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जज लोया की मौत का जांच मामला काफी गंभीर था: कांग्रेस

जज लोया की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने मामले में एसआईटी जांच की याचिका को खारिज कर दिया। इस पर कांग्रेस ने दस सवाल खड़े किए हैं जो अभी भी अनसुलझे हैं और उनका जवाब मांगा है। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है।

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘आज का दिन काफी दु:खद है, जज लोया की मौत का जांच मामला काफी गंभीर था। वो सोहराबुद्दीन मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें अमित शाह का नाम सामने आया था।’ सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कई सवाल बाकी हैं जिनका जवाब दिया चाहिए। उन्होंने केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद पर फैसले की कॉपी तत्काल उपलब्ध होने पर भी सवाल उठाए।

1- सोहराबुद्दीन और तुलसीराम प्रजापति के केस को सुन रहे जजों का 2012 में ट्रांसफर किया गया था। अभियुक्त को पेश न होने पर जब इसमें 26 जून,2014 की तारीख तय की तो उस समय मामले को देख रहे जज उत्पत का एक दिन पहले ट्रांसफर कर दिया गया था। फिर जज लोया को तैनात किया गया और 30 नवंबर 2014 में उनकी संदेहास्पद स्थिति में मृत्यु हो गई। इसके बाद अमित शाह को बरी कर दिया गया और इस आदेश के खिलाफ अपील भी नहीं की गई।

2- क्या इसके बाद में मामला सुनने वाले जज लोया को सौ करोड़ रुपये की रिश्वत, एक फ्लैट देने की पेशकश की गई थी? यह आरोप जज लोया की बहन ने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में लगाया था।

3- जज लोया की मौत का कारण हार्ट अटैक से बताया गया था लेकिन ईसीजी की रिपोर्ट ऐसा कुछ भी नज़र आया था। एम्स के तत्कालीन फारेंसिक प्रमुख डाक्टर आर के शर्मा ने हाई अटैक के किसी सबूत न होने की पुष्टि की थी।

4- मुंबई से नागपुर जाते समय जज लोया को सुरक्षा क्यों नहीं दी गई थी?

5- जज लोया मुंबई से नागपुर ट्रेन के जरिए जाने का कोई रिकार्ड भी नहीं है, आखिर क्यों?

6- जज लोया के नागपुर के रविभवन में रुकने का कोई रिकॉर्ड क्यों नहीं है, जबकि वहां 15 कर्मचारी तैनात हैं?

7- जिस गेस्ट हाउस में जज लोया रुके हुए थे, वहां कई कमरे थे। फिर तीन जज उसी कमरे में ही क्यों रुके हुए थे?

8- परिवार को जज लोया के कपड़ों में गर्दन के पास खून मिला था।

9- पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में उनका नाम गलत क्यों लिखा गया था?

10- सवाल यह है कि जज लोया की मौत के बाद दो अन्य सहयोगितों की भी मौत हो गई। एडवोकेट खांडेलकर को 28 नवंबर, 2015 में आठ मंजिला इमारत से नीचे फेंक दिया गया और दूसरे सहयोगी रिटायर्ड जज थोम्ब्रे की भी 16 मई 2016 को नागपुर से बंगलौर जाते समय ट्रेन में संदेहास्पद स्थितियों में मौत हो गई।

कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है कि देश के लोग इन सवालों का जवाब चाहते हैं जिससे सब कुछ साफ हो जाएगा। जज लोया के मामले में अब तक जांच नहीं हुई है। कोई तय नहीं कर सकता कि मौत प्राकृतिक है या नहीं। क्या केवल जजों के बयान के आधार पर अन्य दस्तावेज और संदिग्ध परिस्थितियों को दरकिनार किया जा सकता है। क्या पुलिस के सामने दिए बयान को सबूत के तौर पर माना जा सकता है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की एसआईटी से जांच कराने की अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि मामले का कोई आधार नहीं है, इसलिए इसमें जांच नहीं होगी। तीन जजों की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि चार जजों के बयान पर संदेह का कोई कारण नहीं है, उन पर संदेह करना संस्थान पर संदेह करने जैसा होगा। इस मामले के लिए न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को भी फटकार लगाई।

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