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राजस्थान सियासी उठापटक के बीच क्या गहलोत सरकार खत’रे में है??

“>राजस्थान में सत्ताधारी कांग्रेस के दो धड़ों में खींचतान के कारण सरकार पर सं’कट पैदा होता दिख रहा है। बीते दो दिनों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मत’भेद बढ़ने के बाद डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने अपने नज़दीकी विधायकों के साथ दिल्ली का रुख़ किया है।

सचिन पायलट का मानना है कि 2018 में राजस्थान में कांग्रेस की जीत के बाद अशोक गहलोत का डिप्टी बनना उनकी मेहनत का प्रतिफल नहीं है तभी से मुख्यमंत्री गहलोत और उनके डिप्टी सहयोगी के बीच दरार केवल चौड़ी होती गई है।

समाचार एजेंसी पीटीआई ने पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से बताया कि सोमवार को विधायक दल की बैठक में यह स्पष्ट हो जाएगा कि कांग्रेस की सरकार बहुमत में है तथा विधायकों की मीडिया के सामने परेड भी कराई जाएगी। कांग्रेस सूत्रों का कहना है, ”पायलट को यह संदेश भिजवाया गया था कि वह एक संक्षिप्त बयान जारी करें कि उनकी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी में पूरी आ’स्था है तथा वो जो भी फैसला करेंगे वह उन्हें स्वीकार होगा।

क्या है सरकार गिराने की कोशिश का मामला?
राजस्थान पुलिस की एसओजी सरकार गिराने की सा’ज़िश के आरो’पों की जांच कर रही है। इस जांच के सिलसिले में सीएम, डीप्टी सीएम और कई विधायकों को नोटिस जारी किए गए हैं। दो स्थानीय नेताओं को भी गिर’फ़्तार किया गया है। एसओजी प्रमुख ने बताया कि “अशोक सिंह और भरत मलाणई को गिर’फ़्तार किया है। जांच चल रही है, और भी लोगों से पूछताछ की जाएगी।”हालांकि बीजेपी ने हिरा’सत में लिए गए लोगों का पार्टी से संबंध होने से इनकार किया है।

राजस्थान विधानसभा की सीटों का गणित

राजस्थान विधानसभा में 200 सीटें हैं। बहुमत के लिए 101 सीटों की जरूरत है। कांग्रेस के पास 107 विधायक हैं। बीजेपी के पास 72 और अन्य के पास 21 विधायक हैं।

जानें पूरा समीकरण 
अगर यह मान भी लिया जाए कि फिलहाल जो 13 विधायक अशोक गहलोत सरकार के साथ हैं, वह टू’टकर भाजपा के साथ आ जाए तो भी आंकड़ा 85 तक ही पहुंचता है। इक्का-दुक्का और विधायकों को भी अपनी ओर करने के बाद भाजपा बहुमत के 101 के आंकड़े से दूर दिखती है। कांग्रेस के पास अपने दम पर बहुमत है। निर्दलीयों के अलग होने पर उस पर तुरंत कोई प्रभा’व पड़ता नहीं दिखता।

फिर भाजपा के बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए जरूरी है कि कांग्रेस में टूट हो। कांग्रेस के पास 101 विधायक है और पार्टी में टूट के लिए दो तिहाई विधायक चाहिए। यानी दलबदल कानून के हिसाब से कांग्रेस में टूट के लिए 71 विधायक चाहिए जो संभव नहीं लगता। कांग्रेस के असं’तुष्ट गुट के पास इतने विधायक नहीं हैं।

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