Generic selectors
Exact matches only
Search in title
Search in content
Search in posts
Search in pages
Filter by Categories
home
margin
slider
top three
top-four
travel
Uncategorized
viral
young india
कल्चर
दुनिया
देश
लीक से हटकर
विशेष
वीडियो
सटीक
सियासत
हाशिया
हेल्थ

एक बालिग़ हिंदू मुसलमान बन गई तो सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए से कहा, पता लगाओ सच्चाई

सर्वोच्च न्यायालय ने 2016 में केरल में एक हिंदू लड़की के धर्मातरण और शादी की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जांच कराने का बुधवार को आदेश दिया. सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिृवत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर.वी. रविंद्रन जांच की निगरानी करेंगे. प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर और न्यायमूर्ति डी.वाय. चंद्रचूड़ की सदस्यता वाली पीठ ने मामले में जांच का आदेश देते हुए अंतिम फैसला लेने से पहले अदालत में लड़की की पेशी की आवश्यकता बताई.

पीठ ने कहा कि अदालत एनआईए, केरल सरकार और अन्य सभी से इस मामले में विवरण लेने के बाद ही फैसला लेगी. अदालत ने यह आदेश याचिकाकर्ता शफीन जहां के वकील कपिल सिब्बल के यह कहने के बाद दिया कि अदालत को लड़की से बात करने के बाद ही कोई फैसला लेना चाहिए.

केरल उच्च न्यायालय ने धर्म परिवर्तन करने वाली लड़की की शादी रद्द कर दी थी. इसके बाद याचिकाकर्ता जहां ने उच्च न्यायालय के फैसले को शीर्ष न्यायालय में चुनौती दी है. वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने पीठ से कहा कि यह अंतर-धार्मिक मामला है, इसलिए अदालत को इसमें सावधानी बरतनी चाहिए.

वरिष्ठ पत्रकार अजित साही ने इस पूरे प्रकरण पर फेसबुक पोस्ट लिखकर नाराज़गी जताई है. उन्होंने लिखा है…

ये देश है या नौटंकी?

एक बालिग़ हिंदू औरत मुसलमान बन गई. मुसलमान बनकर उसने एक बालिग़ मुसलमान आदमी से शादी कर ली. दुनिया-जहाँ को इसमें बहुत ख़तरा दिखा. औरत के बाप ने अदालत में अर्ज़ी दी. पुलिस ने उस बालिग़ औरत को उसके पति से अलग करके बाप के घर भेज दिया. हाई कोर्ट ने कहा संगीन मामला है, लव जिहाद लगता है. औरत का पति सुप्रीम कोर्ट पहुँचा. सुप्रीम कोर्ट ने आतंकवाद की जाँच करने वाली केंद्रीय एजेंसी एनआईए को तफ़्तीश करने का हुक्म दिया. वो रपट आनी बाक़ी है. तब तक वो बालिग़ औरत पति से दूर बाप के घर रहेगी.

ये अदालत है या तमाशा? हम अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बने रहते हैं कि हम दुनिया के सबसे प्रगतिशील मुल्कों और समाजों में हैं. इसे प्रगतिशील कहते हैं? पच्चीस साल की औरत अपनी मर्ज़ी से शादी नहीं कर सकती? सुप्रीम कोर्ट को और कोई काम नहीं है? सुप्रीम कोर्ट को ये नहीं दिखाई देता है कि मध्यप्रदेश सरकार नर्मदा घाटी के लाखों विस्थापित लोगों के पुनर्वास पर ख़ुद सुप्रीम कोर्ट के आदेश की दिनदहाड़े अवहेलना कर रही है? सुप्रीम कोर्ट को ये नहीं दिखाई देता कि खुलेआम तथाकथित गोरक्षक आतंकवाद फैला रहे हैं? सुप्रीम कोर्ट को ये नहीं दिखाई देता कि 2013 में मुज़फ़्फ़रनगर में हुए दंगों में संघी/भाजपाई अभियुक्तों के ख़िलाफ़ यूपी पुलिस एक एक करके सबूत नष्ट कर रही है? सुप्रीम कोर्ट को ये नहीं दिख रहा कि किस तरह भीम आर्मी के नेताओं पर अन्याय और ज़ुल्म किया जा रहा है? नहीं दिखती क्या सुप्रीम कोर्ट को ऑक्सीजन की कमी से गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में मौतों के मामले में आदित्यनाथ की सरकार की बेइंतहा बेहयाई?

अरस्तु ने कहा था कि वही समाज मज़बूत बनता है जिसकी अदालत हर नागरिक को क़ानून के सामने बराबर रखती है. भारत के न्यायाधीशों को सोचना चाहिए कि क्या वो तारीख़ की उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं? इस सवाल से वो भाग नहीं सकते.