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एनआईए की कार्रवाई में जाफराबाद से गिरफ्तार युवाओं के परिजन खौफजदा, बेकसूरों को सजा न देने की लगाई गुहार

भाषा सिंह

दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाके जाफराबाद में अजीब सा खौफ, अजीब सी चुप्पी तारी है। बुधवार को एनआईए ने जाफराबाद के पांच मुस्लिम नौजवानों सहित उत्तर प्रदेश और दिल्ली में 17 जगहों पर छापेमारी कर आईएसआईएस के कथित मॉड्यूल ‘हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम’ के सरगना सहित 10 लोगों को गिरफ्तार करने का दावा किया। एनआईए ने दावा किया कि सभी आरोपी कुछ राजनीतिक हस्तियों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों सहित दिल्ली और एनसीआर में भीड़भाड़ वाली जगहों पर आतंकी हमले को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। इन 17 जगहों में पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद इलाके में 6, उत्तर प्रदेश के अमरोहा में 6, लखनऊ और हापुड़ में 2-2 जगहों और मेरठ में एक जगह छापेमारी की गई।

एनआईए द्वारा गिरफ्तार किये गए आरोपियों के परिजन गहरे सदमे में हैं और वे मीडिया से गहरी नाउम्मीदी से भरे हैं क्योंकि उनका पक्ष सही-सही रिपोर्ट नहीं हो रहा। इनका मानना है कि जिस तरह का केस बनाया गया है और कट्टे और सुतली बमों की बरामदगी दिखाई गई है। उससे साफ है कि यह 2019 के चुनाव की तैयारी है। जाफराबाद को आतंकवाद के एक नये हब के तौर पर पेश करने की तैयारी है।

उत्तर प्रदेश के अमरोहा से गिरफ्तार किये गये 29 वर्षीय मुफ्ती मो. सुहैल के पिता हफीज अहमद ने साफ तौर पर कहा कि अगर उनका बच्चा (सुहैल) दोषी है तो उसे सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। अगर वह दहशतगर्द पाया जाता है तो उसे घर में पनाह नहीं मिलेगी। लेकिन बेकसूर को सजा नहीं होनी चाहिए।बिना उन्होंने कहा, “बिना कुछ साबित हुए उसे मास्टरमाइंड आदि बता दिया गया। मीडिया भी वही दिखा रहा है। ऐसे में हम आप सबसे बात करके क्या करेंगे। हमारे घर से उन्हें एक भी चीज नहीं मिली। जब बाद में अमरोहा बात हुई तो पता चला कि सुबह-सुबह सुहैल को बनियान और पैजामे में घर से उठाकर ले गये। वहां से भी कुछ नहीं मिला। जब उसे ले गये तो घर के आसपास जमा भीड़ ने भी देखा कि वहां से कुछ भी बरामद नहीं हुआ। फिर बाद में सुतली बम, कट्टे, ट्रैक्टर के पंप जैसा कुछ बरामद होने की बात बताने लगे। अब आप ही बताओ, आईएस जैसे आंतकी संगठनों का लेवल इतना गिर गया है कि वह ये सब इस्तेमाल करने लगे हैं।“”

इस इलाके के चप्पे-चप्पे से वाकिफ कांग्रेस के पूर्व विधायक (सीलमपुर) मतीन अहमद ने नवजीवन को बताया कि एनआईए द्वारा राकेट लॉन्चर की बरामदगी की बात किसी की समझ में नहीं आ रही है। साथ ही कट्टे-देसी पिस्तौल की बात पूरी थ्योरी पर ही सवाल खड़े करती है। ये हो सकता है कि ये लोग सोशल मीडिया के जरिये किसी के संपर्क में आए हों और कुछ कमेंट या पोस्ट किया हो। लेकिन साजिश करने की, हथियार-बम की बातें ठीक नहीं हैं। मतीन अहमद ने कहा, “दरअसल, बीजेपी के पास मुसलमान, पाकिस्तान, कश्मीर, गाय के अलावा कुछ और है ही नहीं। वे 2019 के लिए ये सब करके नफरत फैलाना चाहते हैं।”

तकरीबन यही बात मो. हाफिज के घर में जमा पड़ोसियों ने भी दोहराई। उन्होंने कहा कि वे इस परिवार को जानते हैं और ऐसे खतरनाक मंसूबों में इनका शामिल होना नामुमकिन है। परिवार बहुत गरीबी में है और सब मुश्किल से रोजी-रोटी की जुगाड़ करते हैं। जाफराबाद में रहकर छोटा-मोटा कारोबार करने वाले इरशाद का भी यही कहना है कि हो सकता है कि ये नौजवान किसी सोशल नेटवर्क से जुड़े हों और गुस्से में कुछ शेयर करते हों, लेकिन हथियार आदि की बात गले के नीचे नहीं उतरती। जो भी हो सही ढंग से जांच होनी चाहिए। इलाके के ज्यादातर नौजवान खौफ और तनाव में हैं, क्योंकि माहौल बहुत परेशानी वाला है।

एनआईए द्वारा गिरफ्तार सुहैल की अम्मी कौसर जहां बात करने की स्थिति में नहीं हैं। वह बार-बार गश खाकर गिर जा रही हैं। कुछ वक्त पहले तक वह अपने शौहर के साथ अमरोहा में अपने बेटे के साथ ही थीं और उन्हें अब लग रहा है कि पूरा घर मुसीबत के जलजले में घिर गया है। जाफराबाद की गली नंबर 20 में मदीना मस्जिद के पास एक बहुत छोटे से मकान में दुबका यह परिवार दिन-रात दुआ और मन्नत मांगकर अपना वक्त काट रहा है। वह इस बात से वाकिफ है कि कानूनी लड़ाई लंबी और सख्त है और अभी कोई राहत के आसार नहीं।

जाफराबाद से गिरफ्तार किये गए 23 साल के राशिद जफर के घर वाले इस कदर सहमे हुए हैं कि वे भी जल्दी बात करने को तैयार नहीं होते हैं। जाफराबाद गली नंबर 35 में मेन रोड पर जैकट की दुकान चलाते थे जफर। यहीं से उन्हें एनआईए की टीम ने पकड़ा। यह घर छोटे-मोटे कारोबार में है। इनके परिजन खुद ही सवाल पूछते हैं कि “क्या आपको उम्मीद है कि इनसाफ होगा। हमारी बात कोई सुनेगा। हमें नहीं लगता कि कुछ होगा। लेकिन हम लड़ाई तो लड़ेंगे।”

जफर के चाचा अफजल अहमद का कहना है, “ये सब बेकसूर साबित होंगे, लेकिन तब तक इनकी जिंदगी के कई साल बरबाद हो जाएंगे। ये सारे लोग एक ही इलाके में बड़े हुए हैं, एक-दूसरे को जानते हैं, सिर्फ इसलिए सबके सब साजिश का शिकार नहीं हो सकते।”

गिरफ्तार किये गए मो. आजम जो सीलमपुर में मेडिकल दुकान चलाते हैं के बारे में मो. नावेद का कहना है कि ये सब कम उम्र के नौजवान हैं, जो मौजूदा हालात से परेशान हैं। इनकी परेशानी को आतंकी बताना और बिना कोई ठोस सामान मिले, सबको आतंकी साजिश में शामिल बताना, पूरे परिवार पर कहर की तरह टूटा है।

जाफराबाद से ही 20 साल के जुबैद मलिक और उनके 22 वर्षीय बड़े भाई जैद मलिक को गिरफ्तार किया गया है। ये परिवार गहरे सदमे में है। सबके जेहन में एक ही बात कौंध रही है कि ट्रॉलियों में इस्तेमाल होने वाले हाइड्रॉलिक जैक को रॉकेट लॉन्चर दिखाना और कट्टे आदि को खतरनाक हथियार दिखाकर आखिर क्यों ये गिरफ्तारियां की गई हैं।

अमरोहा से पकड़े गए लोगों के परिजनों का भी यही आरोप है। सईद और रईस ट्रॉली के रिपेयर का काम करते थे, जिनपर गन्ना ढोया जाता था। ये दोनों वेल्डिंग की दुकान चलाते थे। रईस के पिता हबीब का कहना है कि जो समान जब्त करके इन्हें आतंकी बताया जा रहा है, वह यहां कि बहुत सी दुकानों पर मिलता है। हाईड्रॉलिक जैक तमाम जगह इस्तेमाल होता है। बहरहाल अमरोहा में तो परिजनों का गुस्सा सामने आया है, लेकिन दिल्ली के जाफराबाद में परिजन अभी सदमे और उससे भी ज्यादा खौफ में हैं।

बता दें कि गिरफ्तारी के बाद प्रेस कांफ्रेंस कर एनआईए के प्रवक्ता और आईजी आलोक मित्तल ने दावा किया कि संदिग्ध फिदायिन हमले की योजना बना रहे थे, लेकिन उन्होंने यह बताने से इंकार कर दिया कि वे यह हमले कब करने वाले थे। एनआईए ने छापेमारी के दौरान देशी रॉकेट लॉन्चर, 12 पिस्तौल, 120 अलार्म क्लॉक, 100 मोबाइल फोन, 135 सिम कार्ड, कई लैपटॉप और बिजली के कई उपकरण और इसके अलावा 150 राउंड गोलाबारूद भी बरामद करने का दावा किया है। इसके अलावा एनआईए ने मौके से पोटेशियम नाइट्रेट, सल्फर, शुगर पेस्ट, मोबाइल फोन सर्किट, बैटरी, 51 पाइप, वायरलैस घंटियां, स्टील कंटेनर, बिजली की तारें, चाकू, तलवारें जैसे 25 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री भी जब्त की है। इसके अलावा आईएस संबंधित साहित्य और साढ़े सात लाख रुपये नकद की भी बरामदगी दिखाई है।

नवजीवन के शुक्रिए के साथ 

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