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मोदी, अमित शाह और विजय रूपाणी गुजरातियों की नाराज़गी से हैं परेशान - democracia
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मोदी, अमित शाह और विजय रूपाणी गुजरातियों की नाराज़गी से हैं परेशान

 

हिसाम सिद्दीकी

चारों तरफ से घिरे नरेन्द्र मोदी अफवाहों, धर्म, पाकिस्तान और झूठ के सहारे गुजरात जीतने पर उतरे। बोले कि नेहरू तो सरदार पटेल के आखिरी रूसूमात (अंत्येष्ठि) में शामिल नहीं हुए थे। इतिहास से पटेल का नाम मिटाने की हर मुमकिन कोशिश कांग्रेस ने की। इतने बड़े झूठ की आखिर क्या ज़रूरत थी वह भी प्राइम मिनिस्टर जैसे ओहदे पर बैठे शख्स के लिए।

चिदम्बरम ने पंचायती राज सिस्टम मजबूत बनाकर कश्मीरियों को ज्यादा खुदमुख्तारी (स्वायतता) देने की बात कही, यही बात तो अपनी सरकार के जमाने में अटल बिहारी वाजपेयी ने कही थी, यशवंत सिन्हा ने यही कहा लेकिन अब एलक्शन की वजह से मोदी ने चिदम्बरम के बयान के सहारे कह दिया कि कांगे्र्रस तो बेशर्मी के साथ पाकिस्तान की जुबान (भाषा) बोल रही है। मोदी ने कांग्रेस पर जिस जुबान में हमला किया बहुत खराब थी।

गुजरात के वजीर-ए-आला विजय रूपाणी ने कहा दिया कि भरूच जिले के अंकलेश्वर में सरदार पटेल  मेडिकल कालेज में अहमद पटेल डायरेक्टर रहे हैं उसी मेडिकल कालेज में नौकरी कर चुका कासिम आईएसआईएस का एजेण्ट दहशतगर्दी के इल्जाम में गिरफ्तार किया गया है। रूपानी चाहते थे कि अहमद पटेल जवाब दें तो वह फौरन पूरा मामला हिन्दू मुस्लिम बना दें लेकिन अहमद पटेल ने राजनाथ सिंह को तहकीकात के लिए खत लिखकर रूपानी के मंसूबों पर पानी फेर दिया।

अहमदाबाद! कांग्रेस पार्टी कश्मीर के मामले में पाकिस्तान की जुबान बोल रही है, मुल्क के पहले होम मिनिस्टर सरदार वल्लभ भाई पटेल को इतिहास से मिटाने का काम कांग्रेस ने किया, अहमद पटेल जिस अस्पताल के डायरेक्टर रहे हैं उसमें काम करने वाला आईएसआईएस का दहशतगर्द गिरफ्तार और हमने देश की पहली रो-रो फेरी सर्विस शुरू की है।

यह वह झूट हैं जिनके सहारे वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और वजीर-ए-आला विजय रूपानी अब गुजरात असम्बली का एलक्शन जीतना चाहते हैं। अपने झूट में धर्म का तड़का लगाने के लिए इन लोगों ने उत्तर प्रदेश के चीफ मिनिस्टर आदित्यनाथ योगी को भी गुजरात बुलाया। यह दीगर बात है कि आदित्यनाथ योगी अपने पहले ही दौरे में नाकाम साबित हुए।

राहुल गांधी की पब्लिक मीटिंगों में बढती भीड़ आम लोगों पर असर डालती उनकी बातें पाटीदार लीडर हार्दिक पटेल, बैकवर्ड लीडर अल्पेश ठाकोर और दलित लीडर के तौर पर तेजी से उभरे जिगनेश मोवाणी की बीजेपी मुखालिफत से परेशान भारतीय जनता पार्टी, वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी और उनकी बीजेपी के सदर अमित शाह को शायद घबराकर एक बार फिर अफवाहों, मजहब और झूट के सहारे गुजरात का एलक्शन जीतने का फैसला करना पड़ा।

उनकी इस हिकमते अमली (रणनीति) पर अब तो सबसे पहले मोदी को मुल्क का वजीर-ए-आजम बनाने की बात करने वाले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के सदर राज ठाकरे तक ने उनपर सख्त हमले शुरू कर दिए हैं। एक टीवी चैनल के प्रोग्राम में राज ठाकरे ने वाजेह (स्पष्ट) तौर पर कहा कि पब्लिक में अपनी खोई हुई साख का अंदाजा लगाने के बाद ही नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर दहशतगर्दी, पाकिस्तान और हिन्दू मुसलमान करना शुरू कर दिया है।

राज ठाकरे ने सीधा सवाल करते हुए पूछा कि अगर बीस-पच्चीस सालों में बीजेपी ने गुजरात में फिर साढे तीन सालों में देश में तरक्की के तमाम काम कर डाले थे तो अब गुजरात एलक्शन में योगी आदित्यनाथ समेत दूसरे प्रदेशों के लीडरान को क्यों बुलाया जा रहा है। वहां तो अकेले मोदी को ही काफी होना चाहिए। राज ठाकरे ने यह भी कहा कि बीजेपी ने राहुल गाधी को बेवकूफ और पप्पू जैसे अल्काब से जितना बदनाम करने की कोशिश की अवाम में राहुल गांधी उतना ही मकबूल (लोकप्रिय) हो गए। आज गुजरात में लोग उन्हें सुनने आते हैं हर अगली मीटिंग में पिछली से ज्यादा भीड़ हो रही है।

नफरत और झूट की सियासत पर काम करते हुए सबसे पहले गुजरात के चीफ मिनिस्टर विजय रूपानी देर रात मीडिया के सामने नमूदार होकर बोले कि आईएसआईएस से मुताल्लिक दो दहशतगर्दों को गिरफ्तार किया गया है। उनमें से एक कासिम अकलेश्वर के उस अस्पताल में काम कर चुका है जिस अस्पताल के ट्रस्टीज में अहमद पटेल भी शामिल रहे हैं। उनका ख्याल था कि अहमद पटेल इस घटिया इल्जाम का जवाब देंगे तो वह फौरन ही मामला हिन्दू मुस्लिम बना देंगे। अहमद पटेल ने होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह को खत लिखकर पूरे मामले की तहकीकात कराने का मतालबा करके बीजेपी की साजिश पर पानी फेर दिया।

खुद वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने बंगलौर में जाकर साबिक मरकजी वजीर पी चिदम्बरम के कश्मीर के सिलसिले में दिए गए एक बयान को गलत तरीके से पेश करते हुए इल्जाम जड़ दिया कि कांगे्रेस तो कश्मीर के सिलसिले में पाकिस्तान की जुबान बोल रही है। चिदम्बरम ने वही कहा जो वजीर-ए-आजम की हैसियत से पंडित अटल बिहारी वाजपेयी कह चुके थे। 31 अक्टूबर को मुल्क के पहले होम मिनिस्टर वल्लभ भाई पटेल के नाम पर हुए एक जलसे में नरेन्द्र मोदी ने फिर इल्जाम लगाया कि कांगे्रस ने सरदार पटेल का नाम तारीख (इतिहास) से मिटाने का काम किया।

गुजरात एलक्शन जीतने के लिए नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह की जुबान (भाषा) बोलनी शुरू की है वह जुबान किसी भी कीमत पर वजीर-ए-आजम के ओहदे के शायान-ए-शान नहीं है। वह अपने ओहदे का वकार (गरिमा) गिरा रहे है। वह जमकर झूट भी बोल रहे हैं। वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने तीस अक्टूबर को बंगलौर में साबिक मरकजी वजीर पी चिदम्बरम के एक बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हुए कांगे्रस पर इल्जाम लगाया कि कश्मीर के सिलसिले में कांग्रेस बड़ी बेशर्मी के साथ पाकिस्तान की जुबान (भाषा) बोल रही है।

उनके  इस बयान को उनके एक खुशामदी और भाण्ड टाइप वजीर मुख्तार अब्बास नकवी ले उड़े और नया नारा दे डाला कि ‘कांगे्रस का हाथ दहशतगर्दों के साथ’। पी चिदम्बरम ने वही कहा था जो पंडित अटल बिहारी वाजपेयी वजीर-ए-आजम की हैसियत से कई साल पहले कह चुके हैं। उन्होने कहा कि कश्मीर में पंचायती राज सिस्टम को मजबूत करके वहां के अवाम में  खुदमुख्तारी (स्वायतता) का एहसास कराने की सख्त जरूरत है।

यही बात साबिक वजीर और बीजेपी के सीनियर लीडर यशवंत सिन्हा समेत कश्मीर मामलात पर बात करने वाले हर शख्स ने कही है। अब चूंकि गुजरात असम्बली का एलकशन सर पर आ गया है  इसलिए वजीर-ए-आजम मोदी ने इस बयान के सहारे कांगे्रस पर पाकिस्तान की भाषा बोलने का इल्जाम मढ दिया। वह इससे पहले भी पाकिस्तान का नाम लेकर गुजरात असम्बली का एलकशन जीत चुके हैं।

चिदम्बरम के बयान में पाकिस्तान की भाषा का एहसास मोदी को कैसे हो गया। इसपर बोलते हुए मोदी ने कांग्र्रेस के लिए ‘बेशर्मी’ जैसे अल्फाज का इस्तेमाल किया जो वजीर-ए-आजम के ओहदे के वकार (सम्मान) के मुताबिक नहीं है। वजीर-ए-आजम जैसे बड़े ओहदे पर रहकर मोदी ने एक बड़ा झूट यह बोल दिया कि पंडित जवाहर लाल नेहरू सरदार पटेल की आखिरी रसूम (अंत्येष्ठि) में शामिल नहीं हुए थे यह भी सरदार की तौहीन थी। मोदी के इस बयान के अगले ही दिन उनके झूट का पर्दा फाश करते हुए कुछ लोगों ने अंगे्रजी अखबार टाइम्स आफ इंडिया के 16 दिसम्बर 1950 के शुमारे (अंक) के पहले सफहे की तस्वीर पोस्ट कर दी जिस दिन सरदार पटेल की आखिरी रूसूम अदा की गई थी।

जिसमें पहली खबर यही छपी कि सरदार पटेल की आखिरी रूसूम में सदर-ए-जम्हूरिया डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद और वजीर-ए-आजम पंडित जवाहर लाल नेहरू शामिल हुए। मोदी का यह दावा भी झूटा साबित हुआ कि कांगे्रस ने तारीख (इतिहास) से सरदार पटेल का नाम मिटाने की साजिश की क्योंकि कांगे्रस के दौर में ही गुजरात असम्बली का नाम सरदार पटेल विधान सभा भवन है। मध्य प्रदेश सरकार के सदर दफ्तर यानी सेक्रेटेरिएट का नाम वल्लभ भवन है।

आईपीएस की नौकरी मे आने वाले पुलिस अफसरान कीट्रेनिंग  के लिए हैदराबाद में जो एकाडमी है उसका नाम सरदार पटेल एकाडमी है। सूरत में नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी का नाम सरदार पटेल के नाम पर है। उनके नाम पर कई युनिवर्सिटियां चल रही हैं। गुजरात के आनन्द जिले में वल्लभ विद्यानगर है। मुम्बई में नेशनल टेक्निकल इंस्टीट्यूट पटेल के नाम पर है।

गुजरात में उनका मेमोरियल और म्यूजियम है। राजस्थान के जोधपुर में  पुलिस एण्ड सिक्योरिटी युनिवर्सिटी तो बीकानेर में सरदार पटेल के नाम पर मेडिकल कालेज है। चंद दिन पहले देश के जिस सबसे बडे बांध का इफ्तेताह नरेन्द्र मोदी ने किया कोई पचपन साल पहले उसका संगेबुनियाद (शिलान्यास) जवाहर लाल नेहरू ने किया था और प्रोजेक्ट का नाम रखा था सरदार सरोवर बांध।

दिल्ली में पार्लियामेट के गेट से कनाट प्लेस जाने वाली सड़क का नाम पटेल चैक है। वहीं पर एक बड़ी इमारत सरदार पटेल भवन है जिसमें पहले सिविल एवीएशन मिनिस्ट्री होती थी अब उसी सरदार पटेल भवन में मोदी के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत दभोल का दफ्तर है। राष्ट्रपति भवन की बाउड्री से शुरू होकर हवाई अड्डे की तरफ जाने वाली दिल्ली की सबसे अहम सड़क का नाम सरदार पटेल मार्ग है। इनके अलावा पूरे मुल्क में सैकड़ों इदारों (संस्थानों) इमारतों, चैराहों और सड़कों के नाम पटेल के नाम पर हैं। इनमें से एक भी नाम नरेन्द्र मोदी का रखा हुआ नहीं है। सबके सब कांग्रेस सरकारों ने रखे हैं। पता नहीं इतना बड़ा झूट बोलने का मश्विरा मोदी को किसने दिया।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और उर्दू  साप्ताहिक  जदीद मरकज़ के संपादक हैं। )