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बल्लभगढ़ में 60 सालों में पहली दफा नहीं मनी ईद, जुनैद को लेकर इंसाफ की मांग कर रहे गांववासी - democracia
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बल्लभगढ़ में 60 सालों में पहली दफा नहीं मनी ईद, जुनैद को लेकर इंसाफ की मांग कर रहे गांववासी

मथुरा जा रही ट्रेन में भीड़ द्वारा बीफ की अफवाह के बीच मारे गए बल्लभगढ़ के 17 वर्षीय जुनैद के गांव खंडावली में लोगों ने काली पट्टी बांधकर ईद मनाई। ईद के त्यौहार से तीन दिन पहले उग्र भीड़ ने जुनैद की हत्या कर उसके परिवार की खुशियां छीन ली थी। जुनैद के परिवार के लोग, दोस्त व अन्य ग्रामीण ईद की नमाज अदा करने के दौरान हाथों में काली पट्टी बांधे हुए नजर आए। मीडिया के मुताबिक जुनैद के पिता ने कहा कि हम ईद के दिन नमाज अदा तो कर रहे हैं लेकिन हम यह त्यौहार नहीं मनाएंगे। हम चाहते हैं कि जिन्होंने भी मेरे बेटे की हत्या की है उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

ट्रेन में आरोपियों ने जुनैद के भाई शाकिर को भी घायल कर दिया था। शाकिर से जब इस घटना के बारे में पूछा गया तो वह कुछ भी बता नहीं पाया क्योंकि उसकी आंखू से आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। इस घटना को याद कर उसकी रुंह कांप गई थी। मस्जिद में नमाज के लिए आए अन्य ग्रामीणों द्वारा प्रोत्साहित किए जाने पर शाकिर ने घटना के बारे में बताने का साहस जुटाया। शाकिर ने कहा कि परिवार के साथ खुशी-खुशी ईद मनाने के लिए दिल्ली से ईद की ढेर सारी खरीददारी करके दिल्ली-मथुरा एक्सप्रेस ट्रेन से वह जुनैद और अन्य दो लोगों के साथ घर आ रहा था। कुछ लोग ओखला स्टेशन से ट्रेन में सवार हुए। वे लोग काफी तगड़े थे।

शाकिर ने कहा कि उन्होंने हमारे कपड़ों और सिर पर रखी टोपी को देखकर पहचान लिया कि हम मुसलमान हैं और वे हमपर समप्रदायिक टिप्पणियां करने लगे। जब हमने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने हमारी टोपी उतारकर उसे अपने पैरों से रोंद दिया और मेरी दाढ़ी खींचने लगे। ट्रेन में मौजूद लोग भी हिंदू-मुस्लिम किए जाने पर उनके साथ हो गए और किसी ने भी आगे आकर बीच-बचाव नहीं किया। वे हमपर बार-बार आरोप लगा रहे थे कि हम अपने साथ बीफ ले जा रहे हैं और हम गोमांस खाते हैं। आरोपी हमें पाकिस्तानी बुला रहे थे। वे हमसे कह रहे थे कि तुम्हारी जगह यहां नहीं पाकिस्तान में है।

इसी बीच आरोपियों ने चाकू निकाल लिए और हमपर हमला कर दिया। उन लोगों ने सबसे ज्यादा वार जुनैद पर किए थे। हमपर हमला करने के बाद उन्होंने हमें असौती स्टेशन पर फेंक दिया। जुनैद के पिता ने बताया कि जैसा कि बताया जा रहा है कि सीट को लेकर झगड़ा हुआ था जबकि ऐसा कुछ नहीं है। जुनैद ने अपनी सीट एक बुजुर्ग को दी थी। मेरे बेटे पर हमला उसके धर्म की पहचान के बाद किया गया। जब जुनैद के पिता से पूछा गया कि क्या हरियाणा सरकार ने इस हादसे के बाद संपर्क किया है तो उन्होंने कहा कि किसी ने भी हमसे संपर्क नहीं किया। हम बस चाहते हैं कि मेरे बेटे को इंसाफ मिले और आरोपियों को सजा।