Generic selectors
Exact matches only
Search in title
Search in content
Search in posts
Search in pages
Filter by Categories
home
margin
slider
top three
top-four
travel
Uncategorized
viral
young india
कल्चर
दुनिया
देश
लीक से हटकर
विशेष
वीडियो
सटीक
सियासत
सियासत
हाशिया
हेल्थ

मुल्क में आर्थिक इमर्जेंसी का खतरा

हिसाम सिद्दीकी

मुल्क की जीडीपी यानी शरह ग्रोथ जिस तरह गिरी है और यह गिरावट हर शोबे में अभी भी जारी है उसे देख कर लगता है कि मुल्क जल्दी ही मआशी (आर्थिक) इमर्जेंसी का श्किर हो जाएगा, बेरोजगारों की फौज में रोज बरोज तेजी के साथ जो इजाफा हो रहा है वह और भी ज्यादा खतरनाक है। सरकार में वैसे तो इस वक्त पांच सालों में जीडीपी सबसे कम पांच (5) फीसद पर आ चुकी है जो अपने तमाम पड़ोसी मुल्कों यहां तक कि पाकिस्तान जैसे मुल्क से भी कम है। पांच फीसद भी हकीकत में ढाई (2.5) फीसद ही है क्योंकि मुल्क के चीफ एकनामिक एडवाइजर अरविन्द सुब्रामण्यम खुद ही कह चुके हैं कि जीडीपी तय करने के जिस फार्मूले पर अब मोदी सरकार अमल करती है उसमें दो से पौने तीन फीसद ज्यादा ही बताई जाती है। इस वक्त भारत की हालत यह हो गई है कि पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश की जीडीपी आठ प्वाइंट तीन (8.3) फीसद है। नेपाल की जीडीपी आठ फीसद, भूटान की सात प्वाइंट चार (7.4) फीसद और हर तरह से नंगे भूके पाकिस्तान की जीडीपी साढे पांच फीसद पर है और बढा कर फर्जी आंकडों के जरिए तैयार किए जाने के बावजूद भारत की जीडीपी पांच फीसद ही है। सबसे ज्यादा खतरनाक सूरते हाल यह है कि जरई (कृषि) शोबे में ग्रोथ दो फीसद तक पहुंच गई है। नोटबंदी के बाद से मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में जो गिरावट शुरू हुई थी वह इस हद तक पहुंच चुकी है कि इस सेक्टर में सरमायाकारी (निवेश) साठ फीसद से भी ज्यादा गिर चुकी है। बैंकों मे एनपीए सात लाख नव्वे हजार करोड़ से बढ कर आठ लाख पचपन हजार करोड़ तक पहुंच गया है। ईमानदारी का ढिंढोरा पीटते हुए अपोजीशन पार्टियों और सियासी मुखालिफीन के खिलाफ सरकारी एजेंसियों का खुल कर इस्तेमाल करने वाली मोदी सरकार में बैंकों के घपलों और घोटालो में रिकार्ड इजाफा होता जा रहा है। यह घपला कौन और किस की मदद से कर रहा है इसका जवाब सरकार नहीं दे रही है। 2017 में बैंकों में इकतालीस हजार एक सौ सरसठ (41167) करोड़ का घोटाला हुआ जिसमें 2018-19 यानी पहली अप्रैल 2018 से मार्च 2019 तक तकरीबन चौहत्तर (74) फीसद का इजाफा हो गया। इस मुद्दत मे बैंकों में घपला इकहत्तर हजार पांच सौ बयालीस (71542) करोड़ तक पहुंच गया है। वजीर-ए-आजम मोदी का हर दावा झूटा साबित हो रहा है। वह बार-बार डिजिटल और कैशलेस लेन-देन का जिक्र करते हैं लेकिन हकीकत यह है कि देश में 2018 में मुल्क में अट्ठारह लाख करोड़ के नोट नकदी की शक्ल में चलन में थे जो 2019 में बढ कर इक्कीस (21) लाख करोड़ हो गए। यह आदाद व शुमार (आंकड़े) रिजर्व बैंक आफ इंडिया के है। यूपीए सरकार में एक बार रूपए की कीमत डालर के मुकाबले पैंसठ रूपए पार कर गई थी तो गुजरात के चीफ मिनिस्टर की हैसियत से नरेन्द्र मोदी ने मनमोहन सिंह का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि देश में दो चीजें ही गिर रही हैं एक रूपए की कीमत और दूसरी वजीर-ए-आजम का एहतराम (सम्मान) दूसरी पब्लिक मीटिंग में मोदी ने कहा था कि रूपए के मुकाबले डालर की कीमत और वजीर-ए-आजम मनमोहन सिंह की उम्र बढने में मुकाबला हो रहा है। आज वही सूरतेहाल खुद मोदी के साथ हो रही है। पन्द्रह अगस्त से सात सितम्बर के दरम्यान डालर के मुकाबले रूपए की कीमत में रिकार्ड गिरावट आई। गुजिश्ता नौ महीनों में रूपया सबसे निचली सतह तक सत्तनवे (97) पैसे गिर गया सितम्बर का पहला हफ्ता खत्म होने तक डालर की कीमत बहत्तर रूपए चालीस पैसे (72.40) पहुच गई अब मोदी और उनके तमाम साथी खामोश हैं।
साबिक वजीर-ए-आजम और दुनिया के जाने माने माहिरे मआशियात डाक्टर मनमोहन सिंह ने मुल्क की मआशी हालत पर तश्वीश (चिंता) जाहिर करते हुए कहा कि मुल्क को इस मआशी बोहरान (संकट) से निकालने के लिए मोदी सरकार को मआशियात के जानकारों से बात और राय मश्विरा करके इसे ठीक करने की कोशिश करनी चाहिए।

मनमोहन सिंह ने कहा कि देश की मईशत (अर्थव्यवस्था) पर जो बुरा वक्त आया है वह फितरी (वास्तविक) नहीं है बल्कि कुछ लोगां की गलतियों का नतीजा है। उनका इशारा वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी और उनकी फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण की जानिब था। मनमोहन सिंह का कहना था कि खराब बंदोबस्त की वजह से मुल्क में यह बोहरान (संकट) पैदा हुआ है। उन्होने कहा कि मुल्क के नौजवानों, काश्तकारों, जरई (खेतिहर) मजदूरों, सनअतकारों और गरीब तबके को बेहतर सहूलतें मिलनी चाहिए। उनके इस मश्विरे नुमा बयान पर सरकार में बैठे लोगों को बहुत गुस्सा आ गया। मनमोहन सिंह जैसे दुनिया के बडे़ माहिरे मआशियात (अर्थशास्त्री) से मश्विरा करने के बजाए मोदी ने अपने ऐसे वजीर प्रकाश जावडेकर को मनमोहन सिंह को जवाब देने के लिए मैदान में उतार दिया। प्रकाश जावडेकर उन लोगों में शामिल हैं जो एकोनामी के पहले हरफ (अक्षर) ई से भी वाकिफ नहीं हैं।

इसीलिए प्रकाश जावडेकर ने कह दिया कि मनमोहन सिंह को मुल्क के मआशी (आर्थिक) हालात पर बोलने का कोई एखलाकी (नैतिक) अख्तियार नहीं है। क्योंकि उनकी सरकार के जमाने में हिन्दुस्तान की मईशत (अर्थव्यवस्था) दुनिया के मुल्कां में ग्यारहवें नम्बर पर थी अब पांचवें नम्बर पर है। यह जावडेकर का झूट है क्योकि इस वक्त भारत की मईशत (अर्थव्यवस्था) पांचवें नहीं सातवें नम्बर पर है।

मनमोहन सिंह के बाद मोहन गुरू स्वामी ने कहा कि देश के मआशी (आर्थिक) हालात बहुत ही नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। उन्होने इसके लिए जीएसटी को जिम्मेदार करार दिया उनका कहना है कि जीएसटी लागू करने से पहले उसपर अच्छी तरह गौर नहीं किया गया। अगर अच्छी तरह देश के तमाम माहिरीने मआशियात (अर्थशास्त्रियां) से राय मश्विरा करके जीएसटी लागू की गई होती तो हालात इतने खराब न होते। पहले नोटबंदी फिर जीएसटी दोनों ने मुल्क की छोटी घरेलू और मझोली सनअतों (उद्योगों) को तबाह किया। उसके बाद इन दोनों का असर मुल्क की छोटी बडी हर सतह की सनअतों पर पड़ गया। इसे जल्दी ठीक कर पाना और मुल्क की मईशत (अर्थव्यवस्था) को दोबारा पटरी पर ला पाना मौजूदा सरकार के बस की बात नहीं है। मोहन गुरू स्वामी के बयान पर बोलने की हिम्मत कोई नहीं कर सका।

इस वक्त मुल्क के मआशी (आर्थिक) हालात जिस नाजुक दौर से गुजर रहे हैं उनकी वजह से मआशी (आर्थिक) इमर्जेंसी का खतरा सर पर मडराता दिख रहा है। अगर ऐसा हो गया तो लोग बैंकों में जमा अपना ही पैसा अपनी जरूरतों के मुताबिक निकाल नहीं सकेंगे। हुकूमत ढाई-तीन लाख से ज्यादा पैसे निकालने पर न सिर्फ पाबदी लगा सकती है बल्कि इतनी रकम निकालने पर भी टैक्स लगा सकती है। जिन लोगों के सेविंग खातों में दस लाख या उससे ज्यादा बैलेंस होगा सरकार वह पैसा भी ले सकती है बैंक लाकरों को सीज करके उनकी तलाशी हो सकती है। लाकर्स में रखी रकम, सोना, डायमण्ड और कीमती जेवरात भी सरकार एक्वायर कर सकती है। सरकार के पास पैसा नहीं होगा तो यही कार्रवाइयां होगी अगर मआशी इमर्जेंसी के हालात पैदा होते हैं तो आम लोगां को नोटबंदी के वक्त से भी कई गुना ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

एक तरफ वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी 2022 तक मुल्क को पांच ट्रिलियन एकोनामी बनाने की बात कर रहे हैं दूसरी तरफ हालात यह हैं कि कांस्ट्रक्शन सेक्टर किसी भी तरह पटरी पर नहीं आ पा रहा है। काश्तकारी में कोई फायदा नहीं रह गया है। जरई शोबे (कृषि क्षेत्र) में ग्रोथ रेट पांच फीसद से ज्यादा होनी चाहिए थी वह दो फीसद पर पहुंच गई है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तबाही के दहाने पर पहुंच गया है। मारूति कार की मनेसर फैक्ट्री को सितम्बर के पहले हफ्ते में दो दिनों के लिए इस लिए बंद करना पड़ा कि जो कारें पहले ही बन चुकी थीं वह बिक नहीं रही हैं सिर्फ मारूति की बिक्री में एक-तिहाई तकरीबन पैंतीस (35) फीसद की गिरावट आ चुकी है। मारूति बार-बार अपने मुलाजमीन में एक-तिहाई लोगों की छटनी करने की तैयारी में है।

पार्ले जैसी कम्पनी के प्रोडक्ट्स की सत्तासी (87) सालों में पहली बार बिक्री में इतनी गिरावट आई कि कम्पनी को बंद करना पड़ा है। आटोमोबाइल सेक्टर में जाने माने सनअतकार राहुल बजाज हमेशा से भारतीय जनता पार्टी के हामी रहे हैं अब उन्होने भी बयान दिया है कि मोदी सरकार झूट बोल रही है मुल्क के आम लोगों में स्कूटर तक खरीदने की सलाहियत (क्षमता) नहीं बची है तो बाकी गाड़ियों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। राहुल बजाज ने कहा कि कोई भी विदेशी कम्पनी या मआशी एजेंसी भारत में पैसा लगाने के लिए तैयार नहीं है। उन्होने सवाल किया कि गुजिश्ता पांच सालों में कितना एफडीआई (गैरमुल्की डायरेक्ट इनवेस्टमेंट) आया है। इसका सरकार के पास जवाब नहीं है। जवाब देगी कैसे गैर मुल्की सरमाया (निवेश) भारत में आ ही नही रहा है तो सरकार जवाब क्या देगी। अब सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात यानी यूएई और बहरीन जैसे मुल्कों ने भारत में पैसा लगाने का वादा किया है।

तमाम सनअतों (उद्योगों) में मुलाजमतें बंद होने की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी उन लाखों नौजवानों के सामने है जिन्होने बैंकों से आला तालीम के लिए कर्ज लिए थे। इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की महंगी तालीम हासिल करने के बावजूद उनके लिए कहीं भी नौकरियां नहीं हैं उन नौजवानों को बैंक की किस्तें और व्याज अदा कर पाने में दुश्वारी है किसी के पास पैसा नहीं है। वह बैंक की किस्तें अदा नहीं कर  पा रहे हैं। चूंकि भारतीय जनता पार्टी में किसी को मआशी मालूमात नहीं है इसीलिए बिहार के नायब चीफ मिनिस्टर सुशील मोदी ने कह दिया कि सावन और भादो महीनों में लोग खरीदारी नहीं करते इसीलिए मंदी जैसे हालात पैदा हो गए हैं।

पूरा देश जानता है कि सरकार की जानिब से सिर्फ झूट बोला जा रहा है। वजीर-ए-आजम ने तो गलतबयानी करने के रिकार्ड बना रखे हैं। इसके बावजूद आम हिन्दुओं ने लोक सभा एलक्शन में मोदी को ही वोट दिए। मोदी ने 2014 में मुल्क की सत्ता संभालने के बाद पांच सालों तक देश की तरक्की का कोई काम नहीं किया 2019 के एलक्शन से ठीक पहले पुलवामा में दहशतगर्दों ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला कर दिया तो मोदी ने पुलवामा हमले और एयरस्ट्राइक के नाम पर वोट बटोर लिए। ऐसा सिर्फ भारत में ही हो सकता है कि भूके बेरोजगार लोग मोदी को इसलिए जिता लाए कि रोजगार न सही मोदी ने पाकिस्तान को तो औकात बता दी।

 

Democracia एक गैर-लाभकारी मीडिया संस्था हैं। जो पत्रकारिता को सरकार-कॉरपोरेट दबाव से आज़ाद रखने के लिए वचनबद्ध है। इसे जनमीडिया बनाने के लिए आर्थिक सहयोग करें।