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राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार का यू टर्न, टाइपिंग में गलती हो गई थी

राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अगले ही दिन केंद्र सरकार ने संशोधन से संबंधित एक हलफनामा सौंपा है और उसकी कॉपी सभी याचिकाकर्ताओं को दी है। फैसले के बाद जब केंद्र सरकार पर ये आरोप लगने लगे कि उसने सुप्रीम कोर्ट को गलत जानकारी दी है तो सरकार की तरफ से अगले ही दिन उसमें सुधार के लिए कोर्ट में हलफनामा सौंपा गया। हलफनामे में कहा गया है कि पहले सौंपे गए एफिडेविट में टाइपिंग में गलती हुई थी, जिसकी कोर्ट ने गलत व्याख्या की है।

बता दें कि सरकार ने पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि राफेल लड़ाकू विमान की कीमत निर्धारण और उससे जुड़े अन्य विवरण नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) और लोक लेखा समिति (पीएसी) के साथ साझा किए गए हैं, जिसकी समीक्षा उनके द्वारा की गई है। उसकी रिपोर्ट भी बाद में कोर्ट को सौंपी गई है। आज (शनिवार, 15 दिसंबर) सौंपे गए हलफनामे में सरकार ने कहा है कि उसने केवल रिपोर्ट और रिपोर्ट दर्ज करने की प्रक्रिया का हवाला दिया है।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की खंडपीठ ने शुक्रवार (14 दिसंबर) को फ्रांस से 36 लड़ाकू राफेल लड़ाकू विमान खरीद में किसी तरह की जांच से इनकार करते हुए सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अरबों डॉलर कीमत के इस रक्षा सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई ठोस कारण नहीं नजर आता है। रिलायंस को ऑफसेट पार्टनर बनाने पर भी कोर्ट ने कारोबारी पक्षपात के आरोपों को खारिज कर दिया था

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