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राम रहीम को जेल पहुंचाने में मनमोहन सिंह की अहम भूमिका, पूर्व सीबीआई अधिकारी का खुलासा

डीआईजी ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर गुरमीत राम रहीम केस की जांच ना करने को लेकर राजनीतिक दबाव बनाया गया था। रेप केस में गुरमीत राम रहीम पर आरोप साबित होने के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने डेरा प्रमुख को दोषी मानते हुए 20 साल की सजा सुनाई है। लेकिन इस बीच केस की जांच में शामिल रहे अधिकारी ने बड़ा खुलासा किया है।

इस पूरे मामले की जांच करने वाले सीबीआई के रिटायर्ड डीआईजी एम. नारायणन ने बुधवार को एक न्यूज़ चैनल पर चौकानें वाला खुलासा किया। पूर्व सीबीआई अधिकारी ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर गुरमीत राम रहीम केस की जांच ना करने को लेकर राजनीतिक दबाव बनाया गया था। लेकिन तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने उस सियासी दबाव को नजरंदाज करते हुए जांच जारी रखने को कहा। उन्होंने कहा कि सीबीआई की निष्पक्ष जांच का ही नतीजा है कि आज राम रहीम सलाखों के पीछे है।

मनमोहन ने दिया फ्री हैंड’

गुरमीत केस के मुख्य जांच अधिकारी रहे एम. नारायण ने यह भी बताया कि राजनीतिक प्रेशर के बावजूद मनमोहन सिंह सीबीआई के साथ खड़े रहे और उन्होंने जांच टीम को फ्री हैंड दिया। पूर्व सीबीआई अधिकारी ने बताया कि मनमोहन सिंह के उन्हें स्पष्ट निर्देश थे कि हम कानून के अनुसार चलें। उन्होंने दोनों साध्वियों के लिखित बयान पढ़ने के बाद कहा कि पंजाब और हरियाणा के सांसदों के दबाव में आने की कोई जरूरत नहीं।

पंजाब-हरियाणा के सांसदों की ओर से जांच ना करने का था प्रेशर

इतना ही नहीं नारायणन ने यह भी कहा कि दोनों राज्यों के सांसदों से इतना ज्यादा दबाव था कि मनमोहन सिंह ने तब के सीबीआई चीफ विजय शंकर को बुलाया और पूरे मामले की जानकारी ली। उसके बाद से सीबीआई ने अपना काम बिना किसी दबाव के काम किया।

10 में से 2 साध्वियां ही बोलने को राजी हुईं

एक न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में एम. नारायण ने बताया कि इस केस में सबसे बड़ी चुनौती आरोपी साध्वी को तलाशना था, क्योंकि तब उसका कोई अता-पता नहीं था। कड़ी मशक्कत के बाद उन्होंने 10 साध्वियों का पता लगाया, लेकिन उनमें से दो ही बोलने को राजी हुईं। हालांकि ये दो गवाहियां ही केस में सबसे अहम कड़ी साबित हुईं।

बता दें कि रेप केस में गुरमीत राम रहीम को पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद डेरा प्रमुख के समर्थक उग्र हो उठे और उन्होंने जगह-जगह अपना उत्पात मचाना शुरु कर दिया। रेप केस में गुरमीत का आरोप साबित होने और सजा मिलने के दौरान इस पूरे प्रकरण में 38 लोग मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हुए।