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केरल लव जिहाद मामला: SC ने हाईकोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल, कहा- कोर्ट शादी कैसे रद्द कर सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह अगले सोमवार (9 अक्टूबर) को इस सवाल पर विचार करेगा कि क्या हाई कोर्ट रिट अधिकार के तहत विवाह रद्द कर सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने केरल हाईकोर्ट के फैसले पर सवालिया लहजे में कहा कि अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर हाई कोर्ट एक मुस्लिम युवक की उस हिन्दू महिला से शादी को अमान्य घोषित कर सकता है, जिसने निकाह करने से पहले इस्लाम धर्म कबूल कर लिया था।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस धनंजय वाई चन्द्रचूड़ की 3 सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि केरल के मुस्लिम युवक शफीन जहां की नई अर्जी पर 9 अक्टूबर को विचार किया जाएगा। इस अर्जी में शफीन ने न्यायालय से अपना पहले का आदेश वापस लेने का अनुरोध किया है जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को यह पता लगाने के लिये कहा गया था कि क्या इस मामले में कथित लव जिहाद का ऐंगल है।

साथ ही बहुचर्चित लव जिहाद मामले की सुनवाई के सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लड़की 24 साल की है ऐसे में उसे पिता द्वारा नियंत्रण में नहीं रखा जा सकता। शफीन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने दलील दी कि बहुधर्मी समाज में शीर्ष अदालत को इस मामले की राष्ट्रीय जांच एजेन्सी को जांच का आदेश नहीं देना चाहिए था।

उन्होंने इस आदेश को वापस लेने के लिये दायर अर्जी पर शीघ्र सुनवाई का आग्रह किया। इस पर पीठ ने कहा कि सवाल यह है कि क्या हाई कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 226 में प्रदत्त अधिकार का इस्तेमाल करके शादी अमान्य घोषित कर सकता है? केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले की सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया।

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