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कमलेश तिवारी के कत्ल पर नफरत की सियासत

हिसाम सिद्दीकी

खुद को बहुत बड़ा बल्कि सबसे बड़ा हिन्दुत्ववादी लीडर बताने वाले हिन्दू समाज पार्टी के खुदसाख्ता (स्वयंभू) सदर कमलेश तिवारी का गुजिश्ता दिनों लखनऊ में कत्ल हो गया। प्रदेश पुलिस पर यकीन किया जाए तो उनके कत्ल की वजह 2015 में दिया गया उनका एक बयान है जो उन्होंने पैगम्बर-ए-इस्लाम (स.अ.व.) की तौहीन करने की गरज से दिया था। उत्तर प्रदेश के डीजी पुलिस ओ पी सिंह ने चूंकि खुद यह दावा किया है इस लिए कत्ल की वजह और पुलिस के बयान पर यकीन न करने की वजह नहीं है। अब अगर मुस्तकबिल में कभी कमलेश तिवारी की वालिदा कुसुम तिवारी और मौत से पहले एक वीडियो जारी किए गए खुद कमलेश के बयान सच साबित हो जाएं तो बात अलग है वर्ना डीजी पुलिस के इस बयान पर ही यकीन किया जाना चाहिए कि पैगम्बर-ए-इस्लाम (स.अ.व.) की तौहीन में बयान देने की वजह से से कमलेश को सूरत गुजरात के फरीदउद्दीन पठान और मोईन उद्दीन पठान ने ही कत्ल किया है।

कत्ल की साजिश दुबई और सूरत में रची गई। जिसमें सूरत के ही राशिद अहमद खान, मोहसिन शेख और फैजान शेख शामिल रहे हैं। 2015 में कमलेश के बयान के फौरन बाद बिजनौर जिले के एक मदरसे में पढाने वाले एक बडबोले मौलाना अनवारूल ने एलान किया था कि जो कोई कमलेश तिवारी का सर काट कर लाएगा उसे वह इक्यावन (51) लाख रूपए का इनाम देगा। चार साल बाद गर्दन काट कर ही कमलेश को कत्ल किया गया। कत्ल के फौरन बाद कमलेश की वालिदा ने सीतापुर के एक बीजेपी लीडर शिव कुमार गुप्ता पर इस कत्ल का इल्जाम लगाया था।

वह दो दिनों तक चीख-चीख कर कहती रहीं कि राम जानकी ट्रस्ट मंदिर पर कब्जे के झगडे़ में उनके बेटे को बीजेपी लीडरान ने ही कत्ल कराया है। कमलेश के भतीजे ने भी इसी तरह का इल्जाम लगाया। मरने से पहले खुद कमलेश ने अपना जो वीडियो वायरल किया था उसमें उन्होने कहा था कि बीजेपी, आरएसएस और उत्तर प्रदेश की सरकार उन्हें कत्ल कराने की साजिश कर रही है। इसीलिए अखिलेश सरकार की जानिब से मिली उनकी सत्रह (17) पुलिस वालों की सिक्योरिटी कम करके दो पर कर दी गई।

कमलेश तिवारी हों या कोई और किसी को भी कत्ल करने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती। वक्ती तौर पर गुस्से में कोई कैसी भी बयानबाजी कर दे, हिन्दुस्तान जैसे जम्हूरी मुल्क में किसी को इसलिए कत्ल नही किया जा सकता कि उसने इस्लाम, सनातन धर्म और ईसाई मजहब के मजहबी रहनुमा की तौहीन करने वाला बयान दिया।

कमलेश के घटिया बयान के बाद उनका सर कलम करने वाले को इक्यावन (51) लाख का इनाम देने का एलान करने वाले अनवारूल हक कासमी को भले ही दारूल उलूम देवबंद से मौलाना की सनद हासिल की हो उनके बयान से तो यही लगता है कि उन्हें इस्लाम की मालूमात नहीं है। हमने दर्जनों काबिल उलेमा से इस सिलसिले में बात की है। सभी का ख्याल है कि अल्लाह, रसूल (स.अ.व.) और कुरआन की तौहीन करने वाले किसी भी गैर मुस्लिम या इस्लाम को न मानने वाले शख्स को हम कोई सजा नहीं दे सकते। जो इस्लाम को नहीं मानता, उसमें यकीन नहीं करता उसपर अल्लाह, रसूल (स.अ.व.) और कुरआन की इज्जत करने की पाबंदी नहीं लगाई जा सकती।

क्योंकि अगर उसे इनमें यकीन होता तो वह भी मुसलमान होता। 2015 में कमलेश तिवारी ने जो घटिया बयान दिया था उसकी वजह से वह इस्लाम का मुजरिम नहीं हो गया था। वह देश के कानून का मुजरिम बना था। देश का कानून है कि किसी भी शख्स को किसी दूसरे के मजहब पर बयान देकर मुल्क में नज्म व नस्क (कानून व्यवस्था) खराब करने, बदअम्नी (अशांति) और अलग-अलग मजाहिब के मानने वालों के दरम्यान नफरत फैलाने का हक (अधिकार) नहीं है। ऐसा करने वाला देश के कानून की नजरों में मुजरिम होगा और उसके खिलाफ सरकार सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी।

चूंकि कमलेश तिवारी ने अपने बयान के जरिए मुल्क के कानून की खिलाफवर्जी की थी, इसलिए सरकार और सरकारी मशीनरी को चाहिए था कि उसके खिलाफ इतनी सख्त कार्रवाई करती कि वह चार-छः साल जमानत पाए बगैर जेल में रहता, फास्ट टै्रक कोर्ट में उसके खिलाफ मुकदमा चलवा कर उसे सख्त सजा दिलवाई जाती उस वक्त की अखिलेश सरकार ने उसके खिलाफ बहुत ही कमजोर कानूनी कार्रवाई की, दिखाने के लिए उसे नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत जेल भेजा गया एनएसए की कार्रवाई (प्रक्रिया) में जानबूझ कर गलतियां की गईं जिनका फायदा उठाकर अदालत से उसने एनएसए भी हटवा लिया और जमानत भी हासिल कर ली। इंतेहाई खतरनाक और भड़काने वाली बयानबाजी करने के बावजूद कमलेश तिवारी को अदालत से सिर्फ इसलिए सजा नहीं मिल सकी कि अखिलेश यादव सरकार ने अपनी कानूनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की।

जमानत और एनएसए हटाए जाने के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ सरकार ऊपरी अदालतों तक नहीं गई आखिर क्या वजह थी इतने संगीन मामले को सुप्रीम कोर्ट तक क्यों नहीं ले जाया गया। उल्टे यह कि जमानत मिलते ही अखिलेश यादव सरकार ने उसे सत्रह पुलिस वालों की भारी भरकम सिक्योरिटी देकर उसका हौसला इतना बढा दिया कि हिन्दू समाज पार्टी के सदर की हैसियत से वह भारत को ‘मुस्लिम मुक्त’ बनाने का एलान खुलेआम करने लगा। जज्बाती मुसलमानों की भी बदअक्ली का आलम यह कि कई लोग कमलेश के खून के प्यासे तो हो गए लेकिन ‘अखिलेश भैय्या’ की गुलामी छोड़ने के लिए आज तक तैयार नहीं हैं। क्या कमलेश की हौसला अफजाई करने में अखिलेश यादव की सरकार का तआवुन (सहयोग) सबसे ज्यादा नहीं है?

हजारों करोड़ के घपलेबाज अपने जमाने के सबसे बडे़ बेईमान नोएडा के इंजीनियर यादव सिंह को बचाने के लिए तो अखिलेश सरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुच गई थी फिर अपने बयान से प्रदेश के अम्न व अमान में आग लगवाने वाले कमलेश तिवारी के मामले मे सरकार ऊपरी अदालत में क्यों नहीं गई?

कमलेश तिवारी को हिन्दू समाज का लीडर समझ कर उसके लिए किसी भी हद तक जाने और आम मुसलमानों से इंतकाम लेने का एलान करने वालों से भी एक सख्त सवाल है कि आखिर कमलेश तिवारी क्या थे?

क्या देश के हिन्दू समाज का एक बड़ा हिस्सा ऐसे लोगों को ही अपना लीडर या मजहबी रहनुमा तस्लीम करके उसके पीछे पूरी अकीदत से चल पड़ेगा, जो शख्स सिर्फ फिरकापरस्ती और जहरीली भाषा में सिर्फ मुसलमानों को और उनके मजहब को गालियां देने का काम करे। कमलेश तिवारी ने अपनी अलग हिन्दू समाज पार्टी बनाई जिसका एजेण्डा सिर्फ यह है कि हम भारत को मुस्लिम मुक्त बनाएंगे और दिसम्बर 2021 तक तमाम मुसलमानों को खत्म कर देंगे।

कमलेश तिवारी कहते थे कि दिसम्बर 21 तक या तो मुसलमान वापस हिन्दू बन जाएं या देश छोड़ कर चले जाएं वर्ना हम उन्हें मरवा देंगे। हमारा सवाल उन तमाम हिन्दुओं से है जो आज कमलेश को अपना लीडर तस्लीम कर रहे हैं कि क्या वह भी कमलेश की तरह यही चाहते हैं कि दिसम्बर 21 तक मुल्क ‘मुस्लिम मुक्त भारत’ बन जाए अगर हां तो फिर किसी कमलेश या उपदेश, प्राची और नरसिम्हा नन्द येति की क्या जरूरत है। आप खुद ही मारना शुरू कर दीजिए पन्द्रह-अट्ठारह फीसद ही तो हैं उन्हें मारने मे कितना वक्त लगेगा।

कमलेश के कत्ल के बाद बड़ी तादाद में ड्रामेबाज बयान बहादुर ऐसी जहरीली बयानबाजी कर रहे हैं कि अगर समाज के दोनांं तरफ के जिम्मेदार लोगों ने कोशिशें न कीं होती तो यह जहरीले लोग अब तक पूरे प्रदेश ही नहीं देश में नफरत की आग लगवा चुके होते। नरसिंम्हानंद येति नाम के भगवाधारी ने कमलेश तिवारी की वालिदा को खुद से लिपटा कर एलान किया कि वह अकेले ही पूरी धरती से इस्लाम खत्म करके रहेगे। वह डासना मंदिर का महंत बताया जाता है। उस बुजदिल शख्स की अगर हिम्मत होती तों डासना के नजदीक दिल्ली जाकर पार्लियामेंट के सामने खड़े होकर इस तरह की जहरीली बयानबाजी करता, कमलेश की वालिदा के साथ खड़े होकर ड्रामा क्यों किया? एक रेडियो जॉकी (आरजे) रौनक है वह इतना पागल हो रहा था कि एक बयान में गाय को पैगम्बर-ए-इस्लाम (स.अ.व.) के बराबर बता रहा था।

कोई उपदेश राणा, आर्यवीर दल का कनवीनर बताया जाने वाला अशोक तिवारी और इण्टरनेशनल शूटर रह चुकी वर्तिका सिंह समेत दर्जनों लोगों के इंतेहाई भड़कीले और जहरीले वीडियो वायरल हो रहे है। वर्तिका सिंह खातून हैं इसके बावजूद वह अपने वीडियो में मुसलमानों को कटुवा और कटुए जैसे अल्फाज का इस्तेमाल करने में कोई शर्म महसूस नहीं कर रही थी। सबसे ज्यादा अफसोसनाक बल्कि शर्मनाक बात यह है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने वार्निंग तो जाहिर कर दी थी लेकिन वायरल हो रहे इस किस्म के वीडियोज सोशल मीडिया पर डालने वाले किसी एक शख्स के खिलाफ भी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। यह सब वही बेशर्म बयान बहादुर हैं जो आज तक मुल्क भर में छोटी बच्चियों और ख्वातीन के साथ हो रहे रेप के वाक्यात पर एक लफ्ज भी नहीं बोले हैं।

आखिर में वजीर-ए-आला योगी आदित्यनाथ से भी एक सवाल कि उन्होने कमलेश तिवारी के बच्चों को पन्द्रह लाख की माली मदद दी है, लखनऊ में मकान देने का वादा किया। अच्छा है किसी के भी बेसहारा बच्चों की मदद सरकार को करनी चाहिए लेकिन क्या इसीतरह प्रदेश में होने वाले कत्ल के हर वाक्ए के बाद मकतूल के घर वालों को भी इसी तरह की मदद दी जाएगी?

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