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राहुल का सच भी पसंद नहीं और मोदी तो तीन साल से विदेशों में मुल्क़ की तौहीन वाली तकरीरें कर हैं

 

हिसाम सिद्दीकी

नरेंद्र मोदी ने तो भारत छोड़ो आंदोलन का जश्न मनाते वक्त पार्लियामेंट में जंग ए आज़ादी के सूरमाओं की तौहीन करने का काम किया। ‘क्विट इंडिया’ नारा देने वाले यूसुफ मेहर अली और आठ अगस्त को कांग्रेस के मुंबई एजलास में यह तजवीज़ पेश करने वाले जवाहर लाल नेहरू तक का नाम नहीं लिया। शायद इसलिए कि उनका आरएसएस कुनबा ‘क्विट इंडिया’ आंदोलन में शामिल न होकर अंग्रज़ों के साथ खड़ा था।

राहुल गांधी पर एतराज़ करते वक्त स्मृति ईरानी भूल गईं कि राहुल गांधी ने मुल्क़ पर नहीं मोदी सरकार पर तंज किया है। खुद मोदी तो तीन सालों से दुनिया भर में जाकर अभी तक के तमाम प्राइम मिनिस्टर्स की और देश की तौहीन करते फिर रहे हैं। कहते हैं सत्तर सालों में देश में कुछ हुआ ही नहीं। वर्ष 2014 से पहले देश एक बेईमान मुल्क़ समझा जाता था।

अपने अमरीकी दौरे के दौरान राहुल गांधी ने अपने, अपनी पार्टी और आरएसएस और नरेंद्र मोदी की सरकार के सिलसिले में सच बोल दिया तो पूरा आरएसएस कुनबा बीजेपी और नरेंद्र मोदी के वजीरों खुसूसन स्मृति ईरानी ने घबराहट में बेसिरपैर की बयानबाजी शुरू कर दी। राहुल गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी गुरूर में डूब गई थी, इसलिए 2014 में पार्टी को बुरी तरह शिकस्त का सामना करना पड़ा।

इसी के साथ उन्होंने मुल्क़ के मौजूदा हालात बयां करते हुए कहा कि आज पूरे हिंदुस्तान में नफरत और हिंसा की सियासत का बोलबाला है। उन्होने तस्लीम किया कि वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी उनसे बेहतर मुकर्रिर (वक्ता) हैं वह अपनी तक़रीर से लोगों को मैसेज देने के आर्ट से वाकिफ हैं लेकिन वह सिर्फ अपनी बात कहते हैं वह अपने अलावा बीजेपी लीडरान की बात भी सुनना पसंद नहीं करते।

मरकज़ी वज़ीर स्मृति ईरानी को राहुल गांधी के बयान पर बहुत गुस्सा आ गया उन्होने कहा कि अमरीका में राहुल गांधी ने मुल्क और वजीर-ए-आज़म पर बयानबाजी करके दोनों की तौहीन की है। वह यहां तक कह गई कि वह कुन्बापरस्ती (वंशवाद) के एक नाकाम सियासतदां हैं। उन्होने कहा कि वज़ीर-ए-आज़म मोदी पर बयानबाजी करते वक्त राहुल गाँधी भूल गए कि 2014 में मुल्क़ के अवाम ने मोदी को अपने वोट से मुतखब किया था।

राहुल पर गुस्सा उतारते वक्त स्मृति ईरानी भूल गई कि उनके लीडर और भगवान का दर्जा हासिल कर चुके नरेंद्र मोदी तो तीन सालों से विदेशों में जाकर मुल्क के अब तक के तमाम प्राइम मिनिस्टर्स की तौहीन करने वाली तकरीरें करते रहे हैं। हर जगह वह यही कहते हैं कि सत्तर सालों में हिंदुस्तान में कुछ काम ही नहीं हुआ।

मई 2014 में उनके सत्ता संभालने के बाद से ही मुल्क तरक्की के रास्ते पर चला है। स्मृति ईरानी को यह क्यों नहीं दिखता कि विदेशों में जाकर नरेंद्र मोदी पंडित जवाहर लाल नेहरू से मनमोहन सिंह तक तमाम प्राइम मिनिस्टर्स को नाकारा और नाअहल करार देने की नाकाम कोशिशें  करते रहे हैं। मोदी ने तो पार्लियामेंट तक में जंगे आजादी के सिपाहियों की तौहीन करने का ‘पाप’ किया है।

चंद रोज़ कब्ल ही उन्होने आठ अगस्त को अंग्रेज़ों भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं सालगिरह का जश्न मनाने के लिए पार्लियामेट का खुसूसी एजलास बुलवाया। उसमें उन्होने दुनिया भर की लफ्फाजी की लेकिन ‘क्विट इंडिया’ या भारत छोड़ो का नारा देने वाले मशहूर लीडर और जंगे आजादी के सिपाही यूसुफ मेहर अली का जिक्र तक नहीं किया।

शायद इसलिए कि मोदी को किसी भी मुसलमान का नाम लेना पसंद नहीं है। आठ अगस्त को कांग्रेस के मुंबई एजलास में भारत छोड़ो तजवीज पेश करने वाले जवाहर लाल नेहरू का नाम भी मोदी की जुबान से नहीं निकला था। ‘क्विट इंडिया’ का नारा देने वाले और इस नारे की तजवीज कांग्रेस एजलास में पेश करने के जिक्र के बगैर यह भारत छोड़ो आंदोलन का कौन सा जश्न था? मोदी की मजबूरी शायद यह थी कि उनके आरएसएस परिवार और उससे पहले हिन्दू महासभा के तमाम लोग क्विट इंडिया आंदोलन में शामिल नहीं थे वह सब तो अंगे्रजों की गुलामी में लगे थे शायद इसीलिए मोदी  भी भारत छोड़ो आंदोलन चलाने वालों के खिलाफ हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और साप्ताहिक उर्दू  जदीद मरतज़ के संपादक हैं )