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कश्मीर: ‘वो कहते हैं मेरा बेटा दहशतगर्द बन गया, मैं कहता हूँ नहीं’

इस तस्वीर में एक लड़का दिख रहा था. उसके जिस्म पर हथियार और बारूद बंधा हुआ था. बैकग्राउंड में कथित इस्लामिक स्टेट यानी आईएस का झंडा दिख रहा था.
वायरल हुई ये तस्वीर 19 बरस के एहतेशाम बिलाल की है. तस्वीर में उनके सिर पर काली पगड़ी बंधी है, जैसा कि कथित इस्लामिक स्टेट के चरमपंथियों के सिर पर दिखा करता है.

तस्वीर में पीछे जो झंडा दिख रहा है उस पर ISJK लिखा दिख रहा है.
इस तस्वीर पर एहतेशाम बिलाल लिखा हुआ है.

छह मिनट का जो ऑडियो वायरल हुआ वो उर्दू में है.
इस ऑडियो में एहतेशाम कश्मीर में इस्लामी हुकूमत कायम करने की बात करते हैं. साथ ही वो कुरान की कुछ आयतें भी पढ़ते हैं.

कौन हैं एहतेशाम?
भारत प्रशासित कश्मीर के खानयार इलाके के रहने वाले एहतेशाम बिलाल दिल्ली से सटे नोएडा की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में बीएमआईटी के छात्र हैं.
उनके पिता बिलाल अहमद सोफी की एहतेशाम से आखिरी बार 28 अक्तूबर 2018 को तब बात हुई थी जब एहतेशाम नोएडा में अपनी यूनिवर्सिटी से दिल्ली के लिए निकले थे. उसके बाद से उनका घरवालों से कोई संपर्क नहीं है.
बीती 4 अक्तूबर को यूनिवर्सिटी कैंपस में कुछ छात्रों ने यूनिवर्सिटी के कुछ अन्य छात्रों को कथित रूप से पीटा था जिसमें एहतेशाम भी घायल हो गए थे.

सदमे में हैं एहतेशाम के माता-पिता
एहतेशाम के गायब होने के बाद से उनकी मां इरफ़ाना बहुत बीमार हैं. दो दिन पहले जब वो श्रीनगर के प्रेस एनक्लेव में अपने परिवार के साथ प्रदर्शन करने आईं थीं तो उनके बाजू में ग्लूकोज़ की बोतल लगी थी. पिता बिलाल अहमद का भी तब से बुरा हाल है.
बिलाल अहमद पेशे से एक दुकानदार हैं. खानयार इलाके में उनकी अपनी दुकान है.
हालांकि एहतेशाम के पिता और मां वायरल ऑडियो की पुष्टि नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनकी ख़ैर-ख़बर नहीं होने से बेहद परेशान हैं. उनका ये भी कहना है कि अगर एहतेशाम चरमपंथियों के साथ चला भी गया है तो हम उनसे अपील करते हैं कि वो घर वापस आ जाएं और सभी चरमपंथी संगठनों से अपील करते हैं कि उन्हें घर आने दिया जाए.
एहतेशाम की मां इरफ़ाना कहती हैं, “वो मेरे बेटे की आवाज़ नहीं है. क्या मैं नहीं जानती हूं कि मेरे बेटे की आवाज़ कैसी है. एहतेशाम जहां भी है, जिसके पास भी है, मैं सभी संगठनों से अपील करती हूं कि उसको छोड़ दिया जाए.”
ये कहते-कहते वो रोने लगती हैं और फिर बोलती हैं, “एहतेशाम हमारे पूरे परिवार का इकलौता लड़का है. अगर वो वापस नहींआएगा, फिर हमारी देख-रेख कौन करेगा. मैं हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगती हूं… मेरे बेटे को छोड़ा जाए.”

माता-पिता ने चरमपंथियों से की अपील
रोती बिलखती इरफ़ाना आगे कहती हैं, “मैं एहतेशाम से भी कहती हूं कि अगर मुझसे कोई ग़लती हो गई है तो मुझे माफ़ करो. एहतेशाम तुम लौट के वापस आ जाओ. हम सब तो जैसे मर ही गए हैं. अगर उसको कुछ हुआ तो यहां घर में कोई नहीं बच सकेगा. जिनके पास भी एहतेशाम है, वो एहतेशाम के साथ हमारे पास आए और हम सबको मार डालें और फिर वो फ़ैसला करें कि एहतेशाम के साथ क्या कर सकते हैं. मैं सबसे अपील करती हूं कि एहतेशाम को सुरक्षित घर वापस भेजें.”
एहतेशाम के पिता बिलाल अहमद कहते हैं कि जिस क़िस्म की उर्दू ऑडियो क्लिप में है, वैसी उर्दू एहतेशाम नहीं बोल पाता है.
उन्होंने कहा, “नहीं, मुझे नहीं लगता है कि ये एहतेशाम का ऑडियो है. जैसे वो ऑडियो में बोल रहा है, वैसे तो एक स्कॉलर ही बोल सकता है या कोई मंझा हुआ सियासतदान. वो तो छोटा सा बच्चा है और ये इतनी लंबी स्पीच है, मुझे नहीं लगता कि ये एहतेशाम है.”
बिलाल अहमद कहते हैं कि सोशल मीडिया कह रहा है कि मेरा बेटा चरमपंथी बन गया है, लेकिन मैं कहता हूं कि एहतेशाम का चरमपंथ की तरफ रुझान था ही नहीं.
बिलाल अहमद आगे कहते हैं, “खुदा करे, अगर एहतेशाम चरमपंथी बन भी गया है तो मैं आपके माध्यम से जिस किसी संगठन के पास भी वो है, उनसे अपील करता हूं कि वो उसको वापस भेजें. हम चार भाई हैं और हम चार भाइयों का ये एक ही लड़का है, चार माओं का एक ही लड़का है. हमारी हालात बहुत ख़राब है. मां भी तब से बीमार है, मैं भी बीमार हूं.”

दोस्त ने दिखाई थी पिता को वो तस्वीर
बिलाल अहमद कहते हैं कि बीती रात उनके किसी दोस्त ने उन्हें एहतेशाम की वायरल तस्वीर और ऑडियो दिखाया था. वो कहते हैं कि तस्वीर और ऑडियो देखने के बाद मुझे छह घंटे तक होश नहीं था.
पुलिस महानिरीक्षक एसपी पानी ने बीबीसी को बताया कि वो इस वायरल ऑडियो और तस्वीर की जांच कर रहे हैं.
एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (क़ानून) मुनीर अहमद ख़ान ने बताया, “जो ऑडियो तस्वीर संगठन की आई है, हम उसकी जांच कर रहे हैं.”

बिलाल अहमद सोफी अपने घर आने वाले हर किसी शख्स को उस दीवार के बारे में बताते हैं जिस दीवार पर उनके बेटे गेंद फेंकते और घंटों खेला करते थे. बिलाल अहमद उस मंज़र को अपनी आंखों से ओझल नहीं कर पा रहे हैं.
एहतेशाम जिस गेंद को घर के आंगन की दीवार पर मारते थे, वो अभी तक दीवार के नीचे नाली में पड़ी हुई है.
एहतेशाम के चाचा ने दीवार पर उन निशानों को भी दिखाया, जो एहतेशाम के गेंद मारने से दीवार पर पड़ गए हैं.
बिलाल अहमद किसी को विश्वास के साथ बता नहीं पाते हैं कि आखिर उनका बेटा कहां गया होगा.
वो सिर्फ़ बेटे की उस फ़ोन कॉल के बारे में बात करते हैं, जो उन्होंने आखिरी बार की थी.

क्या हुआ था उस दिन, जब एहतेशाम गायब हुए
बिलाल अहमद कहते हैं, “जिस दिन ये घटना यूनिवर्सिटी में हुई थी, मैं उसी दिन श्रीनगर से नोएडा पहुंचा. मैं अपने बेटे एहतेशाम से मिला. उनकी बाजू में चोट आई थी. एहतेशाम के अलावा और भी दो तीन कश्मीरी छात्रों को चोटें आई थीं. मैं उन छात्रों से भी मिला जिन्होंने एहतेशाम को मारा था. उन्होंने मुझसे माफ़ी मांगी. लेकिन दो छात्र मुझसे मिलने नहीं आए जो एहतेशाम की पिटाई में शामिल थे.”
“मैं क़रीब छह दिन वह रहा. वहां के स्टेशन हाउस अफसर ने मुझसे कहा था कि आप एक याचिका दे दें तो मैं उन लड़कों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करूंगा जिन्होंने आपके बेटे को मारा है. लेकिन मैंने इनकार किया. मैंने सोचा कि ये भी बच्चे हैं और कार्रवाई से इनका करियर ख़राब हो सकता है. मैंने ये भी सोचा कि ये फिर आपस में मिलेंगे, इसलिए ऐसा करना ठीक नहीं है.”

लेकिन शाम को उनका फ़ोन नहीं आया
बिलाल कहते हैं, “लेकिन जब साढ़े छह बजे तक उन्होंने फ़ोटो नहीं भेजे तो मैंने दोबारा उनको फ़ोन किया. इस बार उनका फ़ोन बंद आ रहा था. मैंने मुबाशिर को फ़ोन किया जो उनका रूममेट भी है और पूछा कि एहतेशाम यूनिवर्सिटी पहुंचा क्या. तो उसने कहा कि नहीं. मुबाशिर ने ये भी बताया कि मेरी भी उनसे साढ़े चार बजे बात की था और मुझसे भी यही कहा था.”
वो कहते हैं, “हमने क़रीब 12 बजे तक इंतजार किया कि वो आएंगे. मुबाशिर ने हमसे कहा कि एहतेशाम ने आखिरी बार मुझसे कहा था कि साढ़े आठ बजे तक आ जाएंगे.”
बिलाल अहमद कहते हैं कि रात के बारह बजे तक भी जब एहतेशाम वापस नहीं लौटे तो हम पुलिस स्टेशन, खानयार गए और वहां मिसिंग रिपोर्ट दर्ज़ कराई.
वो कहते हैं कि जब वो नोएडा से 10 अक्टूबर को वापस कश्मीर पहुंचे तो तबसे लेकर 28 अक्टूबर तक रोज़ाना वो एहतिशाम के साथ फ़ोन पर बात करते थे.
ये पूछने पर कि एहतेशाम को यूनिवर्सिटी के लड़कों ने पीटा क्यों था, वो बोले, “4 अक्टूबर को एहतेशाम उस समय क्लास में था और उनके कज़िन मुबाशिर (जो खुद उसी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते हैं) ने उनको फ़ोन पर बताया है कि यूनिवर्सिटी कैंपस में हालात ख़राब हैं, इसलिए आप बाहर आएं. ये बीएमआईटी के चार कश्मीरी छात्र क्लास से बाहर आए थे. इनके साथ एक और छात्र उबैद बाहर आ रहे थे और उसी समय उन पर हमला हुआ था.”

‘बात बढ़ाने से कोई फ़ायदा नहीं’
अहमद कहते हैं कि जब मैं यूनिवर्सिटी पहुंचा तो मैंने प्रशासन से पूछा कि एहतेशाम को क्यों मारा गया था?
उन्होंने आगे बताया, “यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मुझे कहा कि लड़कों ने ग़लती से एहतेशाम को मारा था और लड़कों ने ये समझा था कि ये भी अफ़गान हैं. मुझे जो यूनिवर्सिटी में बताया गया कि कश्मीरी लड़कों के साथ उन लड़कों का कोई मसला नहीं था. एहतेशाम ने मुझसे कहा कि ये सब उसके साथ क्रिकेट खेलते थे. लेकिन जिस समय उसे मारा गया तो एक लड़के ने कहा कि वो भी अफ़गान है. एहतेशाम से मैंने जब पूछा तो उसने कहा कि नहीं अब बात बढ़ाने से कोई फ़ायदा नहीं है.”
ये पूछने पर कि एहतेशाम के दिमाग में इस घटना के बाद क्या चल रहा था, तो अहमद बोले, “एक बात एहतेशाम ने मुझसे ज़रूर कही. उसने कहा कि आप कहते थे कि जाओ दिल्ली पढ़ाई करने जाओ, और अब इधर आया तो पिटाई हुई. इतना उसने कहा था मुझसे. बाक़ी एहतेशाम ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से कहा था कि उसे किसी के ख़िलाफ़ कोई शिकायत दर्ज़ नहीं करनी है.”
बिलाल अहमद का कहना है कि जब एहतेशाम यूनिवर्सिटी से निकला था तो उसके पास सिर्फ़ 400 रुपये जेब में थे.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को एहतेशाम की तस्वीर और ऑडियो के हवाले से अपने ट्वीटर पर लिखा है,” नोएडा यूनिवर्सिटी के लापता छात्र की तस्वीर आईएस (IS) चरमपंथी के रूप में सामने आना बहुत ही चिंता का विषय है.”

BBC के शुक्रिए के साथ 

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