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हाउडी मोदी से देश को क्या मिला

हिसाम सिद्दीकी
अमरीका के ह्यूस्टन शहर के एनआरजी स्टेडियम मे सत्ताइस सितम्बर को हुए हाउडी मोदी ड्रामे समेत वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी अमरीका के एक हफ्ते के प्रोग्राम के बाद वापस दिल्ली आ गए। इस दौरान उन्हांने यूनाइटेड नेशन्स की जनरल असम्बली को खिताब करने के अलावा अमरीकी सनअतकारों और सरमायाकारों (उद्योगपतियों और निवेशकों) से मुलाकात की। अमरीका मे रह रहे हिन्दुस्तानियों से मुलाकातें करने के साथ-साथ अमरीकी सदर डोनाल्ड ट्रम्प की इंतखाबी मुहिम की शुरूआत भी की। मोदी ने तकरीबन पचास हजार हिन्दुस्तानी अवाम के दरम्यान ‘अबकी बार ट्रम्प सरकार’ का नारा लगाकर दुनिया के सामने एक सौ सैंतीस करोड़ के अजीम (महान) मुल्क भारत और दुनिया की सबसे बड़ी जम्हूरियत की तौहीन करने की गलती भी की। वह वहां भारत के वजीर-ए-आजम की हैसियत से सरकारी खर्च पर गए थे। उन्हें ट्रम्प या किसी भी दूसरे उम्मीदवार की हिमायत में इंतखाबी मुहिम में शरीक होने का कोई अखलाकी (नैतिक) हक हासिल नहीं था।

अगर उन्हें ट्रम्प को जितवाने मे दिलचस्पी थी तो उन्हें अपने ओहदे से हफ्ते दो हफ्ते की छुट्टी लेकर अपने जाती खर्च पर अमरीका जा कर ट्रम्प के लिए काम करना चाहिए था, तब किसी को कोई एतराज न होता। मोदी ने ट्रम्प की हिमायत में नारा इसके बावजूद लगाया कि ट्रम्प ने मोदी और भारत के वजीर-ए-आजम दोनों की तौहीन करने की हरकत की थी। मोदी तय वक्त पर एनआरजी स्टेडियम पहुंच गए थे लेकिन ट्रम्प दो घंटे ताखीर से पहुंचे। मोदी ने पूरे दो घंटे तक उनका इंतजार किया और हाउडी मोदी प्रोग्राम भी दो घंटे ताखीर से ही शुरू हो सका।

हाउडी मोदी प्रोग्राम में ट्रम्प के आ जाने से मोदी इतने उतावले दिखे जैसे उन्होंने दुनिया फतह कर ली हो। वह कुछ उसी तरह जोश का मजाहिरा करते दिखे जैसे मुंबई के किसी पार्क में मोहल्ले के बच्चे क्रिकेट खेल रहे हों और सचिन तेंदुलकर भी पार्क में आ कर उन बच्चों के साथ खेलने लगें तो बच्चों का हौसला आसमान पर पहुंच जाए।
डोनाल्ड ट्रम्प भले ही अमरीका के सदर बन गए हैं उनकी शख्सियत और उनकी जिंदगी की जो हरकतें रही हैं वह किसी भी तरह दुनिया की सबसे बड़ी जम्हूरियत भारत के वजीर-ए-आजम की सतह (स्तर) के लीडर नहीं हो सकते। मोदी के इस हफ्ते भर लम्बे प्रोग्राम के बावजूद डोनाल्ड ट्रम्प ने मोदी को सिर्फ बेवकूफ बनाने का ही काम किया। ट्रम्प ने भारत में आई मंदी दूर करने के लिए दोनों मुल्कों के दरम्यान व्यापार में आई कमी खुसूसन भारत से इमपोर्ट पर लगाई गई अपनी पाबंदियों को खत्म करने की बात तक नहीं की। अमरीका ने गुजिश्ता कई महीनों से कश्मीरी सेब और बासमती चावल की खेपें यह कह कर वापस कर दी कि वह मेयारी (स्तरीय) नहीं है मोदी को इस पर ट्रम्प से कोई मदद नहीं मिली। दो महीने पहले ही ट्रम्प ने भारत से अमरीका एक्सपोर्ट होने वाले कई सामानों पर बीस फीसद की ड्यूटी लगाकर भारतीय एक्सपोर्टर्स और व्यापार की कमर तोड़ दी। मोदी ने इस पर बात नहीं की। ट्रम्प ने एच-1बी वीजा को रेग्यूलेट कर दिया, जिसकी वजह से भारतीय आईटी शोबे को जबरदस्त चोट लगी आज हालत यह है कि एच-1बी वीजा पर सख्ती की वजह से वीजा रिजेक्शन की शरह (दर) चार सौ (400) फीसद तक हो चुकी है। मोदी ने इस सवाल पर ट्रम्प से क्या बात की? जवाब है कुछ नहीं फिर बीजेपी और मोदी गुलाम मीडिया मोदी के इस दौरे की कामयाबी के ढोल क्यों पीट रहा है।

मोदी इंतेहाई चालाक शख्स है अव्वल तो वह किसी को भी सवाल करने का मौका ही नहीं देते हैं इसके बावजूद अमरीका से वापसी पर उनसे कोई सवाल न कर ले कि इस दौरे का हासिल (उपलब्धि) क्या है उन्होने अमरीका का नाम तक नहीं लिया और लोगों की तवज्जो हटाने के लिए एक नया राग छेड़ दिया ‘ई-सिगरेट और हुक्का’ तीन दिनों में कई बार कह दिया कि ई-सिगरेट और हुक्का सेहत के लिए बहुत ही मुजिर (हानिकारक) है इसलिए इस पर पाबंदी लगाई जाएगी। मुद्दे डायवर्ट करने में माहिर मोदी ने मुद्दा ही डायवर्ट किया है।

2014 में मोदी सरकार आने के बाद से अब तक मोदी तकरीबन सभी मुल्कों के दौरे कर चुके हैं। अमरीका तो वह कई बार जा चुके हैं। हर बार विदेशी दौरे से वापस आ कर दावा किया कि दहशतगर्दी के मामले में पूरी दुनिया हमारे साथ है। मोदी के इस दावे के साथ-साथ देश का गुलाम मीडिया ने ढोल पीटने का काम किया कि मोदी ने पाकिस्तान को दुनिया में अलग-थलग कर दिया। अव्वल तो पाकिस्तान की हैसियत ही क्या है कि भारत के साथ उसका मुवाजना किया जाए। अगर मोदी ने उसे अलग-थलग कर दिया तो कौन सा तीर मार दिया। इस बार भी ऐसी ही बातें की गई हैं। अब जरा मोदी के इस बार के अमरीकी दौरे और ट्रम्प के साथ दोस्ती जाहिर करने पर भी एक नजर डाल ली जाए। हाउडी मोदी प्रोग्राम में मोदी ने ट्रम्प को अपने साथ खड़ा करके जिस तरह उसकी तारीफ में कसीदे पढे अबकी बार ट्रम्प सरकार का नारा तक लगा दिया, यह भी कहा कि ग्यारह सितम्बर को न्यूयार्क के ट्रेड टावर पर फिर 2008 में मुंबई पर हुए दहशतगर्दी के हमले की साजिशें एक ही मुल्क (पाकिस्तान) मे रची गई थी। इन तमाम बातों के जवाब में ट्रम्प ने क्या किया?

वह मोदी से मिला तो मोदी की तारीफों के पुल बांध दिए उन्हें भारत का बाप तक कह दिया। उसके बाद इमरान खान से मिला तो मीडिया के सामने उन्हें भी अपना दोस्त, एक काबिल वजीर-ए-आजम, अफगानिस्तान और ईरान के मामलात में अमरीका का सच्चा दोस्त और हमदर्द बताते हुए इमरान खान को अजीम कायद (ग्रेट लीडर) तक कहा। ट्रम्प ने दहशतगर्दी के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार मानने के बजाए दहशतगर्दी को ईरान की देन तक कह दिया फिर मोदी यह दावा कैसे करते हैं कि ट्रम्प दहशतगर्दी के सवाल पर भारत के साथ हैं आखिर इतना झूट क्यों?

हाउडी मोदी प्रोग्राम हो या यूनाइटेड नेशन्स की जनरल असम्बली दोनों ही जगहों पर मोदी ने बैतुल खला (शौचालय) और गैस कनेक्शन बांटने जैसी अपनी कामयाबियों का जिक्र करते हुए कुछ इस तरह बयान दिया जैसे वह दिल्ली, पटना या मुंबई की किसी एलक्शन मीटिंग में बोल रहे हों। यूनाइटेड नेशन्स जनरल असम्बली में वह सिर्फ पन्द्रह या सोलह मिनट ही बोले उसमें भी अपनी सरकार की कामयाबियों का ही जिक्र किया। उन्होंने दहशतगर्दी के लिए एक बार भी पाकिस्तान का नाम नहीं लिया।

हाउडी मोदी प्रोग्राम और यूनाइटेड नेशन्स जनरल असम्बली की मीटिंग में बैतुल खला (शौचायल) बनवाने का जिक्र बहुत जोर देकर कर रहे थे। इधर मध्य प्रदेश में दस और बारह साल के वाल्मीकि समाज के दो बच्चों को गांव के शोरे पुश्त लोग इस लिए पीट-पीट कर मौत के घाट उतार रहे थे कि उन बच्चों ने गांव के पंचायत घर के सामने खाली पड़े मैदान में रफा-ए-हाजत (शौच) करने की गलती की थी। इसी वाक्ए ने मोदी के दावों की पोल खोल दी। भारत जैसे एक सौ तीस करोड़ के अजीम (महान) मुल्क के वजीर-ए-आजम की हैसियत से तो मोदी को यूनाइटेड नेशन्स में शौचालय और गैस कनेक्शन गिनवाने के बजाए अगर इस पर बात की होती कि दुनिया से भूक को पूरी तरह कैसे खत्म किया जाए, तरह-तरह के फैल रहे वबाई अमराज (बीमारियों) पर कैसे काबू किया जाए, तरक्कीयाफ्ता और तरक्की पजीर (प्रगतिशील और प्रगति के रास्ते पर चलने वाले) मुमालिक के दरम्यान व्यापार और तिजारत का तवाजुन (बैलेंस) कैसे बराबर किया जाए और दुनिया को हथियारों की दौड़ से कैसे रोका जाए तो दुनिया भी तस्लीम करती कि अजीम भारत का वजीर-ए-आजम भी कोई बड़ी शख्सियत का मालिक है।

शौचालयों, गैस कनेक्शनों और गरीबों को दिए गए घरों की गिनती बता कर मोदी ने भारत जैसे मुल्क के वजीर-ए-आजम के ओहदे के शायान-ए-शान तकरीर नहीं की। कम से कम दहशतगर्दी के सवाल पर तो पाकिस्तान का नाम लेकर दुनिया के सामने उसको बेनकाब जरूर करना चाहिए था जो नहीं हुआ।

उधर मोदी अमरीका के मुख्तलिफ जलसों मे अपनी सरकार की कामयाबियांं का बढा-चढा कर जिक्र करते फिर रहे थे इधर मुल्क में उनका गुलाम इलेक्ट्रानिक मीडिया यानी टीवी चैनलों में यह बताने का मुकाबला बड़ी बेशर्मी के साथ किया जा रहा था कि मोदी ने तो अमरीका में भारत के झण्डे गाड़ दिए। वह तकरीर कर रहे थे तो अमरीकी सदर डोनाल्ड ट्रम्प भी सामने बैठ कर अपने ही मुल्क में भारत के वजीर-ए-आजम की तकरीर सुन रहे थे। चैनलों के कमअक्ल ऐंकर्स और एेंकरनियों को कौन बताए कि जब ट्रम्प उस जलसे मे शरीक ही थे सामने बैठ कर तरकीर न सुनते तो क्या अपनी तकरीर करके वापस चले जाते। अमरीका में मोदी ने झण्डे गाड़ दिए यह दावा तो तब किया जा सकता था जब उसमें अमरीका के बुनियादी बाशिंदे (मूल निवासी) शामिल होते वहां तो अमरीका में रह रहे हिन्दुस्तानी ही थे जिन्हें करोड़ों रूपए खर्च करके इकट्ठा किया गया था। हमारे मुल्क के चैनलां ने तो चौबीसों घंटे मोदी के कामयाब अमरीकी दौरे का ढोल पीटा।

दूसरी तरफ खुद अमरीकी मीडिया की हालत यह थी कि सीएनएन जैसे चैनल ने हाउडी मोदी प्रोग्राम को कोई अहमियत और कवरेज नहीं दी। बीबीसी, अल जजीरा, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, जर्मनी समेत दुनिया के किसी भी मुल्क के टीवी चैनलों ने इस प्रोग्राम को कोई अहमियत नहीं दी। अमरीकी अखबारात ने अंदर के सफहात (पृष्ठों) पर छोटी-छोटी खबरें शाया (प्रकाशित) टीवी चैनल के नाम पर सिर्फ एक ट्रम्प की पार्टी रिपब्लिकन के चैनल फाक्स टीवी ने ही हाउडी मोदी प्रोग्राम की खबर दिखाई और उन्हीं के अखबार ने भी खबर शाया की। इसके बावजूद हम झूट और ख्वाबों के समन्दर में गोते लगा रहे हैं आखिर देश के साथ इतना झूट क्यों बोला जा रहा है?

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