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सिसोदिया को अस्पताल से मिली छुट्टी, केजरीवाल धरने पर

राजधानी दिल्ली में राज्य सरकार, IAS अफसर और उपराज्यपाल के बीच जारी खींचतान मंगलवार को खत्म हो सकती है. आज मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के एलजी हाउस पर धरने का नौंवा दिन है. इससे पहले सोमवार को आईएएस अफसरों ने केजरीवाल की उस अपील का स्वागत किया था जिसमें उन्होंने सभी अफसरों को सुरक्षा मुहैया करने की बात की थी.

गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल के साथ अनशन पर बैठे सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया की तबीयत बिगड़ने के बाद दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. मंगलवार सुबह दोनों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है, दोनों अपने-अपने घर चले गए हैं. हालांकि, अरविंद केजरीवाल और गोपाल राय अभी भी LG हाउस में डटे हुए हैं.

केजरीवाल ने की थी अपील

 मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को कहा था कि आईएएस अफसर हमारे परिवार का हिस्सा हैं. उन्हें सुरक्षा देना हमारी जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि चुनी हुई सरकार का विरोध आईएएस अफसर बंद कर दें. मुख्यमंत्री की ओर से अफसरों की सुरक्षा का भरोसा जताए जाने के बाद आईएएस एसोसिएशन ने भी नरमी दिखाई थी.

वहीं उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी ट्वीट कर कहा था कि अगर IAS अफसर बातचीत को तैयार हैं तो उपराज्यपाल अनिल बैजल को सरकार-अफसरों की बात कराने में भूमिका निभानी चाहिए. बताया जा रहा है कि केजरीवाल सरकार के कुछ मंत्री भी अफसरों और सरकार के भी मध्यस्थता की भूमिका अदा कर सकते हैं. हालांकि अभी तक ये सब सिर्फ ट्विटर पर ही हो रहा है, देखना होगा कि असल में बातचीत कब शुरू होती है.

पार्टी ने बुलाई थी बडी बैठक

सोमवार को आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर बैठक बुलाई. बैठक के बाद आम आदमी पार्टी के नेता और सांसद संजय सिंह ने कहा कि जब मंत्री बैठक के लिए अधिकारियों को बुलाते हैं तो फाइलों पर चर्चा करने के लिए तो ये आते नहीं हैं. शिवसेना ने एनडीए में होने के बावजूद हमारा समर्थन किया है. चार राज्यों के मुख्यमंत्री और कई राजनीतिक दलों ने भी हमारा समर्थन किया है.

संजय सिंह ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अधिकारियों को सुरक्षा देने की बात कहने पर आगे कदम बढ़ाया है तो आईएएस एसोसिएशन को भी ऐसा करना चाहिए. अभी राजधानी दिल्ली में लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.

दिल्ली हाईकोर्ट ने की सख्त टिप्पणी

इस मामले पर टिप्पणी करते हुए सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि हम समझ नहीं पा रहे हैं कि ये धरना है या हड़ताल और क्या इसकी कोई अनुमति ली गई या खुद ही तय कर लिया गया.

कोर्ट ने पूछा कि अगर ये खुद व्यक्तिगत रूप से तय किया गया (केजरीवाल और मंत्रियों द्वारा) फैसला है तो ये एलजी के घर के बाहर होना चाहिए था. क्या एलजी के घर के अंदर धरना करने के लिए इजाजत ली गई है? हाईकोर्ट ने कहा कि आप कैसे किसी के घर या दफ्तर में जाकर हड़ताल पर बैठ सकते हैं.

उन्होंने सीधा सवाल किया कि जैसे ट्रेड यूनियन अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठती है, क्या ये वैसी ही हड़ताल है. धरने पर बैठने का फ़ैसला कैबिनेट का है या ये व्यक्तिगत फ़ैसला है. कोर्ट की ओर से कहा गया है कि इसका जल्द से जल्द कोई समाधान ढूंढा जाना चाहिए.

बीजेपी भी धरने पर

एक तरफ जहां केजरीवाल एलजी हाउस में धरने पर हैं तो दूसरी तरफ बीजेपी नेता भी मुख्यमंत्री आवास पर धरने पर बैठे हैं. विजेंद्र गुप्ता की अगुवाई में बीजेपी नेता अनशन पर बैठे हैं और उनके साथ आप के बागी नेता कपिल मिश्रा भी हैं. बीजेपी की ओर आम आदमी पार्टी की सच्चाई उजागर करने की बात कही जा रही है.

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