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रोज़गार मुहैया कराने में मनमोहन सरकार से पिछड़ी मोदी सरकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने से पहले देश की जनता से कई वादे किए थे। इन वादों की फेहरिस्त तो बहोत लंबी है। हम बात सिर्फ रोज़गार मुहैय कराने के वादे की कर लेते हैं। जिसके बारे में नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले कहा था कि मनमोहन सिंह की सरकार में बेरोज़गारी दर बढ़ा है। पीएम मोदी ने देश की जनता से वादा किया था कि उनकी सरकार हर साल 2 करोड़ रोज़गार पैदा करेगी। 

लेकिन लेबर ब्यूरो के आंकड़ों की मानें तो मनमोहन सरकार से ज़यादा बेरोज़गारी दर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में बढ़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2015 में 8 प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में सिर्फ 1.55 लाख और 2016 में 2.31 लाख नए रोजगार पैदा हुए थे। जबकि 2009 में मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार के दौरान इन क्षेत्रों में 10.6 लाख नई नौकरियां आई थीं। फिलहाल पिछले एक दशक में नौकरियों की यह सबसे धीमी ग्रोथ है।

मोदी सरकार में आईटी और कंस्ट्रक्शन सेक्टर का बुरा हाल  

देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में इंजीनियरों की छठनी की जा रही है। तकरीबन 56 हज़ार इंजीनियरों की नौकरी खतरे में है। मानव संसाधन क्षेत्र से जुड़ी कंपनी हेड हंटर्स इंडिया के सीएमडी के. लक्ष्मीकांत का कहना है कि अगले तीन साल तक आईटी सेक्टर में हर साल दो लाख इंजीनियरों की छंटनी हो सकती है। 

वहीं, लेबर ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रेल से दिसंबर 2016 के दौरान कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी पिछले साल के मुकाबले 25 हज़ार नौकरियां घटी हैं। 

लेबर ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 61 फीसद लोगों के पास साल भर रोजगार होता है। जबकि 68 फीसदी परिवारों की मासिक आय 10 हजार रुपये से भी कम है। देश में करीब 16 करोड़ लोग अर्ध-बेरोजगारी का शिकार हैं। यह स्थिति काफी चिंताजनक है।

मोदी सरकार में बदले पैमाने

जीडीपी और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का फार्मूला बदल चुकी मोदी सरकार ने 8 प्रमुख क्षेत्रों में नौकरियों के आंकड़े निकालने का तरीका भी बदल दिया है। इन आठ क्षेत्रों में अब अधिक सेवा क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिससे नौकरियों का आंकड़ा कुछ सुधर जाएगा। लेकिन असल जरूरत जमीन स्तर पर हालात सुधारने की है।इन आठ क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, ट्रेड, ट्रांसपोर्ट, होटल्स एंड रेस्त्रां, एजुकेशन और हेल्थ शामिल हैं। 

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