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जुनैद का क़त्ल- 'वो रहम की भीख मांगता रहा,लोग वीडियो बनाते रहे' - democracia
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जुनैद का क़त्ल- ‘वो रहम की भीख मांगता रहा,लोग वीडियो बनाते रहे’

गुरुवार रात एक लोकल ट्रेन से दिल्ली से बल्लभगढ़ जा रहे एक 15 साल के एक मुसलमान युवक जुनैद हाफिज़ को ट्रेन में भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला। बल्लभगढ़ के पास खंदावली गांव के रहने वाला जुनैद अपने भाईयों और पड़ोसियों के साथ ईद के मौक़े पर खरीदारी करने दिल्ली गया था।

जुनैद के साथ उनके भाई हाशिम और शाकिर और पड़ोस में रहने वाले दोस्त मोहसिन जुनैद के बाद ट्रेन में चढ़े थे। जुनैद दिल्ली के सदर बाज़ार से नया कुर्ता पायजामा, जूते और परफ्यूम  की खरीदारी कर घर लौट रहे थे। जुनैद के भाई हाशिम ने उस दिन की घटना पर मीडिया को बताया। वह बताता है किः

हम लोग सदर से चढ़े थे।  ट्रेन लगभग खाली थी। सीटें भी खाली थीं।  हम चार लोग थे तो आमने-सामने बैठ गए। वहां से आगे चले तो तिलक ब्रिज से एक बुजुर्ग उस ट्रेन में बैठे। उन्होंने मेरे भाई जुनैद से कहा कि मेरे लिए सीट छोड़ दे। जुनैद ने उनके लिए सीट छोड़ दी। इतने में ओखला आ गया। वहां पहुंचते-पहुंचते ट्रेन पूरी तरह से भर गई। उसमें पांव रखने की भी जगह नहीं थी। ओखला से लगभग बीस-पच्चीस लोग चढ़े। चढ़ने में धक्का मुक्की हुई। धक्का लगने से जुनैद नीचे गिर गया।

इस पर हमने और जुनैद ने कहा कि धक्के क्यों मार रहे हो। उन्होंने मेरे सर पर टोपी देख कर कहा कि तुम मुसलमान हो, देशद्रोही हो, तुम पाकिस्तानी हो, मांस-मीट खाते हो। उस आदमी ने मेरे सर से टोपी हटाकर फर्श पर गिरा दी। मेरी दाढ़ी पकड़ने की कोशिश की। जब मैंने रोकने की कोशिश की तो उन्होंने मार-पीट शुरू कर दी।

अगला स्टेशन तुगलकाबाद आने तक वो हमें मारते रहे। वहां से मैंने अपने भाई को फ़ोन किया और मदद के लिए बुलाया। मेरे बड़े भाई बल्लभगढ़ स्टेशन पहुंचे। लेकिन बल्लभगढ़ पहुंचने पर उन लोगों ने हमें ट्रेन से उतरने नहीं दिया। वो हमें नीचे गिरा कर हमारे ऊपर चढ़े हुए थे। भाई हमें बचाने के लिए ट्रेन पर चढ़े तो उन लोगों ने उन्हें भीतर खींच लिया और उसके साथ भी मार पिटाई की।

बल्लभगढ़ से कुछ लोग ट्रेन से उतरे और यहां से आगे ट्रेन चालू हुई तो उन लोगों ने चाकू निकाल लिया और शाकिर को मारना शुरू किया। जुनैद ने बीचबचाव किया तो उन्होंने जुनैद को भी मारा। मुझे भी मारा। जुनैद को उन्होंने इतना मारा था कि वो नीचे गिर गया। उन्हें लगा कि जुनैद मर गया है। अगले स्टेशन असावटी पर उन्होंने  जुनैद को फेंक  दिया।  इसके बाद को ट्रेन की पिछली साइड से उतरे जबकि हम प्लेटफॉर्म से उतरे।

मोहसिन ने बताया कि फिर हमने एंबुलेंस को फोन किया जो आधे घंटे में वहां पहुंची। ‘वो रहम की भीख मांगता रहा, लोग वीडियो बनाते रहे।’ ‘भाई की मौत का मंज़र मुझे सपने में भी डराता है’ ओखला से वो बीस-पच्चीस लोग चढ़े से, लेकिन पता नहीं बल्लभगढ़ तक बीस-पच्चीस ही थे. लेकिन वहां से ट्रेन चली तो हमें छोड़ कर पूरा डिब्बा गैर मुसलमानों से भरा था और पूरे डिब्बे के लोग एक हो गए थे। सब लोगों ने कहा ये मुसलमान हैं, देश द्रोही हैं मारो इनको।

जून के महीने में हम 16-17 घंटे रोज़ा रखे हुए थे। इसके बाद हमारे साथ मार पिटाई हुई। हम लोग रोज़ा भी नहीं खोल पाए थे। जो हमारे साथ हुआ वो किसी और के साथ ना हो। जिन लोगों ने ऐसा किया उन्हें जल्द से जल्द पकड़ा जाए और सख्त से सख्त सज़ा मिले।
हाफिज़ जुनैद नाम का कोई और, या कोई और मुसलमान भाई के साथ ऐसा ना हो।