Generic selectors
Exact matches only
Search in title
Search in content
Search in posts
Search in pages
Filter by Categories
home
margin
slider
top three
top-four
travel
Uncategorized
viral
young india
कल्चर
दुनिया
देश
लीक से हटकर
विशेष
वीडियो
सटीक
सियासत
हाशिया
हेल्थ

जब इम्तियाज़ ने फोन करके कहा- ‘मैंने मुम्बई में 405 मील की दूरी पार कर ली है’


प्रभात रंजन

एक अंग्रेज़ीदां कॉलेज में हिंदी पढ़ते हुए मेरे सामने दो विकल्प थे- या तो हिंदी वालों के बीच किसी कोने में सिमट कर दीदी-भईया करता रहूं या अपने कॉलज की मुख्यधारा की संस्कृति का हिस्सा बनूँ, जिसके लिए हिन्दू कॉलेज में मैंने दाखिला लिया था. लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधा भाषा थी. इस बाधा को दूर करने के लिए मेरे कई साथी अंग्रेजी गाने सुनने लगते थे, कुछ उन गानों को याद करके गाने भी लगते थे. लेकिन तब मेरे लिए यह सब इतना आसान नहीं था. गाने सुनने के लिए टेप रिकॉर्डर तक नहीं था, दूसरे तब मुझे लोकप्रिय अंग्रेजी गायकों की हवा भी भी नहीं थी. मैं तब अंग्रेजी गानों का मतलब माइकेल जैक्सन समझता था और कुछ नहीं.

तो इस बाधा को पार करने के लिए मैंने मौलिक तरीका इजाद किया. मैं एक्टिविस्ट बन चुका था जिसके कारण अंग्रेजीदां लड़के-लड़कियां मेरे आसपास ‘जी’ और ‘भईया’ कहते हुए जुटे रहते थे. मसला यह था कि इन जी और भईया कहने वालों को किस तरह से प्रभावित किया जाए. इसमें साहित्य का अंधाधुंध पाठक होना काम आया. उन दिनों मैं अकविता के कवियों मो पढ़ता था और उनका इरौटिक अंदाज मुझे बहुत पसंद आता था.

आत्मविश्वास मेरे अन्दर भरपूर था इसलिए मैंने उनकी कविताओं को अपनी कविता बनकर सुनाना शुरू कर दिया. रात में मैं बैठकर उन कविताओं को याद करता और दिन में कॉलेज के सामने की तरफ जय सिंह लॉन में लड़के-लड़कियों को कविताएँ सुनाता. मेरी जो कविता सबसे पसंद की गई वह थी- तीसरे गर्भपात के बाद लड़की हो जाती है धर्मशाला/ और कविता तीसरे पाठ के बाद…’ तब मेरे अलावा इस बात को कोई नहीं जानता था कि यह कविता मेरी नहीं धूमिल की थी. एक कविता राजकमल चौधरी की थी, जिसकी पंक्तियाँ थीं- क्यों एक ही युद्ध कभी वियतनाम में/ कभी मेरी कमर के इर्द गिर्द होता है…’ मैं अपना बता कर किसी महाकवि की तरह सुनाता था और उन दिनों इन कविताओं के कारण कॉलेज के अंग्रेजीदां बौद्धिकों में मेरी धूम मच गई थी. सब कहते कितना बोल्ड लिखता है- he is very different from the general hindi lot….

बाद में जिस साल ग्रेजुएशन पास हो रहा था उस साल कॉलेज की पत्रिका में 12 लोगों के बारे में लिखा गया जिनसे भविष्य में उम्मीदें थीं. एक नाम मेरा भी था. मेरे लिए अंग्रेजी की मेरी एक सहपाठिनी ने अंग्रेजी में लिखा था कि यह लड़का एक दिन बहुत बड़ा कवि बनेगा और हिंदी की दुनिया में बेहद अलग मुकाम बनाएगा.

उन 12 लोगों में एक इम्तियाज़ भी था. जिसके बारे में मुझे अंग्रेजी में लिखने के लिए कहा गया. मुझे तब अंग्रेजी लिखते हुए यह डर लगता था कि कहीं गलत लिख गया तो अब कितना हँसेंगे. इसलिए मैंने सिर्फ एक लाइन लिखी- bombay 405 miles. तब इम्तियाज़ ने मुम्बई जाने के बारे में ठोस फैसला नहीं लिया था. लेकिन उसी साल जामिया मिल्लिया के मास कम्युनिकेशन सेंटर में वह लिखित परीक्षा पास नहीं कर पाया. गुस्से में वह अगले ही हफ्ते मुंबई चला गया.

बहुत बाद में जब इम्तियाज़ की फिल्म आई ‘जब वी मेट’ और वह बेहद मशहूर हो गया तो एक दिन उसने मुझसे फोन पर पूछा- आपको याद है आपने कॉलेज की मैगज़ीन में मेरे लिए क्या लिखा था? मैंने कहा- हाँ.

अब मैंने मुम्बई में 405 मील की दूरी पार कर ली है.

यह किस्सा इसलिए याद आया क्योंकि इम्तियाज़ की तरह शाहरुख़ खान भी जामिया के मास कम्युनिकेशन सेंटर की परीक्षा पास नहीं कर पाया था. इम्तियाज़ ने जाते हुए कहा था कि एक दिन मेरा भी मुकाम शाहरुख खान की तरह होगा, देखिएगा. 4 अगस्त को इम्तियाज़ की फिल्म आ रही है ‘जब हैरी मेट सेजल’, जिसमें शाहरुख खान हीरो है!

(लेखक वरिष्ठ साहित्यकार हैं और डीयू के कॉलेज में प्रोफेसर हैं।)