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सावरकर बच पाए क्योंकि गांधी की हत्या में उनकी भूमिका देर में पता चलीः मृदुला मुखर्जी

‘गुफ्तुगु’ । यह  डेमोक्रेसिया के इंटरव्यूज़ का सिलसिला है। पेश है देश की मशहूर इतिहासकार मृदुला मुखर्जी से डेमोक्रेसिया की एडिटोरियल डायरेक्टर मनीषा भल्ला की खास गुफ्तुगु की पहली क़िस्त …. 

केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद से हिंदुत्व का अजेंडा पूरे देश पर थोपने की कोशिश की जा रही है। एक इतिहासकार के तौर पर देश की राजनीति और समाज पर इसके असर को कैसे देखती हैं?

देखिए भारतीय परंपरा में हम एक मिले-जुले समाज, स्वस्थ लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और मज़बूत प्रशासन की बात करते हैं लेकिन ये सभी तत्व मौजूदा दौर की विचारधारा के दायरे से बाहर हैं। हमें बहुत ही संकीर्ण और दूषित तरीके से सोचने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हमारे समाज पर इसका असर बहुत नकारात्मक होगा।

आज़ादी की लड़ाई से लेकर आज तक हमारी परंपरा बनी हुई है। उससे भी पहले के इतिहास में हम पाते हैं कि एक दूसरे के साथ मिलकर जीने की परंपरा रही है। आज़ादी की लड़ाई ने एक बात सिखाई थी कि अल्पसंख्यक, दबे और पिछड़ों समाज की तरफ एक सहानुभूति होनी चाहिए। हमारी इसी परंपरा पर चोट की जा रही है।

गोडसे को हीरो बनाने की कोशिश की जा रही है?

गोडसे के भाई जब जेल से आए थे तो उनके स्वागत में हिंदू महासभा ने बहुत से कार्यक्रम आयोजित किए थे। मगर अब फर्क इतना आया है कि यह जनता के बीच किया जा रहा है। मीडिया की नज़र में लाया जा रहा है। इस पर गर्व किया जा रहा है। राज्य की ताकत का प्रयोग करके इसे तर्कसंगत बनाया जा रहा है।

हालांकि अभी भी गोडसे को मुख्य धारा की राजनीतिक पार्टी तर्कसंगत नहीं करेगी क्योंकि ये लोग अभी भी गांधी को इस्तेमाल करना चाहते हैं। गोडसे का जुर्म साबित है, इसलिए ऐसा नहीं किया जाएगा।

गांधी जी की हत्या में सावरकर की जो भूमिका थी जिसपर हाल ही में लेख भी छपे हैं. सावरकर की भूमिका के सुबूत गांधी जी की मौत के बाद मिले थे, इसलिए उन्हें उसकी सज़ा नहीं मिल पाई। लेकिन इन लोगों को तो सावरकर का वह पक्ष देखना ही नहीं है।

आज़ादी के आंदोलन में सावरकर का क्या योगदान रहा है जो उन्हें राष्ट्र का हीरो बनाने की कोशिश की जा रही है?

सावरकर ने अपनी जवानी में एक एक्शन किया, उसके लिए वह जेल गए लेकिन अंडमान में जाकर एकदम बदल गए। छह महीने के अंदर उन्होंने माफी मांगना शुरू किया। उसके बाद वह किसी राष्ट्रवादी संगठन का हिस्सा नहीं बने, राष्ट्रवादी आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया, उलटा सांप्रदायिकता फैलाया। वह 1937 में राजनीति में आए तो हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।

हमारे राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम की परंपरा ऐसी थी जिसमें किसी भी सेनानी ने माफी नहीं मांगी। किसी ने ऐसे पैर नहीं पकड़े कि हमें छोड़ दो। लोगों ने वहां बहुत बहुत जुल्म सहे हैं। कई तो वहीं मर गए। कई बचकर भी आ गए लेकिन किसी ने कभी माफी नहीं मांगी। यह स्वतंत्रता संग्राम के सैनिकों की खूबी थी चाहे वो गांधीवादी थे, चाहे वो वामपंथी, चाहे वो भगत सिंह थे चाहे विद्रोही आंदोलनों के अन्य नेता। माफी मांगना उनके धर्म के बिल्कुल ख़िलाफ था। गांधीवादी कहते थे कि हमने यह अपराध किया है हमें इसका दंड दो। हमें जेल में डालो, हम माफी नहीं मांगेंगे।

क्या आप अभी भी मानती हैं कि हिंदू धर्म सहनशीलता वाला धर्म है?

बोला जाता है कि हिंदू धर्म धर्मनिरपेक्ष है और ऐसा इसलिए कहा जाता है कि जो भी हो रहा है वह हिंदुओं ने नहीं किया है। वह सिर्फ हिदुंओं के बचाव वाली बात है। अगर अहिंसा हिंदु धर्म का नियम है तो हिंदुओं को दंगे करने के लिए क्यों प्रोत्साहित किया जाता है। क्यों हमारे पास इतनी सारी मिसाल है।

सावरकर एक शब्द प्रयोग किया करते थे ‘मिल्ट्रिराइज़ हिंदूइज़्म’। वह कहते थे मैं मिल्ट्रिराइज़ हिंदुइज़्म चाहता हूं। वह गांधी को बिना नाम लिए बुरा-भला कहते थे कि इन लोगों ने हिंदुओं को खराब कर दिया है। हिंदुओं को विद्रोही होना चाहिए ताकि वह मुसलमानों के साथ लड़कर अपनी जगह बना सकें।

यह बात सबसे पहले हिंदुत्व विचारधारा में हमें समझाई जाती है। फिर यह बताया जाता है कि हम कमज़ोर क्यों हैं, दबते क्यों हैं, गज़नी से हारे क्यों, हमारी माताओं-बहनों अत्याचार क्यों हुए, उन्हें बुर्के क्यों पहनने पड़े।

अब तो यह भी कहते हैं उन्हीं के आने (मुगलों) से भारत में जाति व्यवस्था और पर्दा प्रथा शुरू हुई। जबकि दोनों प्रथाएं भारत में कई हज़ार सालों से हैं। इसके एतिहासिक रिकॉर्ड मौजूद हैं। अगर मुसलमानों से बचने के लिए हिंदू औरतों को पर्दा करना पड़ता था तो फिर घर के अंदर अपने ससुर और दूसरे लोगों से क्यों पर्दा होता है। वो कौन-सा मुसलमान हैं?

कोई धर्म प्राकृतिक तौर पर विद्रोही या गैर विद्रोही नहीं होता है। इस्लाम शांति वाला धर्म है। ईसाइयों में ईसा ने कहा है कि कोई थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल आगे कर दें, गांधी ने भी ऐसा कहा। हर धर्म कहता है कि गैर विद्रोही रहें, मिलकर रहें। धर्म की शिक्षा में ऐसा कुछ नहीं होता है जो बोला जा रहा है। यह जो राजनीतिक लोग धर्म का इस्तेमाल करते हैं वो इसमें यह सब चीजें लाते हैं।

इस समय वैश्विक मीडिया भी इस्लाम बनाम आतंकवाद की बात कर रहा है। क्या दुनिया का इतिहास इतना पुराना हो गया है कि सिवाय मुसलमानों के किसी ने किसी को नहीं मारा है?

अमेरिका के अंदर जो गोलीबारी होती है, सफेद लोग अश्वेत लोगों को मारते हैं या एक दूसरे को मारते हैं, वो आतंक नहीं है क्या? उत्तर प्रदेश में जो राजपूतों और दलितों की लड़ाई है उसमें मुसलमान कहां हैं बताएं? कौन मुसलमान है, दलित मुसलमान है या राजपूत मुसलमान है, लेकिन घर जल रहे हैं, मौतें हो रही हैं, घर से लोग निकाले जा रहे हैं। कभी मुसलमानों को कहा जाता है कि यह अपने आपको क्या समझते हैं, अकड़ते हैं, अब यह कहा जाता है कि दलित अपने आपको क्या समझते हैं।