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मंदिर तोड़कर नहीं बनाया गया था विवादित ढांचा: मौलाना मदनी

राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले में जमीयत उलेमा हिंद के अध्‍यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने एक बार फिर कहा है कि वह कानूनी दायरे के अंदर राह तलाश रहे हैं। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अयोध्या केस में सुनाए गए फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है।

यह पुनर्विचार याचिका इस विवाद में मूल वादकारियों में शामिल एम. सिद्दीक के कानूनी वारिस मौलाना सैयद अशद रशीदी ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि फैसला त्रुटिपूर्ण है और इस पर संविधान के अनुच्छेद 137 के तहत पुनर्विचार की जरूरत है।

मदनी ने कहा कि पुनर्विचार याचिका दाखिल करके उनका इरादा देश में सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने का बिल्कुल नहीं है और ना ही मुसलमानों की ये सोच रही हैं, हम न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसलिए न्यायपालिका ने हमें जो हक दिया है उसी के तहत हम पुनर्विचार याचिका दाखिल किए।

उन्‍होंने कहा कि हमें पूर्णतः उम्मीद हैं कि जिस तरह कोर्ट ने ये माना हैं कि विवादित ढांचा  किसी मंदिर को तोड़कर नहीं बनाया गया और ना ही किसी मंदिर की भूमि पर बना हैं। उसी तर्ज पर हमें न्याय मिलेगा।

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