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किसी धर्मगुरू या डाक्टर के कहने पर नहीं संघर्षशील महिलाओं ने खुद धरना स्थगित किया है: शबीह फ़ातिमा

सीएए , एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ लखनऊ के घंटाघर पर पिछले 66 दिनों से जारी आंदोलन को कोराना संकट के मद्देनजर स्थगित करने का फैसला कल संघर्षशील महिलाओं ने खुद लिया था ।

उक्त बयान जारी करते हुए घंटाघर आंदोलन की संघर्षशील महिला कमेटी की सदस्य शबीह फातिमा रिजवी ने कहा कि महिलाओं ने किसी धर्मगुरु या सामाजिक कार्यकर्ता के कहने पर या किसी दबाब में आंदोलन को स्थगित नहीं किया है बल्कि कोरोना वाइरस के देश और दुनिया के पैमाने पर बढ़ते खतरे को देखते हुए नागरिकता संशोधन अधिनियम, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर व राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के खिलाफ चल रहे धरने का रूप बदला है ताकि महिलाओं का बड़ा जमावड़ा एक जगह पर न रहे। हम महिलाएं धरना स्थल से तात्कालिक तौर पर हटी हैं किंतु हमारा संघर्ष जारी रहेगा। हमारे पोस्टर, बैनर, चप्पल, जूतियां, दुपट्टे, आदि अन्य सामान धरना स्थल पर हमारी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

लोकतंत्र व संविधान को बचाने हेतु शुरू किया गया हमारा संघर्ष जारी रहेगा। घंटाघर की महिला आंदोलनकारी एरम, रुखसाना जिया, मेहनाज , नसरीन आदि ने कहा कि हम सभी आंदोलनकारी महिलाओं ने पुलिस कमिश्नर लखनऊ को पत्र सौंपकर आंदोलन स्थगित करने के निर्णय से कल ही अवगत करा दिया था ।

हम चाहते हैं कि पूरा देश एकजुट होकर कोरोना संकट का मुकाबला करे और नागरिकों की जिंदगियों की हिफाजत करने के लिए सरकार सभी की निशुल्क कोरोना जांच कराए। सभी नागरिकों को जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाए। लॉक डाउन की स्थिति में सरकार तत्काल राहत पैकेज घोषित करे।

गरीबों मजदूरों समेत आम नागरिकों को जीवन उपयोगी बस्तुओं की निशुल्क आपूर्ति की जाए। सभी जनधन खाता धारकों , मनरेगा मजदूरों , असंगठित क्षेत्र के मजदूरों समेत नागरिकों को 10 हजार रुपया की सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए। संविदा मजदूरों , निजी क्षेत्र के कर्मचारियों समेत सभी कार्मिकों को वेतन का भुगतान कराया जाए।

महिला आंदोलनकारियों ने धरना स्थगित करने के बाद मुख्यमंत्री योगी से अपील की है कि वे भी बड़ा दिल दिखाएं और सभी आंदोलनकारियों पर लगाये गए सभी मुकदमें , नोटिस आदि वापस ले लें , लखनऊ में लगाये गए आंदोलनकारियों के होर्डिंग हटवा दें।और एनपीआर की प्रक्रिया को उत्तर प्रदेश में वापस लेने की घोषणा कर दें।

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