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फेसबुक के बचाव में मोदी हुकूमत

हिसाम सिद्दीकी

अमरीका के मशहूर अखबार दि वाल स्ट्रीट जनरल में शाया हुई एक खबर की बुनियाद पर कांग्रेस लीडर राहुल गांधी और साबिक वजीर व तीसरी बार जीत कर लोक सभा पहुंचे शशि थरूर समेत कांग्रेस के दीगर कई लीडरान ने सोशल मीडिया साइट ‘फेसबुक’ के खिलाफ आवाज उठाई तो मरकजी टेलीकम्युनिकेशन व कानून वजीर रवि शंकर प्रसाद और वजीर पार्लियामानी उमूर प्रहलाद जोशी समेत बीजेपी के दर्जनों मेम्बरान पार्लियामेंट फेसबुक के हक में बाकायदा जंग छेड़ते हुए मैदान में आ गए।

इंफार्मेशन टेक्नालोजी वजारत की पार्लियामेंट्री कमेटी के चेयरमैन शशि थरूर ने पूछगछ के लिये दो सितम्बर को फेसबुक को तलब किया तो बीजेपी बिलबिला उठी, पार्टी के दो मेम्बरान पार्लियामेंट निशिकान्त दुबे और राज्यबर्द्धन सिंह राठौर ने फौरन ही स्पीकर को खत लिख कर शशि थरूर को चेयरमैन के ओहदे से बर्खास्त करने के लिए कहा। पार्लियामानी मामलात के वजीर प्रहलाद जोशी पहले ही शशि थरूर के खिलाफ मैदान में आ चुके थे। किसी की समझ में यह नहीं आ रहा है कि आखिर एक विदेशी (अमरीकी) वेबसाइट के लिए मोदी सरकार के वजीर क्यों मैदान में कूद पड़े। रविशंकर प्रसाद, प्रहलाद जोशी और उनकी पार्टी के जितने भी मेम्बरान पार्लियामेंट फेसबुक की लड़ाई लड़ने मैदान में उतरे उन लोगां ने राहुल के जरिए उठाए गए मुद्दों पर बात करने की बनिस्बत राहुल गांधी पर जाती हमले ज्यादा किए हैं। अब देश जानना चाहता है कि आखिर फेसबुक के साथ बीजेपी, आरएसएस और मोदी सरकार का क्या रिश्ता है और एक विदेशी कम्पनी के साथ इनका यह रिश्ता क्या कहलाता है।

वाल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने इल्जाम लगाया था कि आरएसएस और बीजेपी ने भारत में नफरत फैलाने की जो मुहिम छेड़ रखी है उस मुहिम को आगे बढाने और नफरत फैलाने में फेसबुक और व्हाट्सएप दोनो ही आरएसएस व बीजेपी के इशारों पर काम करते हैं। मरकजी वजीर रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक की जानिब से मोर्चा संभालते और राहुल गांद्दी पर जाती हमला करते हुए कहा कि जो अपनी पार्टी के लोगों तक को मुतास्सिर (प्रभावित) नहीं कर सकते वह बीजेपी और आरएसएस पर पूरी दुनिया को कण्ट्रोल करने का इल्जाम लगा रहे हैं। इंफार्मेशन टेक्नोलाजी पर पार्लियामेंट की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन शशि थरूर ने कहा कि वह फेसबुक के जिम्मेदारान को बुलाकर पूरा मामला जानना चाहेंगे तो फौरन ही पार्लियामानी मामलात के वजीर प्रहलाद जोशी ने मैदान में कूद कर कहा कि कमेटी मेम्बरान की मंजूरी के बगैर चेयरमैन को किसी को तलब करने का अख्तियार ही नहीं है। कांग्रेस ने यह भी मतालबा किया कि भारत में एलक्शन के दौरान फेसबुक और व्हाट्सएप ने एक पार्टी यानी बीजेपी को फायदा पहुचाने के लिए जो कुछ किया उसकी जांच के लिए ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी बननी चाहिए।

राहुल गांधी ने इल्जाम लगाते हुए कहा कि फेसबुक और व्हाट्सएप भारत में भारतीय जनता पार्टी के लीडरान की जहरीली तकरीरों को हटाने के बजाए करोड़ों लोगों तक नफरत का जहर पहुचाने का काम तो करते ही हैं एलक्शन में भी बीजेपी की हिमायत वाली पोस्ट्स को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुचाते हैं यह बात वाल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट से साबित होती है। उद्दर फेसबुक ने इन इल्जामात का जवाब  देते हुए सफाई दी और कहा कि हम हिंसा को फरोग देने वाली तकरीरों और मवाद (सामग्री) पर रोक लगाते हैं हमारी यह पालीसी पूरी दुनिया के लिए एक बराबर है। हम किसी की भी सियासत और नजरियात (विचार द्दारा) पर ध्यान नहीं देते है। अगर इसके बावजूद कुछ और इस्लाह (सुद्दार) की जरूरत होगी तो हम उसके लिए भी तैयार हैं।

इस दरम्यान फेसबुक की पब्लिक पालीसी डायरेक्टर अखीदास ने दिल्ली के चितरंजन पार्क थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिली हैं। उन्हें यह धमकियां किसी ने उनसे मिल कर, फोन पर दी या सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने इसका कोई जिक्र नहीं किया। इसके बावजूद उनकी शिकायत पर फौरन रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। एक सीनियर पुलिस अफसर ने रिपोर्ट दर्ज होने की तस्दीक करते हुए कहा कि मजीद तहकीकात के लिए यह मामला साइबर प्रीवेंशन एवर्नेस यूनिट को सौंप दिया गया है।

अंखीदास की शिकायत है कि चौदह अगस्त को वाल स्ट्रीट जनरल में शाया खबर के बाद ही उन्हें द्दमकियां मिली हैं। अखीदास के लिए कांग्र्रेस तर्जुमान अजय माकन का कहना है कि कुछ लोगों ने फेसबुक पर नफरत फैलाने वाली पोस्ट्स की शिनाख्त की थी। जब वह पोस्ट हटाने की बात आई तो अंखीदास ने पोस्ट हटाने की मुखालिफत की। इतना ही नहीं अंखीदास व शिवनाथ ठकराल ने हिरेन जोशी और बीजेपी के साथ मिलकर वजीर-ए-आजम मोदी की मुहिम (अभियान) भी लांच किया। अंखीदास के लिए कहा जाता है कि वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में शामिल रह कर आरएसएस के एजेण्डे पर काम भी कर चुकी हैं। अब तो कुछ लोग यहां तक कहने लगे हैं कि अपने अमरीका दौरे के दौरान वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने फेसबुक के हेडक्वार्टर पर जाकर इसी मकसद से फेसबुक चीफ मार्क जुकरबर्ग से मुलाकात की थी कि अंखीदास जैसे RSS एजेण्डे को आगे बढाने वाले लोगों को फेसबुक में अहम ओहदों पर फायज कराया जा सके।

फेसबुक पर कांग्रेस के इल्जाम के फौरन बाद बीजेपी मीडिया सेल ने भी इल्जाम लगा दिया कि उसके जरिए पोस्ट की जाने वाली ‘राष्ट्रवादी’ आवाजों को सेंसर किया जा रहा है। मीडिया सेल के चीफ अमित मालविया ने कहा कि 2019 के लोक सभा एलक्शन से पहले फेसबुक ने दाएं बाजू (दक्षिण पंथी) सात सौ से भी ज्यादा पेज हटा दिए थे। सवाल यह है अगर बीजेपी को भी फेसबुक से इतनी शिकायतें हैं तो कांग्रेस के सवाल उठाते ही पूरी बीजेपी और मोदी सरकार के रविशंकर प्रसाद जैसे वजीर फेसबुक के बचाव में मैदान में क्यो आ गए? इससे तो यही जाहिर होता है कि मामला फेसबुक के साथ मिलीभगत का है।

दि वाल स्ट्रीट जनरल ने अपनी रिपोट में लिखा कि तेलंगाना असम्बली में हैदराबाद से बीजेपी मेम्बर की फिरकापरस्ती को फैलाने वाली नफरत भरी जहरीली पोस्ट को हटाने के सवाल पर फेसबुक के ही एक सीनियर एक्जीक्यूटिव ने मुखालिफत की थी जाहिर है रिपोर्ट का इशारा अंखीदास की जानिब ही है। उद्दर हैदराबाद के बीजेपी मेम्बर असम्बली ने कहा कि वह तो फेसबुक पर हैं ही नहीं किसी दूसरे ने उनके नाम का इस्तेमाल करके पोस्ट डाली होगी।

कांग्रेस की तर्जुमान सुप्रिया श्रीनेत्र ने कहा कि दूसरे तमाम मुल्कों में काबिले एतराज पोस्ट से मुताल्लिक फेसबुक पेज हटाए जाते हैं फिर भारत में ऐसा क्यों नहीं किया जाता है। हमारे मुल्क में तो फेसबुक के जरिए सिर्फ नफरत ही नहीं फैलाई जाती यहां तो ख्वातीन (महिलाओं) तक पर इंतेहाई गंदे और घटिया तैहीन आमेज पोस्ट फेसबुक पर डाले जाते दिखते हैं। एक खास तबके (मुसलमानों) दलितों और कमजोर तबकों पर हमले करने वाली पोस्ट्स रोजाना दिखती हैं इन्हें हटाने की बात आती है तो हमारी सरकार मजबूर दिखने लगती है।

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