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दक्षिणपंथी विचारधारा ने मुल्क का मानसिक बंटवारा कर दिया है

मुहम्मद ज़करिया खान

वर्तमान भारत की सच्चाई ये है, कि मोदी सरकार के आने के बाद से लोग खुलकर नफ़रत फ़ैला रहे हैं. मुस्लिम समाज को तो एलियन की तरह प्रस्तुत किया जा रहा है.
संघियों ने और संघी मीडिया ने नफ़रत का लेवल इस स्तर तक पहुंचा दिया है. कि बहुसंख्यक समाज मुस्लिम समुदाय को हव्वा बनाकर अपना दुश्मन समझ बैठा है.

कुल मिलाकर देश के अंदर एक मानसिक बंटवारा किया जा चुका है.

फ़िलहाल देश सदी की सबसे बड़ी त्रासदी झेल रहा है, और वो त्रासदी है ये है कि अब देश के अंदर अनेकता में एकता वाला स्वभाव ख़त्म हो चुका है.

कल ही कि बात है, संघी मानसिकता के लोग twitter में ट्रेन्ड करा रहे थे.

#HinduDineidEquallity
सच कहुँ तो आँखों पर यक़ीन न हुआ, फिर जाकर गौर से देखा. क्या वाक़ई में ये हमारे देश के नागरिक हैं, जो इस तरह का Twitter ट्रेन्ड करा रहे हैं.

रही बात हामिद अंसारी साहब की, तो उन्होंने तो कुछ भी गलत नहीं कहा.
क्या पिछले तीन साल के अंदर देश का माहौल बद से बदतर नहीं हुआ.

उनसे बयान पर आपत्ति जताने वाले लोगों को क्या ये नहीं दिखता कि इससे पूर्व ऐसे बयान देने कि ज़रूरत क्यों नहीं पड़ी.

असल में हामिद अंसारी के बयान पर उंगली उठाने वाले वो लोग हैं, जिनकी नज़र में भीड़तंत्र के कारनामे सहीह हैं. जो मोब लिंचिंग के खामोश और अप्रत्यक्ष समर्थक हैं.

खुद को राष्ट्रवादी कहने वाले एक न्यूज़ चैनल ने इस मुद्दे पर आग में घी डालने का काम किया है. पिछले कुछ वर्षो में देखा गया है, कि इस चैनल ने देश के अंदर सबसे अधिक दो समुदायों में खाई पैदा करने का कार्य किया है. तो कभी ताल ठोक कर झूट बोलते हैं. तो कभी किसी के DNA को जांचने और परखने का दावा करते हैं.

खैर हामिद अंसारी को इस चैनल और भक्तो के द्वारा पहली बार बदनाम नहीं किया गया है. शायद आपको याद हो, पूर्व में भी एक बार प्रोटोकॉल का पालन करते हुये हामिद अंसारी ने तिरंगे को सलामी नहीं दी थी, तब भी नफ़रत के वाहको ने उन्हें बदनाम करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी.

शायद हामिद अंसारी इस देश के पहले उपराष्ट्रपति होंगे,जिन्हें मीडिया में एक खास विचारधारा के लोगों ने इतना बदनाम किया और वो पद मे रहते हुये इतना टारगेट किये गये.

अब समय आ गया है, कि देश का समझदार वर्ग आगे आये, जो देश के अंदर एकता का समर्थक है. वक़्त का तक़ाज़ा है, कि अनेकता में एकता की पहचान रखने वाले भारत की पहचान को सांप्रदायिकता की दीमक से बचाने के लिये आगे आया जाये और भारतीय समाज को झूठ के इस मकड़जाल से फ़ैलने वाली नफ़रत से बचाया जाये.

 

(लेखक एक सक्रिय ब्लॉगर एवं Tribunehindi.com के संस्थापक हैं)