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मोदी ने गिरने के रिकार्ड तोड़े

हिसाम सिद्दीकी

लखनऊ: लोक सभा एलक्शन में हर तरफ अपनी शिकस्त देखकर बेचैन हुए वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने इंसानियत, एखलाकियात (नैतिकता) भारतीयता और सनातन हिन्दू धर्म के तमाम उसूलों को कुचलते हुए राजीव गांधी पर जो कमेण्ट किया उसे सुनकर लगा कि गुजरात असम्बली एलक्शन के वक्त कांग्रेस लीडर मणि शंकर अय्यर ने उन्हें ‘नीच’ कहा था ऐसा कह कर उन्होने शायद कोई गलती नहीं की थी बल्कि मणिशंकर अय्यर को उनके लिए इससे भी ज्यादा कोई सख्त लफ्ज का इस्तेमाल करना चाहिए था। मोदी ने बस्ती और प्रतापगढ की एलक्शन रैलियों में राहुल गांधी को मुखातिब करते हुए कहा था कि आपके वालिद को उनके दरबारियों ने खुशामद में मिस्टर क्लीन बना दिया था। लेकिन मत भूलिए कि उनका खात्मा भ्रष्टाचारी नम्बर वन की तरह हुआ। मोदी ने ऐसा बयान देते वक्त जाहिर कर दिया कि उन्हें सनातनी हिन्दू धर्म के रीति-रिवाजों और संस्कारों का न तो इल्म है न ही उनपर वह अमल करते हैं? रावण भी जब दम तोड़ रहा था तब भगवान राम ने उसका अनादर करने के बजाए लक्ष्मण से कहा था जाओ और रावण से कुछ ज्ञान (इल्म) हासिल कर लो। उसके मरने के बाद भी उन्होने उसका अपमान नहीं किया। नरेन्द्र मोदी के राजीव गांधी पर आए घटिया बयान के जवाब में राहुल गांधी ने अपने मजहब और खानदानी इकदार (मूल्यों) के मुताबिक ही जवाब दिया और कहा कि ”मोदी जी आप चाहे जितना कीचड़ उछालें और हम से चाहे जितनी नफरत करें हम आप से प्यार ही करते रहेंगे हमने नफरत  करना सीखा नहीं है। मैं अब भी आपको गले लगाने को तैयार हूं।“ उन्होने कहा कि मोदी जी आपके कर्म आपका इंतजार कर रहे हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने मोदी के बयान पर भले ही उनकी तरह घटिया जुबान (भाषा) का इस्तेमाल नहीं किया। लेकिन राजीव गांधी के साथ कांग्रेस में काम कर चुकी बंगाल की वजीर-ए-आला और तृणमूल कांग्रेस की सदर ममता बनर्जी ने मोदी को उन्हीं की जबान में जवाब देते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी नीचे से ऊपर तक खून से सने हुए हैं। मैं उन्हें मुल्क का वजीर-ए-आजम भी नहीं मानती। ममता बनर्जी ने कहा कि जो शख्स अपनी बीवी तक की देखभाल न कर सका हो उसे संभाल न सका हो वह देश क्या संभालेगा। गुजरात और बंगाल में समन्दरी तूफान आने के बाद मोदी ने ममता बनर्जी को फोन किया था लेकिन ममता ने उनसे बात करना मुनासिब नहीं समझा इसकी मोदी ने अपनी एक एलक्शन मीटिंग में अवाम से शिकायत की तो ममता बनर्जी ने कहा कि मैं एक्सपायरी (मुद्दत खत्म कर चुके) वजीर-ए-आजम से मिलकर क्या करूं। उन्होंने मुझे कलाईकुडा में बात करने के लिए बुलाया था क्या मैं उनकी नौकर हूं कि वह जहां जब चाहें बुला लें? यह खबर लिखने में हमने भी अपने अखबार की पालीसी से थोड़ा हटते हुए ऐसी जुबान (भाषा) का इस्तेमाल किया है जो नहीं करना चाहिए था लेकिन जब हमने मोदी के रहम ओ करम पर मुल्क के फाइनेंस मिनिस्टर अरूण जेटली ने अपने आका नरेन्द्र मोदी की घटिया और सतह से गिरी हुई जुबान (भाषा) की तरफदारी करते हुए कहा कि मोदी को भी इजहार (अभिव्यक्ति) की आजादी हासिल है और इजहार की आजादी एलक्शन कोड आफ कंडक्ट से ज्यादा अहम है। मतलब यह एलक्शन मुहिम के दौरान मोदी एण्ड कम्पनी किसी के लिए कुछ भी बोल सकती है।

दिल्ली की एक रैली में मोदी ने इल्जाम लगा दिया कि मुल्क की समन्दरी सरहदों की हिफाजत के लिए आईएनएस विराट का इस्तेमाल राजीव गांधी ने छुट्टियां गुजारने के लिए किया था, उनके साथ उनका पूरा कुन्बा और सुसराल के विदेशी लोग भी थे। मोदी का झूट फौन ही पकड़ गया। राजीव गांधी के दौर में नेवी चीफ रहे एडमिरल रामदास ने वाजेह किया कि राजीव गांधी सरकारी दौरे पर आईएनएस विराट पर गए थे। उनके साथ सिर्फ उनकी बीवी थीं कोई विदेशी या दूसरा घर का मेम्बर भी नहीं था। एडमिरल रामदास ने कहा मोदी ने इस तरह अपनी सियासत के लिए फौज का इस्तेमाल किया यह बहुत ही शर्मनाक बात है।

नरेन्द्र मोदी ने राहुल गांधी पर घटिया बयानबाजी तो कर दी लेकिन उन्हें यह एहसास नहीं था जुबान से राजीव गांधी के खिलाफ निकली गंदी घटिया और सतही (स्तरहीन) भाषा को देश के लोगों खुसूसन अमेठी के अवाम के दिलों में तीर की तरह चुभ गई। नतीजा यह अब इस बार मोदी की चहेती ड्रामा क्वीन को अमेठी में उतने वोट भी नहीं मिलेगे जितने में वह अपनी जमानत बचा सके। बीजेपी छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए शत्रुधन सिंन्हा ने कहा कि मोदी इतना गिर जाएंगे इससे उन्हें हैरत नहीं हुई बल्कि इंतेहाई गहरी तकलीफ हुई कि सियासत में कोई शख्स इस हद तक गिर सकता है कि वह तमीज व तहजीब के तमाम रिकार्ड ही तोड़ देगा। उन्होने कहा कि मोदी का अपना कोई मेयार (स्तर) बचा ही नहीं अब उन्होने मुल्क, अवाम और वजीर-ए-आजम के ओहदे के मेयार को भी शर्मनाक हद तक गिरा दिया है। इस पर कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी प्रियंका गांधी ने अंबाला की एक पब्लिक मीटिंग में रामधारी सिंह दिनकर की एक मशहूर कविता सुना कर जवाब दे दिया खुद अपनी तरफ से कुछ नहीं कहा। सोनिया गांधी ने भी सब्र व जब्त का मजाहिरा करते हुए मोदी की बदजुबानी पर खामोश रह कर इसका फैसला मुल्क के लोगों पर ही छोड़ दिया।

मोदी की जगह कोई भी हस्सास (संवेदनशील) और तमीजदार शख्स होता तो राजीव गांधी पर किए गए अपने तब्सिरे पर अगले ही दिन अफसोस जाहिर करके मामला खत्म कर देता। उन्होने अफसोस जाहिर नहीं किया बल्कि अगले दिन से उन्होने यह कहना शुरू कर दिया कि अगर राहुल और कांग्रेस में हिम्मत हो तो बाकी दो मरहलो के बचे हुए लोक सभा एलक्शन को राजीव गांधी के नाम पर लड़ लें। मतलब यह कि मोदी कांग्रेस और राहुल गांधी को भी अपनी सतह पर लाना चाहते थे वह समझ रहे थे कि शायद तमाम लोग उनकी तरह गिरे हुए हैं और अट्ठाइस साल पहले मुल्क पर शहीद हो चुके राजीव गांधी के नाम पर मोदी की तरह सियासत करने और एलक्शन लड़ने के लिए तैयार हो जाएंगे। मोदी ने तो राजीव गांधी को मौजूदा एलक्शन की मुहिम में खींच कर घटियापने का सबूत दिया ही उनकी गुलामी में लगे अरूण जेटली, प्रकाश जावडेकर और अमित शाह वगैरह ने भी उनकी हिमायत शुरू कर दी इन अक्ल के अंधों से कौन पूछे कि क्या आज के एलक्शन का मुद्दा राजीव गांधी है।

झूटों के सरगना नरेन्द्र मोदी को राजीव गांधी पर घटिया इल्जाम लगाते वक्त इस बात का भी होश नहीं रहा कि जिस बोफोर्स सौदे में आरएसएस एजेण्ट विश्वनाथ प्रताप सिंह ने राहुल गांधी और उनके करीबियों पर चौसठ (64) करोड़ की रिश्वत खाने का इल्जाम लगाया था, उस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक से राजीव गांधी को क्लीन चिट मिल चुकी है। राजीव गांधी के बाद छः वजीर-ए-आजम आए बोफोर्स की जांच जारी रही लेकिन किसी भी सरकार में कही से भी यह साबित नहीं हो पाया कि बोफोर्स में राजीव गांधी ने कमीशन खाया। इसके बावजूद इस झूटे शख्स को राजीव पर इल्जाम लगाने में कोई शर्म नहीं आई।

राजीव गांधी पर इल्जाम लगाते वक्त मोदी का चेहरा इतना बिगड़ा हुआ था कि जैसे कोई चोर चोरी करते भाग रहा हो और पकड़ा जाए उन्हें अपनी शिकस्त साफ नजर आ रही है। अब तो आरएसएस के राम माधव तक ने कुबूल कर लिया है कि मोदी की कयादत में बीजेपी को सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलेंगी। झेंप मिटाने के लिए उन्होने इतना जरूर कहा कि कुछ साथी पार्टियों की मदद से वह फिर वह सरकार बना लेंगे।

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