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पिछले 5 सालों में नीतीश सरकार ने विज्ञापनों पर खर्च किए पांच अरब रुपये

पटना: बिहार में मीडिया पर अघोषित इमरजेंसी लगाने के विपक्षी पार्टियों के आरोपों के बीच नीतीश सरकार ने पिछले पांच वर्षों में विज्ञापन पर 4.98 अरब रुपये ख़र्च किए हैं. यह जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत किए गए आवेदन पर मिली है.

आवेदन में विगत पांच वर्षों में बिहार की मीडिया (इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट) में सरकार की तरफ दिए गए विज्ञापन को लेकर जानकारी मांगी गई थी. आवेदन के जवाब में जो सूचना दी गई है, उसके मुताबिक वित्त वर्ष 2014-2015 में बिहार सरकार ने 83,34,28,851 रुपये ख़र्च किए.

अगले ही वित्त वर्ष (2015-2016) में विज्ञापन ख़र्च में करीब 15 करोड़ रुपये का इज़ाफ़ा करते हुए कुल 98,42,14,181 रुपये ख़र्च किए गए.

यहां यह भी बता दें कि वर्ष 2015 में ही बिहार विधानसभा का चुनाव हुआ था. यह चुनाव नीतीश कुमार ने राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ा था और जीत दर्ज कर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर क़ाबिज़ हुए थे.

आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2016-2017 में कुल 86,85,20,318 और वित्त वर्ष 2017-2018 में 92,53,17,589 रुपये के विज्ञापन विभिन्न अखबारों और समाचार चैनलों को दिए गए थे.

वहीं, वित्त वर्ष 2018-2019 में एक अरब 33 करोड़ 53 लाख 18 हज़ार 694 रुपये विज्ञापन पर बहा दिए गए, जो सबसे ज़्यादा है.

आरटीआई कार्यकर्ता नारायण गिरि ने बताया कि आवेदन में अलग-अलग अख़बारों और समाचार चैनलों को कितने-कितने रुपये का विज्ञापन मिला, इसका ब्योरा भी मांगा गया था, लेकिन विभाग की तरफ़ से बताया गया कि वे ऐसे आंकड़े नहीं रखते.

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