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UPA सरकार के मुकाबले मोदी सरकार ने 2000 करोड़ महँगे खरीदे राफेल

राफेल विमान सौदे को लेकर मोदी सरकार के दावों पर एक बार फिर अंग्रेजी अखबार द हिन्दू की रिपोर्ट ने सवाल खड़े कर दिए हैं. अखबार ने आधिकारिक दस्तावेजों के हवाले से बताया है कि फ़्रांसीसी  आपूर्तिकर्ता द्वारा बैंक गारंटी नहीं देने की वजह से मोदी सरकार के कार्यकाल में हुआ राफेल सौदा यूपीए की तुलना में लगभग 2000 करोड़ रुपए महंगा पड़ा.

अखबार के मुताबिक़, सात सदस्यीय खरीद दल ने रक्षा मंत्रालय को 21 जुलाई, 2016 को अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश की थी. इस रिपोर्ट में खरीद दल ने बैंक गारंटी की रकम 4580 करोड़ रुपए बताई थी. फ्रांस सरकार द्वारा इस रकम को नहीं देने के चलते मोदी सरकार के कार्यकाल में 23 सितंबर, 2016 को हुए 36 राफेल विमानों की कीमत लगभग 62,700 करोड़ बनी जो यूपीए के समय तय कीमत से  2000 करोड़ रुपए ज्यादा थी.

इस रिपोर्ट से पता चलता है कि राफेल सौदे के लिए बने भारतीय सौदेबाजी दल ने फ्रांस सरकार पर लगातार बैंक गारंटी देने का दबाव बनाया. इस संबंध में विधि और न्याय मंत्रालय ने 25 दिसंबर, 2015 को लिखित रूप से यह बात कही कि भारत को सौदे के लिए फ्रांस से संप्रभु गारंटी लेनी चाहिए. हालांकि फ्रांस सरकार लगातार यह गारंटी देने से मना करती रही. बावजूद इसके भारतीय सौदेबाजी दल ने राफेल सौदे के मूल मसौदे में बैंक गारंटी के प्रावधान को शामिल करने का हर संभव प्रयास किया.

हालांकि भारतीय खरीद दल की अंतिम रिपोर्ट में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में तय हुए राफेल सौदे की कीमत की मूल मसौदे की कीमत से तुलना करते समय बैंक गारंटी की रकम को शामिल क्यों नहीं किया गया. लगभग इसी विसंगति का जिक्र संसद में 13 फरवरी, 2019 को रखी गई कैग रिपोर्ट में भी किया गया है.

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