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जागरण समूह के अख़बार ने बनारस फ्लाईओवर हादसे के लिए नक्षत्र योग को ज़िम्मेदार ठहराया

बनारस फ्लाईओवर हादसे में 20 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। आधा सैकड़ा घायल हैं। ऐसा खौफनाक मंज़र कि रूह कांप जाए। उत्तर प्रदेश के बनारस शहर में मंगलवार को इस हादसे ने प्रदेश को हिला कर रख दिया। पूरा बनारस इस हादसे का शोक मना रहा है।

सवाल है कि हादसे की जिम्मेदारी तय की जाए तो किस पर डाली जाए ? फ्लाईओवर का निर्माण करने वाले ठेकेदार पर? शासन-प्रशासन पर?, नेताओं पर? या ग्रह-नक्षत्र और तारों पर?

ज़ाहिर है कि जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की ही तय होती है. ठेकेदार को ठेका देने वाला भी शासन-प्रशासन ही होता है। निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार होता है तो भी शासन-प्रशासन की अनदेखी से ही होता है।

तभी तो हादसों में होने वाली मौतों पर मुआवजा सरकार से मांगा जाता है। हादसा बड़ा हो जाए तो सरकारों से इस्तीफा मांगा जाता है। अफसर-अधिकारियों के तबादले होते हैं। जिम्मेदारी तय करने के लिए शासकीय, प्रशासकीय और न्यायिक जांच समितियां बनाई जाती हैं।

अब अगर कोई कहे कि हादसा ग्रह-नक्षत्र और तारों की गलत जुगलबंदी से हुआ है और इसे ही सच मान लिया जाए तो फिर शासन-प्रशासन का तो कोई दोष ही नहीं रह जाता है क्योंकि ग्रह-नक्षत्रों पर किसका जोर है?

इसे इस तरह भी समझ सकते हैं कि जो होना है वो होता है, ‘होनी’ को कोई टाल नहीं सकता है. फिर चाहे इंसान कितने भी प्रयास क्यों न कर ले।

दैनिक जागरण समूह का एक अखबार ‘आई नेक्स्ट’ वाराणसी के फ्लाईओवर हादसे को इसी तरह देखता है। उसका मानना है कि जिस हादसे में आधा सैकड़ा लोग घायल हुए, 20 की मौत हुई और मृतकों की गिनती बढ़ती जा रही है, वह हादसा किसी मानवीय त्रुटि, लापरवाही या भ्रष्टाचार के चलते नहीं हुआ, उसके लिए शासन-प्रशासन भी जिम्मेदार नहीं है, उसके लिए जिम्मेदार हैं तो बस ‘तीन ग्रह’

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