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सहारनपुर दंगा केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और भगवा गुंडों की मिलीभगत का अंजामः रिहाई मंच

डेमोक्रेसिया ब्यूरो

केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान की भगवा गुंडों से मिलीभगत के चलते सहारनपुर हिंसा को अंजाम दिया गया। वहां के दलितों पर हमला किया गया। रिहाई मंच ने बालियान पर आरोप लगाते हुए कहा कि आंदोलकारी दलितों पर पुरस्कार रख कर पूरे आंदोलन का अपराध की तरह पेश कर रहे हैं। रिहाई मंच ने सवाल किया है कि 20 अप्रैल को हुई घटना के बाद भाजपा के जिन लोगों ने एसएसपी के घर पर हमला किया उस पर पुलिस ने अभी तक क्या किया। सहारनपुर में जातिगत व सांप्रदायिक हिंसा क्षेत्रों में रिहाई मंच ने सात दिवसीय दौरा करते हुए शब्बीरपुर घटना के एक माह पर रिपोर्ट जारी की।

जांच समूह में सेड्यूल कास्ट कम्युनिटी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण प्रसाद, रिहाई मंच नेता शाहनवाज आलम, सेंटर फॉर पीस स्टडी से सलीम बेग, लेखक व स्तंभकार शरद जायसवाल, पटना हाई कोर्ट के अधिवक्ता अभिषेक आनंद, इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्ता संतोष सिंह, रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव और सहारनपुर से सामाजिक कार्यकर्ता अरशद कुरैशी के साथ शामिल रहे। जांच समूह को जातिगत हिंसा के बारे में शब्बीरपुर के 55 वर्षीय मामराज और 45 वर्षीय रोहतास ने बताया कि 5 अप्रैल 2017 को गांव के ही रविदास मंदिर के प्रांगण में बाबा साहब की मूर्ति जब दलित समुदाय ने लगानी चाही तो उस पर ठाकुर जाति के लोगों ने विरोध कर दिया। ठाकुरों ने स्थानीय भाजपा विधायक के माध्यम से थाने फोन कर इसके बारे में थानेदार से बात की जिसके बाद पुलिस ने आकर काम रुकवा दिया।

हम लोगों ने कहा कि जब समाज का प्रांगण है तो ऐसे में अनुमति की क्या जरूरत है, लेकिन वे नहीं मानें। फिर उसके बाद हम लोगों ने अनुमति के लिए प्रार्थनापत्र दिया जिसका ठाकुर जाति के लोगों ने विरोध कर दिया। पर गांव के कुछ ठाकुर जाति के लोगों ने हमारा समर्थन भी किया जिनमें श्याम सिंह, मनबीर, गुड्डू आदि हैं। इसके बाद मूर्ति लग गई और इसी के मद्देनजर 14 अप्रैल को बाबा साहब की जंयती को लेकर हुए कार्यक्रम में पुलिस बल मौजूद था।

5 मई को हमारे गांव से भी लोग शोभायात्रा निकालकर सिमलाने जाने वाले थे शिवकुमार प्रधान जी को मालूम चला कि वो लोग ऐसा सोच रहे हैं और कह रहे हैं कि चमारों की शोभायात्रा तो निकलने नहीं दी और बिना परमीशन के निकालेंगे इस बात की सूचना प्रधान जी ने थाने को दी थी कोई झगड़ा न हो जाए अशांति न हो जाए।

जिसपर एसडीएम साहब ने एसओ बड़गांव साहब को भेजा। 5 मई को उनकी डीजे की तैयारी हो गई जब उनको एसओ साहब ने समझाया कि कि बिना परमीशन के जुलूस नहीं निकाल सकते तो भी वे नहीं माने। उस समय तक गांव के ही लड़के थे। फिर भी वे राजपूताना जिन्दाबाद, डा0 अम्बेडकर मुर्दाबाद का नारा लगाते हुए निकल लिए। फिर वे सिमलाना में जहां महाराणा प्रताप की जयंती मनाने के लिए एकजुट थे, वहां से और महेषपुर से हजारों की संख्या में भगवा गमछे बांधे हाथों में तलवारें, लाठी डंडों के साथ दलितों की बस्ती पर हमला कर दिए। उन्होंने रविदास जी की मूर्ति तोड़ी और उस पर पेशाब किया। उस वक्त गेहूं की फसल खड़ी थी तो लोग कटाई पर गए थे, इसलिए गांव में आदमी नहीं थे।

उन्होंने बताया कि ठाकुर जाति के इस हमले में 66 से अधिक दलितों के घरों को तहस-नहस कर दिया गया। 12-13 को गंभीर चोटें आईं और 300 मीटर के एरिया में जो खूनी-तांडव हुआ उसमें बच्चों, महिलाओं और यहां तक की जानवरों तक पर हमले किए गए। जांच समूह ने सहारनपुर में स्थित संत रविदास छात्रावास भी गया और छात्रों से मुलाकात की और जानना चाहा कि वहां मीटिंग को लेकर जो विवाद हुआ वो क्या था? वहां जाने पर मालूम हुआ कि 9 की बैठक को लेकर पुलिस ने 8 की रात से ही डेरा डाल दिया था।

20 अप्रैल को सड़क धूधली में हुए बाबा साहब भीम राव अंबेडकर की शोभायात्रा को लेकर दलित-मुस्लिम तनाव को लेकर जांच समूह संड़क दूधली भी पहुंचा। जांच समूह से महताब अली ने कहा कि यहां शोभायात्रा को लेकर तनाव बनाने की कोशिश बाहरी तत्व करते हैं। जबकि अंबेडकर शोभायात्रा को लेकर जब हस्ताक्षर अभियान चलाया गया तो उसके पक्ष में मेरे पिता अब्दुल रहमान साहब पहले हस्ताक्षर करने वाले शख्स थे। पर प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्र मानते हुए अनुमति नहीं दीं।

उन्होंने बताया कि दरअसल जुलूस को मुस्लिम बस्ती से निकालने की बात है जबकि उसका रास्ता दूसरा था। अबकी बार 13 अप्रैल को दलित भाईयों ने जनकपुरी थाने में लिखित दिया कि 14 अप्रैल को वे गांव में ही स्थित अंबेडकर भवन में भण्डारा करेंगे। पर 20 अप्रैल की सुबह 9 बजे के आस-पास बीजेपी के लोग एकत्र हुए और वहीं से सड़क दूधली के लिए शोभा यात्रा का जुलूस निकाल दिए।

इसकी हम लोगों को कोई सूचना नहीं थी यह बाद में पता चला इस जुलूस में बीजेपी सांसद राघव लखन पाल भी शामिल रहे। एक ट्राली पर शोभायात्रा निकालते हुए डीजे बजाते हुए पीछे राघव लखन पाल की गाड़ी थी वो गली में घुस गए। सबसे आगे पुलिस चल रही थी। ट्राली में ईट-पत्थर भरा हुआ था और वे जय श्री राम और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे। इसके बाद अली कम्युनिकेशन के पास जैसे पहुंचे पुलिस ने उन्हें रोका और यहीं से विवाद शुरु हुआ और राघव लखन पाल की मौजूदगी में मुस्लिम समुदाय की दुकानों में तोड़-फोड़ हुई। और इसके बाद जो उन लोगों ने एसपी और पुलिस के साथ किया वो सब जग जाहिर है।

जांच समूह जब सड़क धूधली की दलित बस्ती में गया तो वहां उसी दिन कुछ गिरफ्तारियों की वजह से लोग डरे-सहमे थे। उन लोगों ने आगे तो बात-चीत से मना किया फिर कहा कि आप हमारा नाम नहीं छापें तो हम बताएंगे क्यों कि मीडिया में नाम आने के बाद अज्ञातों में पुलिस नाम दिखाकर उठा ले जा रही है। जबकि 20 अप्रैल को शोभा यात्रा निकालने वाले बाहरी थे उन पर कोई कार्रवाई नहीं उल्टे हम पर कार्रवाई और गिरफ्तारी करके हम लोगों को परेशान किया जा रहा है।

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