Generic selectors
Exact matches only
Search in title
Search in content
Search in posts
Search in pages
Filter by Categories
home
margin
slider
top three
top-four
travel
Uncategorized
viral
young india
कल्चर
दुनिया
देश
लीक से हटकर
विशेष
वीडियो
सटीक
सियासत
हाशिया
हेल्थ

मुल्क़ के नौजवानों का इशारा समझें मोदी

हिसाम सिद्दीक़ी 

किसी भी प्रदेश असेंबली और लोकसभा इलेक्शन से पहले अक्सर कई सर्वे एजेंसियों और मीडिया घराने यह सर्वे कराते हैं कि आने वाले इलेक्शन में आम लोगों का रूझान किस पार्टी की तरफ रहेगा । इस किस्म के सर्वे करने वाली कम्पनियों और मीडिया घरानों का खास फोकस मुल्क के नौजवानों पर रहता है। हर इलेक्शन का सर्वे सैंपल दस हजार से पचास हजार लोगों तक रहता है।मतलब यह कि दस से पचास हजार लोगों खुसूसन नौजवानों की राय मालूम करके ही सर्वे कंपनियां और मीडिया घराने मुल्क का बताते हैं कि आने वाले इलेक्शन के नतायज क्या होने वाले हैं।

2015 में जब आरएसएस और बीजेपी की बच्चा तंजीम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के उम्मीदवारों ने दिल्ली युनिवर्सिटी तलबा यूनियन की चारों सीटें जीत ली थीं तो उस वक्त बीजेपी सदर अमित शाह ने कहा था कि यह जीत उनके नजरियात (विचार धारा) की जीत है। उन्होने यह भी कहा था कि दिल्ली

यूनिवर्सिटी के नौजवान तलबा ने अपने वोट के जरिए बता दिया है कि मुल्क में बीजेपी और वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी की लहर चल रही है। अगर अमित शाह और यूनिवर्सिटियों में पढने वाले नौजवान तलबा की राय ही मुल्क की नब्ज का अंदाजा लगाने का मुनासिब जरिया है तो अमितशाह और नरेन्द्र मोदी दोनो को अब यह भी तस्लीम कर लेना चाहिए कि मुल्क का माहौल अब उनके खिलाफ है।

यही सूरते हाल 2019 के लोकसभा इलेक्शन तक बरकरार रही तो मोदी का यह पहला और आखिरी दौर है। क्योंकि 2014 में देशने उनकी जिन बातों पर भरोसा करके उन्हें वोट दिया था उन वादों और बातों में से एक भी वादा पूरा नहीं हुआ है इसलिए आइंदा लोग उनके झांसे में फंसने वाले नहीं हैं। पहली बार मुल्क का वजीर-ए-आजम बनने और भारतीय जनता पार्टी पर मुकम्मल तौर से कब्जा करने के बाद पार्टी के पुराने, सीनियर, बुजुर्ग,तजुर्बेकार और वफादार लोगों के साथ उनका जो डिक्टेटराना रवैय्या है उसकी वजह से पार्टी के तीन-चैथाई लोग खुद ही उनके खिलाफ खडे़ हो जाएंगे।

ऐसा नहीं है कि अभी पार्टी के सभी लीडरान, ओहदेदार और उनकी वजारत में शामिल सभी लोग उनसे खुश हैं। नाखुश तो लोग अभी भी हैं लेकिन अभी वह कुछ बोल या कर नहीं सकते बस बेइज्जती का घूंट पीकर काम करते जा रहे हैं। सभी मौके की तलाश में हैं।

हम बात कर रहे थे मुल्क के नौजवानों में मोदी सरकार और उनकी पार्टी के लिए मुखालिफत बल्कि नफरत के माहौल की अगर किसी इलाके या प्रदेश के दस-पंद्रह से पचास हजार तक को सैंपल सर्वे की बुनियाद बना कर मुल्क़ में चल रही सियासी हवाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है तो अब तो कई लाख नौजवानों ने अपनी-अपनी यूनिवर्सिटियों की यूनियन के इलेक्शन के जरिए राय दे दी है कि मोदी और उनकी सरकार से वह अब मुत्मइन नहीं हैं उनकी जगह किसी ऐसे शख्स को वह वजीर-ए-आजम की हैसियत में देखना चाहते हैं जो लफ्फाजी करने के बजाए कुछ करके दिखाए।

सिर्फ दिल्ली यूनिवर्सिटी और जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में तालीम हासिल करने वाले नौजवानों ने ही मोदी और बीजेपी में अदम ए तमाद (अविश्वास) जाहिर नहीं किया है पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, बंगाल,हैदराबाद, असम, केरल, तमिलनाडु समेत मुल्क भर की यूनिवर्सिटियों के तलबा ने एक जैसी राय ही जाहिर की है।पंजाब की यूनिवर्सिटीज में भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल मिल कर यूनियन का इलेक्शन लड़े और उन दोंनों को शर्मनाक शिकस्त का सामना करना पड़ा।

असम में तो कांग्रेस की15 साल की सरकार को उखाड़ कर बीजेपी ने सत्ता पर कब्जा किया इसके बावजूद दो-तीन सालों में ही असमी नौजवानों की दिलचस्पी बीजेपी से खत्म हो गई । हैदराबाद में आंध्रा की तेलगू देसम पार्टी और तेलंगाना की टीआरएस दोनों सरकारें सरगर्म हैं। दोनों ही नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के साथ हैं दोनों सरकारों की तमाम तरह मदर्दियां और मददके बावजूद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पैर हैदराबाद यूनिवर्सिटीसे उखड़ गए।

तलबा यूनियन पर कब्जा करने की गरज से आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी ने गुजिश्ता तीन सालों में जेएनयू में बड़ी तादाद में अपने तलबा के दाखिले कराए हैं इसके बावजूद आरएसएस परिवार इलेक्शन पर असर नहीं डाल सका।

मतलब साफ है कि मुल्क की चारों सिम्तों(दिशाओं) की यूनिवर्सिटियों के जरिए नौजवानों ने नरेन्द्र मोदी को वार्निग दे दी है कि ‘सिंहासन खाली करो कि तुम वादे के पक्के नहीं हो’। अब मुल्क सिर्फ नारेबाजी में फंसने वाला नहीं है। सभी जानते हैं कि 2014 में मुल्क के नौजवानो पर नरेंद्र मोदी का जादू सर चढकर बोल रहा था।

हर साल दो करोड़ रोजगार देने और मुल्कसे बेईमानी खत्म करने जैसे उनके नारे नौजवानों केा बहुत अच्छे लगे थे इसी लिए नौजवानों का नब्बे फीसद से ज्यादा वोट मोदी को मिल गया था। यह भी सही है कि मोदी का यह जादू उत्तर और पच्छिम भारत के नौजवानों पर ही था। इसी लिए उत्तरप्रदेश की अस्सी में से तिहत्तर, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली,गुजरात की सभी लोकसभा सीटें मोदी ने जीत ली थीं। महाराष्ट्र में भी शिवसेना के साथ मिलकर तो कर्नाटक और बिहार में अकेले ही बीजेपी ने कुछ के अलावा सभी सीटें जीत ली थीं।

नौजवानों को बड़ी उम्मीदें थीं कि उन्हें रोजगार मिलेगा, उन्हें व्यापार करने के ज्यादा और बेहतर मौके मिलेंगे लेकिन मिला क्या खाक मोदी की सरकार आने के बाद आरएसएस परिवार और मोदी सरकार ने पूरे मुल्क को गौरक्षा, राष्ट्रवाद,मुसलमानों में तीन तलाक, रवादारी और अदम रवादी (सहिष्णुता औरअसहिष्णुता), गंगाजमुना की सफाई, घरवापसी, लव जेहाद,एण्टी रोमियो मुहिम,भारत माता की जय और वंदे मात्रम जैसे नारों में उलझा दिया।

अब अगला इलेक्शन जीतने के लिए मोदी और आरएसएस के पास तीन मुद्दे बचे हैं एक अयोध्या में शानदार राम मंदिर की तामीर दूसरा यूनिफार्म सिविल कोड और तीसरा जम्मू-कश्मीर को खुसूसी दर्जा देने वाली संविधान की दफा-370। उम्मीद हैकि 2018 में सुप्रीमकोर्ट से मंदिर के हकमें फैसला आ जाएगातो मोदी और आरएसएस बहुत ही जारेहाना (आक्रामक) तरीके से उसका क्रेडिट लेने की कोशिश करेंगे। देश के हिन्दुओं को यह बताने की कोशिश की जाएगी कि मोदी ने सुप्रीम कोर्ट से यह फैसला कराया है लेकिन क्या खाली पेट बैठे करोड़ों बेरोजगार नौजवान अब इस किस्म के जज्बाती नारों में फंसेंगे?

मुल्क के नौजवानों को वादे के मुताबिक नरेंद्र मोदी रोजगार तो फराहम नहीं करा सके उल्टे नोटबंदी के जरिए उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। मुल्क के हर कोने में तकरीबन गुजिश्ता पंद्रह –सोलह सालों से प्रापर्टी का एक ऐसा काम था जिसमें बेशुमार नौजवान न सिर्फ मसरूफ थे बल्कि अच्छी कमाई कर रहे थे। नोटबंदी के बाद प्रापर्टी का काम तकरीबन बंद हो गया है। शहरों और देहातों में जो भी घरेलू और छोटी सनअतें  (उद्योग) थे सब बंद पडे़ हैं। नौजवानों की कमाई के सारे रास्ते तो बंद कर दिए गए ऊपर से महंगाई की मार सितम्बर के पहले हफ्ते में महंगाई अपने शबाब पर पहुंच गई। जीडीपी पहले से ही गिर रही थी।

मोदी हुकूमत ने पेट्रोल के जरिए मुल्क में जो लूट मचाई उसने तो बडे़ बड़ों की कमर तोड़ दी उत्तर प्रदेश में पेट्रोल की कीमत 75रूपए लीटर से ऊपरतो महाराष्ट्र के कई शहरों में अस्सी रूपए लीटर से ऊपर हो गई। नौजवानों और आम लोगों की परेशानियों पर ध्यान देने के बजाए नरेन्द्र मोदी डेढ लाख करोड़ की लागत से बुलेट ट्रेन चलाने का सपना देख रहे हैं। पूरा आरएसएस चीन में बने सामान के बायकाट का नारा लगाता फिर रहा है और नरेन्द्र मोदी उसी चीन से 3600 करोड़ में वल्लभ भाई  पटेल का मुजस्सिमा (बुत) बनवा रहे हैं। ऐसे हुक्मरां को ही अक्ल के अंधे कहा जाता है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और उर्दू साप्ताहिक जदीद मकरज़ के संपादक हैं।)