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इलाहाबाद युनिवर्सिटी में भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लड़ने पर छात्रसंघ उपाध्यक्ष अखिलेश यादव हुए निलंबित एवं ब्लैक लिस्टेड

अभी हाल ही में इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ प्रतिबंध और छात्र संघ उपाध्यक्ष के निलंबन और ब्लैक लिस्टेड को लेकर काफी सुर्खियों में है ऐसा माना जा रहा है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार के शह पर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा यह कार्य किया जा रहा । इस विषय से पूरे देश के छात्र नौजवानों के राजनीति में आने पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पूरब के ऑक्सफोर्ड के रूप में प्रतिष्ठित रहा है। विश्वविद्यालय के शिक्षकों तथा छात्रों ने स्वतंत्रता आंदोलन तथा स्वतंत्र भारत के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वर्तमान समय में विश्वविद्यालय की दशा अत्यंत सोचनीय और दयनीय है। वर्तमान कुलपति की तानाशाही नीतियों, भ्रष्टाचार और अनियमितता के कारण विश्वविद्यालय पतन के गर्त में चला गया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जारी NIRF रैंकिंग 2016 में विश्वविद्यालय 67वें पर था और 2019 में 200 विश्वविद्यालयों की सूची से बाहर हो गया है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय का परसेप्शन इंडेक्स 84 से घटकर 2.8 हो गया है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव प्रोफेसर जे एस संधू की अध्यक्षता में भी एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करके विश्वविद्यालय की गंभीर परिस्थितियों पर एक रिपोर्ट मांगी थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार समिति ने विश्वविद्यालय के कुलपति की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े किए थे तथा त्वरित कार्रवाई की अनुशंसा भी की थी ।

इलाहाबाद विद्यालय की विषम परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस इन बैंगलोर के प्रोफेसर गौतम देसी राजू की अध्यक्षता में एक 5 सदस्य ऑडिट समिति का गठन किया था जिसमें जेएनयू, बोस इंस्टीट्यूट ,कोलकाता आईआईएम, संबलपुर तथा मणिपुर केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित आचार्य भी सम्मिलित थे। इस समिति ने 15 नवंबर 2017 को अपनी रिपोर्ट तैयार की जो न केवल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग वरन मंत्रालय को भी उपलब्ध है।

इस समिति की संक्षिप्त रिपोर्ट—-

समिति का ये मत है कि विश्वविद्यालय के अकादमिक, प्रशासनिक एवं वित्तीय व्यवस्था अत्यंत जर्जर स्थिति में है। यदि विश्वविद्यालय में वर्तमान व्यवस्था बनी रहती है तो विश्वविद्यालय अव्यवहारिक एवं असाध्य हो जाएगा और ऐसे में मानव संसाधन विकास मंत्रालय को इस संबंध में उचित कार्रवाई करनी चाहिए।(उपरोक्त संदर्भ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय की जांच रिपोर्ट के आधार पर है।)

इलाहाबाद विद्यालय तथा उसके संगठक महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में व्यापक भ्रष्टाचार एवं भाई-भतीजावाद से संबंधित दर्जनों शिकायत मंत्रालय को प्राप्त हुई है। इनमें से कुछ नियुक्तियां फर्जी मार्कशीट एवं डिग्रियों के आधार पर की गई है । इनमें से एक प्रकरण में जांच के उपरांत पुलिस विभाग ने संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराओं 419 ,420, 467 ,468 ,471 के अंतर्गत चीफ ज्यूडिशल मजिस्ट्रेट ने भी आरोप पत्र दायर किए हैं।

विगत सितंबर माह में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक पूर्व छात्रा से उसके कथित अंतरंग संबंधों के गंभीर आरोप लगे थे।उक्त महिला ने दिनांक 1 अक्टूबर 2018 एक हस्तलिखित पत्र प्रेषित कर स्पष्ट रूप से मांग की थी कि मैं न्यायालय के समक्ष अपनी बात स्वयं उपस्थित होकर कहना चाहती हूं, अपना पक्ष साक्ष्य सहित स्वयं रखना चाहती हूँ। अतः मुझे अपनी बात पक्ष न्यायालय के समक्ष स्वयं रखने का अवसर दें। इतना ही नहीं बल्कि 1 अक्टूबर 2018 को ही अपने हलफनामे में भी उक्त महिला ने यह मांग की थी कि वह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जांच अधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखेगी। महिला ने समय-समय पर यह भी कहा कि उसकी जान को खतरा है अतः यदि सुरक्षा दी जाए तो इलाहाबाद विश्वविद्यायल में आकर जांच अधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखेगी।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति ने जब से कार्यभार संभाला है तब से लगातार छात्रसंघ के पदाधिकारी, छात्र एवं छात्राओं सहित कर्मचारी संघ के पदाधिकारी भी आंदोलनरत हैं। इनकी लोकतांत्रिक आवाज को दबाने के लिए चुने हुए प्रतिनिधियों और छात्रों के प्रति कुलपति का रवैया तानाशाही रहा है ,यह बिना किसी ठोस कारण के छात्रनेताओं एवं छात्रों का निष्कासन व निलंबन लगातार करते रहें हैं, अभी वर्तमान में एनएसयूआई से छात्र संघ उपाध्यक्ष अखिलेश यादव को निलंबित एवं ब्लैक लिस्टेड किया है। जिसकी वजह से उसका अकादमिक कैरियर बर्बाद हो जाएगा।

निलंबित एवं ब्लैक लिस्टेड छात्र संघ उपाध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है जब से हम छात्र संघ उपाध्यक्ष बने हैं लगातार छात्र हितों के मुद्दे, सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन की उपरोक्त गलत नीतियों का मुखर होकर विरोध करते आए है, जिसमें मूख्यतः —

1. लाइब्रेरी की जर्जर स्थिति पर सवाल उठाया तो विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कारण बताओ नोटिस दी गई।

2. छात्रावास समय से न मिलने के कारण, छात्रावास प्रशासन से परेशान होकर छात्र रजनीकांत ने आत्महत्या कर लिया। विश्वविद्यालय के गैरजिम्मेदाराना रवैये के विरोध में छात्रसंघ एव छात्रों ने आंदोलन किया और भुक्तभोगी रजनीकांत के माता-पिता के साथ 5 दिन का आमरण अनशन किया। छात्रावास की असुविधा के लेकर जब हमलोगों ने आवाज उठाई तो प्रशासन ने प्रतिक्रिया स्वरूप हम लोगों के आंदोलन को कुचलने के लिए हम छात्रों पर f.i.r. दर्ज करवायी तथा जेल भेजने का काम किया।

3. कुलपति एवं प्रोफेसरों पर लगे यौन उत्पीड़न के मामले का छात्रों द्वारा कैंपस में जमकर विरोध किया गया, जिसकी वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मुझे लगातार निशाने पर लिया जा रहा है और परेशान किया जा रहा है।

4. सरकार की गलत नीतियों पर जब सवाल खड़ा किए तब तमाम धाराओं के तहत मुकदमे लादे गए। 69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में लगभग हजारों छात्रों के साथ मै छात्रसंघ उपाध्यक्ष जब इलाहाबाद में योगी जी को ज्ञापन देने जा रहा था उसी समय ट्रेनी आईपीएस द्वारा छात्रसंघ भवन पर चढ़कर मेरे साथ मारपीट की जाती है, विरोध करने पर मेरे व मेरे अन्य 14 साथियों के ऊपर धारा 307, 7CLA, SC/ST सहित तमाम संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जाते हैं ।

5. अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की परीक्षाओं में धांधली को लेकर इलाहाबाद व सूबे में जमकर विरोध हो रहा था, इस आंदोलन का इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ ने नेतृत्व किया व बढ़-चढ़कर विरोध दर्ज कराया। इसके उपरांत सरकार द्वारा हमें टारगेट किया जाता है और जेल भेजा दिया जाता है।

6. केंद्र सरकार द्वारा 13 प्वाइंट रोस्टर लागू किये जाने को लेकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जमकर विरोध होता है। इस आंदोलन को इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ नेतृत्व करता है। जिसमे पुनः मुझे निशाना बना कर परेशान किया गया।

7. सूबे की कानून व्यवस्था को लेकर हमेशा से ही छात्र संघ भवन से आवाज उठाई जाती है एवं शहर में भी आंदोलन किया जाता है जिससे लगातार सरकार द्वारा इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ को टारगेट किया जा रहा है।

8. एशिया के सबसे पुराने छात्र संघ को केंद्र व राज्य सरकार के इशारे पर बैन किया जा रहा है। छात्रसंघ बहाली को लेकर आंदोलन करने पर दमनात्मक कार्यवाही की जाती है व विभिन्न धाराओं में नाम डाल कर जेल भेजा जाता है। आने वाले दिनों में प्रशासनिक व्यवस्था व सरकार की नीतियों पर छात्र आवाज न उठा सकें इसलिए छात्रसंघ को बैन किया जा रहा है।

उपरोक्त सहित तमाम मसलों को लेकर हम यूनियन की तरफ से इलाहाबाद विश्वविद्यालय में लगातार आंदोलन कर रहे थे, इसलिए सबसे पहले मुझे विश्वविद्यालय से निलंबित किया गया है और विश्वविद्यालय प्रशासन का जब इतने से मन नहीं भरता है तो मुझे विश्वविद्यालय में प्रवेश से रोक व ब्लैक लिस्टेड किया जाता है। ताकि विरोध की कोई लोकतांत्रिक आवाज विश्वविद्यालय में न उठे। मुझे और छात्रों को परेशान करने एवं प्रताड़ित करने की पूरी की पूरी कार्यवाही सरकार के शह पर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा किया जा रहा है।

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