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हम मंदिर-मस्जिद के लिए लड़ते हैं, लोगों के लिए नहीं: फारूक अब्दुल्लाह

दिल्ली में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ”राजनीति बुरी नहीं है, राजनेता बुरे हो सकते हैं। हम में से बहुत से लोग सेवा करने के लिए राजनीति में शामिल होते हैं और बहुत से लोग पैसा बनाने के लिए। भगवान मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारा में नहीं रहता है, वह लोगों में रहता है और अगर आप लोगों की सेवा करते हैं तो आप ईश्वर की सेवा कर रहे हैं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक गुरुवार (6 सितंबर) को कहा, ”आजादी के बाद से हर चुनाव ने भारत को एकजुट करने के बजाय बांटा है। हम मंदिर और मस्जिद के लिए लड़ते हैं, हम लोगों के लिए नहीं लड़ते हैं। हम झूठ बोलते हैं, डरते हैं कि अगर हम ईमानदार हो गए तो जीतेंगे नहीं।

आपको बताना होगा कि आप एक निश्चित बिंदु से परे काम नहीं कर सकते हैं।” बता दें कि फारूक अबदुल्ला अपने पिछले कुछ भाषणों के दौरान बेहद जज्बाती नजर आ चुके हैं।

विरोधियों और आलोचकों से पाकिस्तान परस्ती और उग्रवादियों का हिमायती होने का आरोप झेलने वाले फारूक ने बीते दिनों पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में रखी गई प्रार्थना सभा में भारत माता की जय और जय हिंद के नारे लगाकर भी एकजुटता और भाईचारे का आह्वान किया था।

पिछले दिनों विपक्ष के द्वारा मोदी सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान भी संसद में फारूक बेहद जज्बाती नजर आए थे। बुधवार (5 दिसंबर) को फारूक ने एक बार तब देशवासियों का ध्यान खींचा जब उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लिए प्रस्तावित नगरपालिका और पंचायत चुनाव का बहिष्कार करने का उन्होंने एलान किया। फरूक ने दलील दी कि राज्य में चुनाव के लिए हालात ठीक नहीं है।

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