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मध्य प्रदेशः 3200 गांव जलमग्न हो रहे हैं, कहीं चर्चा भी नहीं

आर्यमन जैन
अगस्त में जब सरकार ने कश्मीर पर निर्णय लिया था तब वहीं सरकार देश के एक और घाटी में आखिरी समाधान की तैयारी कर रही थी | सरकार ने सरदार सरोवर बांध के गेट बंद कर दिए और नर्मदा नदी में पानी का स्तर तेजी से बढ़ने लगा। जो फसलें किसानों ने लगाई थी वे डूबने लगीं और पानी ने सैकड़ों गांवों को घेर लिया। लेकिन देश में इस बात की चर्चा नहीं हो रही थी।

जहां कि नर्मदा बचाओ आंदोलन को अपने 35 साल के संघर्ष में पुरज़ोर समर्थन मिलता रहा है इस बार यह खबर राष्ट्रीय मीडिया में नहीं आई। सिविल सोसाइटी भी कश्मीर के मुद्दे को लेकर व्यस्त रही। जैसे-जैसे दिन बीतते गए जलस्तर बढ़ता ही गया। नर्मदा घाटी के सबसे पुराने गांवों में एक निसरपुर पूरी तरह डूब गया और हजारों लोगों को अपने घर-रोज़गार छोड़कर भागना पड़ा। लेकिन वे जाते तो जाते कहां?

हालांकि सरदार सरोवर ने 40000 परिवारों को विस्थापित किया, उनमें से सिर्फ 8000 को पुनर्वास या मुआवजा मिला। बाकी अभी भी इंतजार कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक सारे विस्थापित परिवारों को पुनर्वास और मुआवजा नहीं मिल जाता तब तक बांध पर काम नहीं होना चाहिए। लेकिन नरेंद्र मोदी की सरकार ने इसको नजरअंदाज करते हुए 2017 में बांध पूरा किया। 2 साल नदी सूखी रहने के बाद, इस साल बांध को भरा जा रहा है।

मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मेधा पाटकर और घाटी की कुछ महिलाओं ने भूख हड़ताल शुरू करी। अनशन के 3 दिन बाद ही बड़ी न्यूज़ एजेंसियों ने खबर छापनी शुरू करी। नौ दिन के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने आखिर आंदोलन का समर्थन किया और मेधा पाटकर से अनशन तोड़ने की गुजारिश करी।

हालांकि अनशन खत्म हुआ, पानी का स्तर बढ़ता रहा। नर्मदा घाटी से कई चिंताजनक वीडियो आए हैं एक में कमर स्तर तक पानी भर जाने के बावजूद भी, एक महिला अपने घर को छोड़ने से इंकार कर रही है। एक दूसरे वीडियो में दो बचपन के दोस्त अपने डूबे हुए घर से बाहर निकलते हैं और एक दूसरे को देख कर रो पड़ते हैं। अब उनके बचपन के घर और गलियां नहीं रहे हैं और उनका भविष्य अंधेरे में है। जिस नदी के किनारे रहते हुए और उसे मां के नाम से पुकारते हुए इन लोगों ने अपना जीवन जिया है, उस नदी की मौत में इन्होंने सब खो दियाया है। आश्चर्य की बात है कि प्रधानमंत्री ने ट्वीट करते हुए कहा है कि सरदार सरोवर में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए उनको खुशी हुई है।

32000 परिवारों का क्या होगा? जल शक्ति मंत्रालय के सचिव नर्मदा बचाओ आंदोलन के लोगों से मिलते हुए बोले कि उनके हिसाब से पुनर्वास और मुआवजे का काम पूरा हो चुका है। लेकिन फिर भी गांव वाले गांव खाली नहीं कर रहे हैं इसलिए सरकार उनको निकालने के लिए गांव डूबा रही है।

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