातें नहीं कर सकते। उनके बदला लेने के बयान का ही नतीजा है कि प्रदेश में कोई दं’गा-फ’साद नहीं हुआ, कहीं बडे़ पैमाने पर तो’ड़- फो’ड़ और आ’गजनी भी नहीं हुई।

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इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में बीस मुस्लिम नौजवानों को दंगाई और बलवाई कह कर पुलिस के जरिए क’त्ल कर दिया गया। पुलिस फाय’रिंग में इतनी बड़ी तादाद में लोग तो बड़े-बडे़ दं’गों में भी नहीं म’रते हैं। प्रदेश में होने वाली हिंसा के मुकाबले म’रने वालों की तादाद पर नजर डाली जाए तो पूरी तरह साबित होता है कि योगी सरकार और उनकी पुलिस प्रदेश के मुसलमानों के साथ दुश्मनों जैसा बर्ताव कर रही है।

जिन पुलिस वालों ने बेगुनाहों को कत्ल’ करने का काम किया है वह यह न समझे कि उनके वीडियो लोगों ने नहीं बनाए हैं उन सभी को अदालतों में खींचने का काम जरूर होगा और सबूत के तौर पर लोग वही वीडियो कानून के सामने पेश करके जिम्मेदार पुलिस वालों को अदालत के जरिए जेल भेजने का काम पूरे प्रदेश में करेगे तो योगी उन्हें बचा भी नहीं पाएंगे।

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