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पनगढ़िया का इस्तीफ़ा मोदी सरकार के लिए नई समस्या, कौन होगा नीति आयोग का उपाध्यक्ष

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने इस्तीफ़ा दे दिया है. पनगढ़िया नीति आयोग के उस वक़्त से उपाधयक्ष हैं, जबसे मोदी सरकार ने योजना आयोग को ख़त्म करके नीति आयोग का गठन किया है. नीति आयोग को नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांस्फॉर्मिंग इंडिया (NITI) नाम देते हुए केन्द्रीय कैबिनेट ने 1 जनवरी 2015 को स्थापित किया था.

पनगढ़िया के अनुसार- उन्होंने अपने इस्तीफे की ख़बर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2 माह पूर्व ही दे दी थी. पनगढ़िया अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर रहे हैं, वह एक भारतीय-अमेरिकी अर्थशास्त्री हैं. पूर्व में वह एशियाई विकास बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और कालेज पार्क मैरीलैंड के अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र केन्द्र में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर और सह-निदेशक रह चुके हैं. प्रिंसटोन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पीएचडी हासिल करने वाले पानागढ़िया विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व व्यापार संगठन और व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (एंकटाड) में भी विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं.

पनगढ़िया के अनुसार – उन्हें कोलंबिया विश्वविद्यालय से जो छुट्टियाँ मिली थीं, वो अब ख़त्म हो चुकी हैं.

पनगढ़िया के नेतृत्व में नीति आयोग ने केन्द्र सरकार के लिए नीतियों का निर्माण करने के लिए  3 अहम उद्देश्यों को रखकर कार्य किया था

डिजिटल इंडिया, कोऑपरेटिव फेडरलिज्म, महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में लाना.

अब जब पनगढ़िया ने इस्तीफा दे दिया है, तो मोदी सरकार के लिए ये समस्या है कि वो किसी ऐसे व्यक्ति को लाये जो पनगढ़िया की आर्थिक नीतियों को समझ सके. देखना ये है कि मोदी सरकार किसे पनगढ़िया का उत्तराधिकारी बनाती है.

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