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राफेल विमान सौदाः सीएजी की जांच शुरू, मोदी सरकार पर ज़्यादा कीमत देने का इल्ज़ाम


राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे को लेकर किए गए खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल है । कांग्रेस राफेल डील पर केंद्र की मोदी सरकार को माफ करती नहीं दिख रही है। न्यूज़ पोर्टल ‘जनता का रिपोर्टर’ के मुताबिक सरकार और विपक्ष के बीच सौदे को लेकर घमासान जारी है। केंद्र सरकार इसे गोपनीयता का हवाला देकर सार्वजनिक नहीं कर रही है दूसरी ओर कांग्रेस इसमें घोटाले का आरोप लगा रही है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस सिलसिले में आईं खबरों का हवाला देते हुए मोदी सरकार पर हमला बोला है। इस बीच राफेल डील को लेकर एक नया मोड़ आ गया है। वायुसेना को अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों से लैस करने के लिए फ्रांस के साथ हुए राफेल सौदे की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) जांच करने जा रहा है।

दरअसल, मोदी सरकार पर आरोप है कि राफेल विमानों के लिए यूपीए कार्यकाल में तय कीमत से कहीं ज्यादा दाम चुकाएं हैं और इस सौदे में एक बिजनसमैन को कथित तौर पर फायदा पहुंचाया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कैग के सूत्रों ने कहा कि किसी भी ऐसे सौदे का ऑडिट करना कैग की जिम्मेदारी है, जिसमें देश का काफी पैसा लगा हो। राफेल सौदा भी इसी श्रेणी में शामिल है। इसलिए जल्द ही राफेल सौदे का ऑडिट शुरू किया जाएगा।

इंडियान एक्सप्रेस के मुताबिक राफेल की खरीदारी पर इस डील से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि, ‘राफेल सौदे को सीएजी द्वारा ऑडिट किया जाना है। हमारे लिए यह रूटीन ऑडिट है।’ विश्वसनीय सूत्र ने अखबार को आगे बताया, ‘हमें राफेल डील को ऑडिट करना है, जैसे किसी भी हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन के ऑडिट करने की जरुरत होती है। हालांकि इसे पूरा करने की लिए अभी कोई समय सीमा घोषित नहीं की गई है।’ सूत्रों के मुताबिक इसके अलावा GSTN पर भी सरकारी ऑडिटर की नजर रहेगी।

इसी साल फरवरी में इंडियन एक्सप्रेस ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया कि एनडीए सरकार ने फ्रांस से 36 लड़ाकू विमान खरीदने के सौदे पर बातचीत की थी। बता दें ‘जनता का रिपोर्टर’ ने राफेल विमान सौदे को लेकर दो भागों में बड़ा खुलासा किया था। जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में भुचाल आ गया। कांग्रेस राफेल डील को लेकर मोदी सरकार पर सीधे तौर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है।

वहीं, पिछले दिनों राफेल की कीमत का खुलासा करने से रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण के इनकार कर दिया था। कांग्रेस सांसद राजीव गौड़ा के सवाल के लिखित जवाब में रक्षामंत्री ने एक रॉफेल विमान कितने में खरीदी गई है इसका ब्यौरा नहीं दिया था। सीतारमण ने संसद में कहा था कि अंतर्देशीय सरकारों के बीच हुए करार में गोपनीय सूचना होने के कारण फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू विमान सौदे के ब्यौरे का खुलासा नहीं किया जा सकता।