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सुप्रीम कोर्ट को आस्था की धमकी

हिसाम सिद्दीकी

नई दिल्ली: मुल्क में तरह-तरह की सियासी और गैर सियासी धमकियों के दरम्यान अब सुप्रीम कोर्ट को भी एक सख्त धमकी मिल गई है वह है आस्था की धमकी। धमकी देने वाला भी काफी ताकतवर है क्योंकि वह है अमित शाह जो वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी के इंतेहाई ताकतवर सदर हैं। गुजिश्ता दिनों केरल के कन्नूर में एक अवामी जलसे को खिताब करते हुए अमित शाह ने सबरीमाला मंदिर में ख्वातीन (महिलाओं) के दाखिले के लिए सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले को गलत करार देते हुए साफ तौर से धमकी देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट हो या कोई दूसरी अदालत इस किस्म के फैसले देते वक्त उन्हें आम लोगों की आस्था का भी ख्याल रखना चाहिए। उन्होने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के बावजूद सबरीमाला मंदिर में जो पुजारी, मैनेजमेंट के लोग और आम लोग सबरीमाला मंदिर में ख्वातीन को दाखिल नहीं होने दे रहे हैं भारतीय जनता पार्टी और जाती तौर पर वह (अमित शाह) खुद उन लोगों के साथ चट्टान की तरह खड़े रहेंगे। इसके लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं क्योंकि इसके साथ करोड़ों हिन्दुस्तानियों की आस्था जुड़ी है। मतलब साफ है कि अमित शाह यह चाहते हैं कि अब सुप्रीम कोर्ट और देश की दूसरी तमाम अदालतें इस किस्म के मुकदमात का फैसला देते वक्त मुल्क के संविधान और कानून को पूरी तरह नजरअंदाज करके मुकदमे में शामिल फरीकैन (पक्षकारों) की आस्था का ख्याल रखें और उसी की बुनियाद पर फैसला करें।

अमित शाह के इस बयान को सिर्फ सबरीमाला मंदिर में ख्वातीन के दाखिले तक ही महदूद करके नहीं देखा जाना चाहिए। आस्था का सवाल उठा कर उन्होने दरअस्ल अयोध्या में आलीशान (भव्य) राम मंदिर की तामीर के लिए पेशबंदी की है। क्योंकि सबरीमाला मंदिर के मुकाबले राम मंदिर में आस्था तो लाखों गुना ज्यादा है। घुमा-फिराकर कुछ इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश के वजीर-ए-आला आदित्यनाथ योगी का भी बयान आया है। उन्होने अपने लोगों को खुश करने की गरज से ही कहा है कि दीवाली के मौके पर वह एक बड़ी खुश खबरी के साथ अयोध्या जाएंगे। उन्होने दुनिया भर में कही जाने वाली कहावत भी दोहराई और कहा कि इंसाफ में ताखीर (देरी) होने का मतलब इंसाफ न देना ही है।

सबरीमाला मंदिर में ख्वातीन के दाखिले के लिए सुप्रीम कोर्ट के आर्डर पर अमल हो पाएगा या नहीं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन अमित शाह के बयान का जो असर फौरन दिखा वह यह है कि मंदिर में ख्वातीन के दाखिले के फैसले की खुलकर हिमायत करने वाले केरल के ही संदीपानन्द गिरि को तिरूअनन्तपुरम के आश्रम पर सत्ताइस अक्टूबर की रात में हमला हो गया। इस हमले में किसी को चोट नहीं आई लेकिन आश्रम में खड़ी कई गाड़ियां और मोटर साइकिलें जरूर जल गई। सदीपानन्द गिरि ने इस हमले के लिए केरल बीजेपी के सदर पी एस श्रीधरन पिल्लाई, सबरीमाला मंदिर के पुजारियों और पंडालम के शाही परिवार पर इल्जाम लगाते हुए कहा कि इन्हीं लोगों के इशारे पर उनके आश्रम पर हमला किया गया है। केरल के वजीर-ए-आला पिनराई विजयन ने पुलिस और खुफिया एजेसियों की रिपोर्ट के हवाले से कहा कि यह हमला दरअस्ल संदीपानन्द गिरि को जिस्मानी (शारीरिक) नुक्सान पहुचाने की गरज से किया गया था। सरकार इस हमले के जिम्मेदारान के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।

सत्ताइस अक्टूबर को अमित शाह ने कुन्नूर में अपनी पूरी ताकत से बोलते हुए कहा कि बीजेपी भगवान अयप्पा के भक्तों के साथ चट्टान की तरह खड़ी है। केरल की लेफ्टिस्ट सरकार अयप्पा के भक्तों पर जुल्म कर रही है। साथ ही उन्होने कहा कि अदालत को वही फैसला सुनाना चाहिए जिनपर अमल कराया जा सके। उन्होने कहा कि सरकार और अदालतों को आस्था से जुड़े मामलात में फैसले सुनाने से बचना चाहिए। ऐसे आर्डर नहीं करने चाहिए जो आस्था का एहतराम (सम्मान) न करते हों। उन्होने कहा कि संविधान की दफा चौदह (14) की दुहाई दी जाती है। वहीं दफा 25-26 के तहत अपने मजहब के मुताबिक जीने का सभी को अख्तियार है। ऐसे बुनियादी अख्तियार दूसरे को नुक्सान कैसे पहुचा सकते हैं। उन्होने इल्जाम लगाया कि केरल की लेफ्ट सरकार केरल के मंदिरों के रिवाज (परम्परा) को खत्म करने की कोशिशें कर रही है। इसलिए मैं चीफ मिनिस्टर विजयन को वार्निंग देता हूं कि अगर जुल्म न रोका गया तो हम सरकार की ईंट से ईट बजा देंगे। सबरीमाला मंदिर में जिन भगवान अयप्पन की पूजा होती है वह दक्खिन भारत के कृष्ण भगवान हैं। उन्हीं का यह मंदिर है वही भगवान कृष्ण जिन्होने ख्वातीन (महिलाओं) के अख्तियारात (अधिकारों) और इज्जत व एहतराम बचाए रखने की हमेशा कोशिश की।

जिस दिन कुन्नूर में अमित शाह ने कहा कि अदालतों को ऐसे फैसले नहीं करने चाहिए जिनसे किसी की आस्था पर असर पड़ता हो उसी दिन दिल्ली और लखनऊ में उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर आदित्यनाथ योगी ने कहा कि राम मंदिर की तामीर के मामले में किसी से भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए अगर सुप्रीम कोर्ट सबरीमाला मंदिर पर फैसला दे सकता है तो हम अदालत से अपील करते हैं कि वह राम मंदिर पर भी जल्दी ही फैसला करे उन्होने कहा कि राम जन्म भूमि का मामला मजहबी जज्बात से जुड़ा हुआ है। इस बात का भी ख्याल रखा जाना चाहिए।

केरल के चीफ मिनिस्टर पिनराई विजयन समेत कई लीडरान ने अमित शाह के बयान पर सख्त एतराज करते हुए इसे अदालत की तौहीन करार दिया और कहा कि अमित शाह इस किस्म की बयानबाजी करके मुल्क में अफरा-तफरी (अराजक्ता) फैलाना चाहते हैं। पिनराई विजयन ने कहा कि अमित शाह के बयान को अयोध्या मे राम मंदिर की तामीर के पसमंजर में देखा जाना चाहिए। वह आस्था की बात उठा कर अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के किसी भी मुतवक्के (संभावित) फैसले पर असर डालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होने सख्ती से अमित शाह से सवाल किया कि आखिर वह सुप्रीम कोर्ट को धमकाने वाले कौन होते हैं? उन्होने कहा कि अमित शाह दरअस्ल सुप्रीम कोर्ट से यह कहना चाहते हैं कि अदालत अयोध्या मामले में संविधान और कानून के बजाए बीजेपी और आरएसएस की मर्जी मुताबिक ही फैसला करे। पलक्कड़ में एक अवामी मीटिंग को खिताब करते हुए विजयन ने कहा कि अमित शाह ने कुन्नूर में जिस किस्म की तकरीर की है क्या मुल्क की बरसरे एक्तेदार (सताधारी) पार्टी के सदर की जुबान ऐसी होनी चाहिए?

राज्य सभा मेम्बर और सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अमित शाह का यह बयान सुप्रीम कोर्ट की सीधे-सीधे तौहीन है इस किस्म के बयानात के लिए हमारे मुल्क की जम्हूरियत और संवैधानिक सिस्टम मे कोई जगह नहीं है। उन्होने कहा कि अमित शाह की पार्टी और मोदी सरकार ने एक-एक कर मुल्क के तमाम संवैधानिक इदारों को तबाह करने का जो काम शुरू किया है यह बयान भी उसी कार्रवाई का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश की साबिक चीफ मिनिस्टर और बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती, साबिक चीफ मिनिस्टर समाजवादी पार्टी के सदर अखिलेश यादव, दिल्ली के चीफ मिनिस्टर अरविन्द केजरीवाल और राष्ट्रीय जनता दल के कौमी तर्जुमान मनोज कुमार झा ने भी अमित शाह के बयान की सख्त मजम्मत की है।

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