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सेंसर बोर्ड पर बरसीं शबाना आज़मी, कहा-उसका काम फिल्मों में कांट-छांट करना नहीं है

बॉलीवुड की बेमिसाल अदाकारा शबाना आजमी ने कहा कि भारत में फिल्म प्रमाणन के लिए जिस तरह की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, वह सही नहीं है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीएफसीबी) का काम फिल्मों में काट-छांट करना नहीं, बल्कि उसे वर्गीकृत करना है।

अपने फिल्मी करियर के दौरान निभाए हर किरदार को अपने अभिनय कौशल से यादगार बनाने वाली शबाना ने समाजसेवा के विभिन्न कार्यो में शरीक रहने के साथ-साथ हॉलीवुड फिल्म ‘द ब्लैक प्रिंस’ के जरिए एक बार फिर अपने बेमिसाल अभिनय की मिसाल पेश की है।

शबाना आजमी ने राजधानी दिल्ली में आयोजित ‘द ब्लैक प्रिंस’ के प्रीमियर पर मौजूदा समय में विवादों से घिरे सेंसर बोर्ड का जिक्र करने पर कहा कि सबसे पहली बात है कि प्रमाणन बोर्ड का नाम सेंसर बोर्ड नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसे सेंसर (काट-छांट करना) करने के लिए नहीं, बल्कि फिल्मों को वर्गीकृत करने के लिए बनाया गया है, जिसके तहत बोर्ड यह निर्णय करता है कि किस फिल्म को कौन सा वर्ग दिया जाना चाहिए।

सिर्फ इतना ही नहीं शबाना ने यह भी कहा कि हम जिस प्रक्रिया का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह ब्रिटिश प्रक्रिया है, जिसके तहत कुछ लोगों को चुनकर बोर्ड में बैठा दिया जाता है और वे 30-35 लोग मिलकर तय करते हैं कि हमारी फिल्मों में क्या नैतिकता होनी चाहिए। और इस बोर्ड में अधिकांश वे लोग होते हैं, जिनका मौजूदा सरकार की ओर रुझान ज्यादा रहता है, फिर चाहे वह कांग्रेस की हो या फिर भाजपा की।

शबाना ने कहा कि मुझे लगता है यह प्रक्रिया सही नहीं है, हमें फिल्म प्रमाणन के लिए अमेरिकी प्रक्रिया अपनानी चाहिए। वहां का बोर्ड फिल्म उद्योग के लोगों का है और वहां सब कुछ फिल्मकार ही मिलकर तय करते हैं। वे फिल्म को देखने के बाद आपस में विचार-विमर्श करते हैं कि कौन सी फिल्म हर इंसान के देखने लायक है, कौन से दृश्य बच्चों के लिए सही नहीं हैं, इसलिए फिल्म के इन-इन हिस्सों पर कट्स लगाने चाहिए। गौरतलब है कि ‘द ब्लैक प्रिंस’ भारत में 21 जुलाई को हिंदी, अंग्रेजी व पंजाबी भाषा में रिलीज हुई है।

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