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अयोध्या में 400 साल पुरानी बाबरी मस्जिद क़यामत तक मस्जिद रहेगी: मौलाना मदनी

अयोध्या मामले पर फैसले की घड़ी नजदीक आने के साथ ही समाज के विभिन्न तबकों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान किए जाने और किसी भी धार्मिक उन्माद को बढ़ावा न देने की अपील किए जाने का सिलसिला जारी है। इस संदर्भ में बुधवार को जमीयत उलेमाए हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी दिल्ली में कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा वह सिर्फ बाबरी मस्जिद की जमीन की विवाद सुलझाएगा और उसका धार्मिक मान्यताओं से कुछ लेना-देना नहीं होगा। ऐसे में देश में अमन और शांति का माहौल बना रहना चाहिए।

दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में पत्रकारों से बातचीत में मौलान अरशद मदनी ने कौमी आवाज की तरफ से पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि, “वह आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से फिर मिलने वाले हैं।” उन्होंने कहा कि शांति बहाल रखने की कोई भी अपील उस वक्त वक्त कामयाब नहीं हो सकती जब तक इसमें सभी समुदायों का नेतृत्व और जिम्मेदार लोगों सामने न आएं। उन्होंने कहा कि, “हमारी मुलाकात आज मोहन भागवत से होगी और हम इस बारे में विचार करेंगे कि कैसे देश में शांति का माहौल बरकरार रखा जाए।

जमीयत के प्रमुख ने कहा कि अयोध्या में 400 साल से बाबरी मस्जिद थी और कयामत तक मस्जिद ही रहेगी। सत्ता और ताकत के दम पर उसे कोई भी स्वरूप दिया जाए। किसी पार्टी या व्यक्ति का अधिकार नहीं है कि किसी विकल्प के उम्मीद में मस्जिद के दावे से पीछे हट जाए। ऐसे में साक्ष्य और सबूत के आधार पर सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला देगा उसे हम स्वीकार करेंगे।

अयोध्या मुद्दे के साथ-साथ कश्मीर और एनआरसी के मुद्दे पर भी मौलाना अरशद मदनी ने चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि सरकार कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए बातचीत का दरवाजा खुला रखना चाहिए और कश्मीरियों के मुद्दे को हर करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाने का मामला सुप्रीम कोर्ट में है और उम्मीद है कि कश्मीरियों को न्याय मिलेगा।

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