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राफेल पर मंत्रालय नहीं एयर फोर्स की सुनेंगे, अधिकारी को बुलाएं: चीफ जस्टिस

राफेल सौदे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर आज अहम सुनवाई हो रही है. अदालत राफेल सौदे की कीमत और उसके फायदों की जांच करेगा. केंद्र ने पिछली सुनवाई में 36 राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत और उसके फायदे के बारे में कोर्ट को सीलबंद दो लिफाफों में रिपोर्ट सौंपी थी.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस के कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ इस मामले में अहम सुनवाई कर रही है. जिसमें याचिकाकर्ता भी दलीलें देंगे. याचिकाकर्ताओं ने सौदे की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की है.

अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि हमने राफेल पर दाम की जानकारी साझा कर दी है, लेकिन इसको रिव्यू करना एक्सपर्ट का काम है. इसको न्यायपालिका रिव्यू नहीं कर सकती है.

चीफ जस्टिस बोले- एयरफोर्स के अधिकारी को बुलाएं

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा है कि वह रक्षा मंत्रालय का पक्ष नहीं सुनना चाहते हैं. वह चाहते हैं कि कोई एयरफोर्स का अधिकारी आए और अपनी जरूरतों को बताया है. अटॉर्नी जनरल ने CJI को कहा कि कुछ ही मिनटों में एयरफोर्स का अधिकारी आ रहा है.

जस्टिस जोसेफ ने पूछा कि क्या नए विमान जो आएंगे वह पुराने विमान जैसे ही हैं. जिसपर सरकार ने कहा है कि नए विमानों में काफी कुछ नया होगा. CJI ने पूछा कि नए विमान में क्या होगा, क्या पब्लिक को बताया गया है. तो सरकार ने इससे इनकार किया.

अरुण शौरी ने भी सरकार को घेरा

सुप्रीम कोर्ट में अरुण शौरी ने कहा कि ऑफसेट की बातों को बाद में बदला गया, दसॉल्ट ने रिलायंस को चुना. उन्होंने आरोप लगाया कि दसॉल्ट भी इस समय फाइनेंशियल क्राइसेस से जूझ रहा है, यही कारण है कि उन्होंने सरकार की हर बात मानी और रिलायंस के साथ करार किया. इस डील से दसॉल्ट को भी फायदा हुआ.

अरुण शौरी बोले कि राफेल डील का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना रक्षा मंत्री और रक्षा मंत्रालय की सलाह के किया है.

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