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शमसोई गांव के दलित क्यों होना चाहते हैं मुसलमान

मोहम्मद आसिफ इक़बाल

संभल के फतेहपुर शमसोई गांव में ज़िला और पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद गांव के नाई दलित समाज के लोगों के बाल कटवाने को तैयार हो गए हैं। गांव की अगड़ी जाति के लोगों ने दलित जाति के लोगों के बाल न काटने की चेतावनी के बाद गांव के नाइयों ने अपनी दुकानें बंद कर दी थीं।

फतेहपुर शमसोई गांव के दलित समाज के लोगों ने अपने ही गांव में अगड़ी जातियों के विरोध की वजह से बाल न कटवा पाने पर इस्लाम धर्म अपना लेने की धमकी दी थी। इस गांव में करीब 15,000 ठाकुर और 1250 दलित परिवार रहते हैं।

गांव में अगड़ी जाति के फरमान की वजह से बरसों से दलित समाज के लोग गांव के नाई से न तो अपने बाल कटवा पाते थे और न ही दाढ़ी बनवा पाते थे। गांव के रहने वाले सौरभ वाल्मीकी ने बताया कि करीब एक माह पहले मेरे चचेरे भाई अनिल भूरा और ब्रिजेश वाल्मीकि गांव में एक मुस्लिम नाई की दुकान पर गए और अपने बाल कटवाए लेकिन कुछ दिन बाद वह लोग उसी दुकान पर दाढ़ी बनवाने गए तो दुकानदार ने ऐसा करने से इंकार कर दिया।

उसने बताया कि वाल्मीकि समाज के लोगो के बाल काटने पर गांव के अगड़े लोगो ने उसे पिटाई करने की धमकी दी थी। इस दबाव के चलते उसने बाल काटना बंद कर दिया था।

अब नौबत यहां तक आ गई है कि गांव के वाल्मीकि समाज के लोग इस्लाम धर्म अपनाने की बात कर रहे हैं। हाल में भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज के राष्ट्रीय मुख्य संचालक लल्ला बाबू द्रविड़ ने ऐलान किया था कि अगर अत्याचार जारी रहा तो वाल्मीकि समुदाय के लोग धर्म परिवर्तन की राह अपनाएंगे। वहीं संभल के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पांडे ने बताया कि उन्हें वाल्मीकि समाज के लोगों के बाल न काटने की शिकायत गांव से मिली थी लेकिन अब नाई वाल्मीकि समाज के लोगों के बाल काटने के लिए तैयार हैं। देखा जाए तो मामला नाक का है। आन का है।

बेशक प्रशासन के दख़ल से अभी मामला सुलझ गया है लेकिन गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। दलितों को डर है कि किसी भी दिन अगड़ी जाति के लोग कोई भी नया फरमान जारी कर सकते हैं।

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