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मोदी साहब एक मां धक्के खा रही है, बहुत बीमार है, आखिर कब तक ?

दिल्ली हाई कोर्ट ने नजीब अहमद की गुमशुदगी के मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है। आज नजीब अहमद गायब हुए 300 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। वह बीते साल 15 अक्टूबर से लापता हैं। इसपर नजीब की मां फातिमा नफीस ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे लोग अदालत से कुछ और मांग रहे थे।

उनका कहना है कि हमारी मांग थी कि मामले की न्यायायिक जांच करवाई जाए, जो कि अदालत की निगरानी में हो। जो बिना किसी दबाव के काम कर लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब जो भी हुआ है ठीक है। हमें न्याय पर भरोसा है। बस सीबीआई अच्छे से जांच करे। कुछ भी हो मुझे मेरा बेटा चाहिए।

फातिमा नफीस का कहना है कि अगर पहले एसआईटी और फिर क्राइम ब्रांच ने सही से जांच की होती तो ये नौबत ही नहीं आती। फातिमा नफीस बीच-बीच में अपने बेटे नजीब के लिए बार-बार दुआ करती जा रही हैं। वह कहती हैं कि मेरा मन कहता है कि मेरा बेटा जहां कभीं भी है सुरक्षित है। सीबीआई को केस मिलने से मुझे कुछ उम्मीद तो जगी है कि वे लोग मेरे बेटे को ढूंढकर लाएंगे ही। उनका कहना है कि पुलिस का दावा है कि हमें नजीब के बारे में जानकारी है लेकिन अगर हमारे पास नजीब के बारे में किसी भी प्रकार की कोई जानकारी होती तो क्या मैं इस तरह दर-दर भटक रही होती। धूप में, सर्दी में सड़कों पर होती? मेरा तो रोम-रोम हमेशा दुआ करता रहता है कि मेरा बच्चा सही सलामत हो।

गुरुवार को जेएनयू के साथियों के साथ फातिमा नफीस सीबीआई प्रमुख से मिलने जा रही हैं। हालांकि अभी वक्त तय नहीं हुआ है। वह बताती हैं कि सीबीआई से यही मांग करेंगी कि जल्दी से जल्दी नजीब को ढूंढ कर लाया जाए। फातिमा नफीस का कहना है कि वह चाहती हैं कि  गुनहगारों से सवाल किए जाएं। वह कहती हैं कि मैं यही उम्मीद करती हूं कि सीबीआई को दो महीने का वक्त मिला है। वो मेरे और मेरे बच्चे के हक में जानकारी लेकर आएंगे। हो सकता है वो मेरे बच्चे को ले ही आएं।

वह बताती हैं कि वह राजनाथ सिंह से मिली थी। उन्होंने कहा था कि हमने एसआईटी बनाई है। वो काम कर रही है लेकिन एसआईटी तो फ़ेल हो गई यहां तक कि क्राइम ब्रांच भी फ़ेल हो गई। फातिमा नफीस का कहना है कि  जो चीज़ें सरकार के अधीन हैं, अगर वो फ़ेल हो रही हैं तो कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ी है। उनका कहना है कि अगर सरकार चाह ले तो हर सूरत में नजीब सामने आ सकता है। वह बताती हैं कि उन्होंने किसी से कोई मदद नहीं ली है। बंदायू के सांसद धर्मेंद यादव ने दिल्ली आकर प्रदर्शन किया। डीयू के बच्चे, अलीगढ़ के बच्चे, जेएनयू के बच्चे यही मेरे अपने हैं। मदद तो हुकूमत से चाहिए थी जिसने आज तक वक्त नहीं दिया मिलने का। सुषमा स्वराज को मैंने हज़ारों ट्वीट किए। वो विदेशों से लोगों को छुड़ाती हैं लेकिन घर में क्या हो रहा है नहीं जानना चाहती। अपने देश में क्या हो रहा है, वो ये नहीं देख रही हैं। कितनी बार मैंने उनसे मिलने की कोशिश की। कितनी बार ट्वीट कराया अपने बच्चों से। मोदी जी से मिलने की कोशिश की।

मैंने योगी जी से मिलने के लिए नौ अप्रैल को मेल कराया। मेरी बात का जवाब कोई क्यों नहीं देना चाहता। नजीब के मामले में सब चुप क्यों हो जाते हैं? नजीब एक हिंदुस्तानी है। देश की नंबर एक यूनिवर्सिटी से उसका ताल्लुक है। वो यहां का छात्र है। क्या इनकी ज़िम्मेदारी नहीं है?

फातिमा नफीस का कहना है कि यहां विदेशों से लोग पढ़ने आते हैं। क्या ये हमारे देश की बदनामी नहीं है? एक मां को नहीं समझें। कम से कम अपने मुल्क के बारे में ही सोच लें। मेरा परिवार बिखर गया है। मैं कभी दिल्ली होती हूं, कभी बदायूं होती हूं। पिछले तीन महीने से धक्के खा रही हूं। बीमार हूं। शुगर की मरीज हूं। हाई ब्लड प्रेशर है। हर सुनवाई पर मुझे दिल्ली आना होता है। वह कहती हैं कि मेरा यहां रहने का कोई ठिकाना नहीं है। कोर्ट ने आदेश दिया था कि इन्हें रहने की जगह दी जाए। दिल्ली सरकार वो भी नहीं कर सकी। रिश्तेदारों के यहां इधर-उधर भटकती हूं। वह कहती हैं कि मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि मैं एक फ़्लैट ख़रीदकर उसमें रह सकूं।  मामला सीबीआई के पास गया तो पता नहीं अब कितने चक्कर लगाने होंगे।