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हिन्दुओं तक पहुचा लिंचिंग का नासूर

हिसाम सिद्दीकी

नई दिल्ली: गौकुशी और बच्चा चोरी के नाम पर मुसलमानों को सड़क पर पीट-पीट कर कत्ल किए जाने के वाक्यात बीजेपी सरकारों  वाली रियासतों में शुरू हुए तो पूरा आरएसएस कुन्बा न सिर्फ खुशियां मनाने में जुट गया बल्कि राजस्थान के होम मिनिस्टर और उनकी मातहत पुलिस मुल्जिमान को बचाने के लिए खुल कर सामने आ गए। शम्भूलाल रेंगर नाम के एक भगवा दहशतगर्द ने लव जेहाद के बहाने मुसलमानों को सबक सिखाने के लिए अफरोजुल नाम के नौजवान को कुल्हाडी से मारा और उसका लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर जारी कर दिया। वह गिरफ्तार हुआ आरएसएस कुन्बे ने उसकी मदद के लिए आन लाइन चंदे की मुहिम शुरू कर दी तो उसकी बीवी के अकाउट में तकरीबन दस लाख की रकम चंद दिनों में ही पंहुच गई। सरकार इस पर खामोश रही। उसको पेशी पर लाया गया तो आरएसएस के गुण्डों ने अदालत की इमारत पर चढकर वहां पहरा रहा तिरंगा फाडकर फेंको और भगवा फहरा दिया। बीजेपी सरकार गुण्डों की मदद में खडी नजर आई। पहलू खान जफर खान, उस्मान अंसारी, मजलूम खान और इम्तियाज खान समेत दर्जनों मुसलमानों को राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखण्ड, छत्तीसगढ और महाराष्ट्र में सरेआम पीट-पीट कर मार दिया गया। लेकिन तकरीबन तमाम मामलात में मुल्जिमान के खिलाफ सख्ती करने के बजाए बगैर किसी सुबूत के मरने वालों के खिलाफ ही गौकुशी और गायों की स्मगलिंग के मुकदमे दर्ज कर दिए गए। बीजेपी और आरएसएस के लोग ही लिंचिंग के इन वाक्यात में सीधे तौर पर शामिल हैं इसका सबूत यह है कि त्रिपुरा जैसी रियासत मे भी बीजेपी सरकार बनने के बाद ही जून के महीने में तीन मुसलमानों को लिंचिंग में मार दिया गया। आरएसएस ने लिंंचग का जो जहर बोया गया अब वह जहर हिन्दुओं को खाने लगा है। एक महीने के अंदर जो 27 लोग लिंचिंग में मारे गए उनमें पांच के अलावा सभी हिन्दू हैं। संघियों ने तीन किस्म की अफवाहें फैलाकर लिंचिंग जैसी घिनौनी हरकत शुरू की थी। एक गौकुशी, दूसरा बच्चा चोरी की अफवाहें और तीसरा मुबय्यना (कथित) लव जेहाद। बडी तादाद में हिन्दुओं की जान लेने तक पहुच चुके लिंचिंग के वाक्यात अब किसी के रोके नहीं रूक रहे हैं।

चीफ जस्टिस आफ इंडिया जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डी वाई चन्द्रचूर्ण की एक बेंच ने गाय बचाने और बच्चा चोरी की अफवाहें फैलाकर लोगों को सडकों पर पीट-पीट कर मारे जाने के खिलाफ तीन जुलाई को सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए हुकूमतों से कहा है कि  वह ऐसे वाक्यात को रोकने का काम करे। सुप्रीम कोर्ट कुछ भी कहे मुख्तलिफ रियासतों की बीजेपी सरकारें सुप्रीम कोर्ट का आर्डर मानने को तैयार नहीं है। तकरीबन दस महीने पहले छः सितम्बर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने लिंचिंग के वाक्यात पर सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए आर्डर दिया था कि रियासती सरकारें लिंचिंग के वाक्यात पर काबू पाने के लिए पुलिस की खूसूसी टीमें बनाए। हर जिले में डिप्टी एसपी सतह के अफसर को नोडल अफसर मुकर्रर करके उसे ऐेसे वाक्यात रोकने की जिम्मेदारी सौपें। बीजेपी सरकारों ने सुप्रीम कोर्ट की एक न सुनी राजस्थान, हरियाणा, झारखण्ड और उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की लिंचिंग के वाक्यात जारी रहे। उन्हें रोकने के लिए कोई नोडल अफसर मुकर्रर नहीं किया गया। लिंचिंग में शामिल भगवा गुण्डों की मदद में पुलिस को जरूर देखा गया। महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी ने इस सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट की तौहीन का एक मामला राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों के खिलाफ दायर किया तो सुप्रीम कोर्ट ने इन रियासतों के खिलाफ कटेम्प्ट आफ कोर्ट का नोटिस जारी कर दिया। सिर्फ लिंचिंग के मामले में ही नहीं पदमावत फिल्म की नुमाइश बगैर किसी रोक टोक के कराई जाए सुप्रीम कोर्ट के इस आर्डर को भी गुजरात मध्यप्रदेश राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसी बीजेपी सरकारों ने रद्दी की टोकरी में डाल दिया था। तब भी सुप्रीम कोर्ट इन सरकारों के खिलाफ बेबस ही नजर आया था।

गाय के नाम पर मुसलमानों की लिंचिंग के ताबडतोड़ कई वाक्यात राजस्थान, हरियाणा और झारखण्ड में पेश आए थे। देश ही नहीं अमरीका और ब्रिटेन जैसे मुल्कों से उसके खिलाफ आवाजें उठने लगी थीं तो महज रस्म अदाएगी के लिए वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी ने भी अपने एक बयान में कहा था कि गाय के नाम पर किसी की जान लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होने मुल्क की तमाम प्रदेश सरकारों को हिदायत दी थी कि ऐसे मामलात में वह सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करें। उनकी हिदायत के बावजूद उन्ही के रहम व करम पर मुख्तलिफ रियासतों में बने चीफ मिनिस्टरों ने कोई कार्रवाई नहीं की तकरीबन एक साल गुजर गया लेकिन नरेन्द्र मोदी ने प्रदेशों की सत्ता पर बैठे अपने गुलामों से एक बार भी यह नहीं पूछा कि आखिर उनके कहने के बावजूद लिंचिंग के वाक्यात कैसे और क्यों हो रहे हैं?

महाराष्ट्र के धुले जिले में पहली जुलाई को सरेबाजार खानाबदोश बिरादरी के पांच हिन्दुओं अप्पा इंगोले, राजू भोसाले, दादा राव शकर राव भोसाले, उसके भाई भरत भोसाले और भरत मालवेय को राइनपाड़ा बाजार में बच्चा चोरी की अफवाह फैलाकर उस वक्त पीट-पीट कर मार डाला गया जब वह राइनपाडा में लगने वाली इतवार की बाजार में लोगों से मदद मांगने के लिए पहुचे थे। यह लोग शोलापुर जिले के मंगले बेडा के रहने वाले थे। मगलवेडा मे ऐसे लोगो की एक बडी आबादी रहती है जिनके पास खेती के लिए बहुत थोडी थोडी जमीने हैं और वह सब लोगों से भीक मांग कर अपनी जिदगी गुजारते हैं पुलिस के मुताबिक इन्हें पीट कर मारने वालों की तादाद तकरीबन तीन दर्जन है। जिनमें से 23 को गिरफ्तार किया जा चुका है। बाकी भी जल्दी ही गिरफ्तार किए जाएगेंं। मरने वाले सभी नौजवान थे जिनके छोटे-छोटे बच्चे हैं।

‘मारो घुटना फूटे आंख’ जैसी मशहूर कहावत पर अमल करते हुए मोदी हुकूमत के बडबोले वजीर रविशंकर प्रसाद ने इतने बडे गुनाह की सारी जिम्मेदारी व्हाटसएप पर डालते हुए कह दिया कि व्हाट्सएप के जरिए ही बच्चा चोरी और गौकुशी की अफवाहें फैलाकर लोग लिंचिंग का माहौल बनाते हैं। यह सही है कि अफवाहें सोशल मीडिया के जरिए ही फैलती हैं लेकिन रविशंकर प्रसाद ने इस मामले में व्हाट्सएप पर बहस चलाकर लोगों को गुमराह करने और असल मसले से लोगों का ध्यान हटाने का काम किया है। रविशंकर प्रसाद हों, वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी हों, रियासतों में बैठे उनकी पार्टी के चीफ मिनिस्टर हों या आरएसएस और विश्व हिन्दू परिषद के लीडरान, सबको अच्छी तरह मालूम है कि इस तरह की अफवाहें फैलाने वाले कौन लोग हैं। जब तक उन गुण्डों और दहशतगर्दों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी व्हाट्सएप कुछ भी कर ले इस किस्म के वाक्यात रूकने वाले नहीं है। शम्भूलाल रेगर के लिए आनलाइन चंदा इकटठा करने की मुहिम किसने चलाई और उसके अकाउट में किन-किन लोगों ने पैसा डाला यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है। रविशंकर बताएं कि ऐसे लोगों के खिलाफ  उनकी सरकार ने क्या कार्रवाई की?

बीजेपी के मेम्बर असम्बली संगीत सोम ने 2013 मे पाकिस्तान का एक वीडियो वायरल करके मुजफ्फरनगर दंगे को और ज्यादा हवा दी थी तो मोदी हुकूमत ने उहें जेड सिक्योरिटी दिला दी। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार उनके ऊपर दर्ज मुकदमे हटाने की कोशिश में लगी है। इसमें व्हाट्सएप क्या कर सकता है। जिन गुण्डों ने राजस्थान की अदालत पर चढकर शम्भू रेगर की हिमायत में भगवा फहराया था उनके नाम और शक्लें सब सरकार के सामने है। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। व्हाट्सएप उसमें क्या करेगा? दुनिया जानती है कि नरेन्द्र मोदी की बीजेपी का आईटी सेल सिर्फ और सिर्फ नफरत फैलाने और दंगों का माहौल पैदा करने के काम पर लगा हुआ है। रविशंकर प्रसाद कभी उसपर भी बात करे। सोशल मीडिया पर पाबंदी से कुछ नहीं होने वाला। यह सही है कि मुल्क में सोशल मीडिया का इस्तेमाल इंतहाई गलत और काबिले एतराज तरीके से किया जा रहा है लेकिन असल सवाल तो यही है कि इस मीडिया का बेजा इस्तेमाल कर कौन रहा है? किस की शह पर कर रहा है और ऐसा करने वाले दहशतगर्दों को किसकी पुश्तपनाही हासिल है?

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