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सोनिया होंगी विपक्षी महागठबंधन की अध्यक्ष, पार्टियों में आम सहमती

राष्ट्रपति चुनाव के बहाने विपक्षी महागठबंधन की नींव रखी जा रही है। साथ ही प्रस्तावित गठबंधन के राजनीतिक ढांचे की रूपरेखा को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। गैर एनडीए विपक्ष की 17 पार्टियों ने सोनिया गांधी के द्वारा लंच पर बुलाई गई बैठक में इस तरह के संकेत मिले हैं। उससे सोनिया गांधी का विपक्षी महागठबंधन की अध्यक्ष बनना लगभग तय माना जा रहा है। महागठबंधन के संयोजक पद के लिए एनसीपी प्रमुख शरद पवार और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या फिर तीसरा नाम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी हो सकता है।

 

विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की लंच बैठक में बीजेपी-एनडीए की राजनीतिक ही नहीं विचारधारा को चुनौती देने के लिए की गई पहल का जिस तरह खुलकर समर्थन किया उससे साफ है कि गठबंधन की अध्यक्षता उनको सौंपे जाने पर आम राय बन रही है। वैसे भी सोनिया यूपीए गठबंधन की अध्यक्ष हैं। 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद सोनिया ने कांग्रेस की अगुआई में यूपीए की कमान संभाली थी।

अध्यक्ष पद के लिए नेता का कद मायने रखता है

राष्ट्रपति चुनाव पर विपक्षी पार्टियों की बैठक में शामिल एक नेता ने कहा कि भले अभी महागठबंधन के राजनीतिक ढांचे की रूपरेखा नहीं बनी है। मगर इसमें कोई शक नहीं कि सोनिया इसकी कमान संभाल सकती है। गठबंधन का अध्यक्ष ही विपक्ष का प्रधानमंत्री पद का कैंडीडेट होगा यह जरूरी नहीं।

इस लिहाज से भी सोनिया का चेहरा सभी विपक्षी पार्टियों के लिए सही है। उनका कहना था कि गठबंधन के अध्यक्ष पद के लिए नेता का कद मायने रखता है। क्योंकि तमाम दलों के नेताओं को उनकी अगुआई कबूल करनी होती है। इसलिए शरद पवार से लेकर नीतीश कुमार हों या मायावती ममता बनर्जी किसी को सोनिया गाँधी की अगुआई में दिक्कत नहीं होगी।

विपक्षी खेमे के इस सूत्र के अनुसार महागठबंधन की छतरी तले तमाम दलों को जोड़ने और राजनीतिक गतिविधियों के संचालन के लिए अहम संयोजक पद के लिए भी संभावित चेहरों पर अनौपचारिक चर्चा हो रही है। नीतीश कुमार और शरद पवार इनमें संयोजक पद के लिए सबसे बेहतर चेहरे के रुप में आंके जा रहे। राजनीतिक अनुभव के साथ सियासत के माहिर खिलाड़ी पवार की तमाम दलों के नेताओं के साथ निजी बेहतर ताल्लुकात हैं तो उनकी वरिष्ठता भी उनके पक्ष में जाती है।

मगर पवार की उम्र और सेहत आड़े आ सकती है क्योंकि महागठबंधन के संयोजक की राजनीतिक सक्रियता कहीं ज्यादा होगी। खासकर यह देखते हुए कि इस गठबंधन का मुकाबला नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली भाजपा-एनडीए की आक्रामक सियासत से होना है। इस लिहाज से नीतीश के महागठबंधन का संयोजक बनने की संभावना ज्यादा है।

नितीश के सभी पार्टियों के नेताओ से अच्छे सम्बन्ध है

कांग्रेस में सोनिया और राहुल से तो उनके अच्छे रिश्ते हैं ही। दूसरे दलों के नेताओं के साथ समन्वय में नीतीश के लिए कोई बाधा नहीं। इन दलों के नेताओं को भी नीतीश से सहज संवाद करने में कोई दिक्कत नहीं। संयोजक पद के लिए तीसरा नाम पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं।

मगर वामदलों के साथ उनके रिश्ते बेहद तीखे रहे हैं और पश्चिम बंगाल की राजनीति के मद्देनजर वामपंथियों से सीधा संवाद उनके लिए मुफीद नहीं बैठता। इसके अलावा दीदी का मिजाज भी इस अहम पद में उनकी दावेदारी के आड़े आ सकता है। जबकि नीतीश के लिए अखिलेश और मायावती हों या फिर वामपंथी या ममता किसी से संवाद में कोई अड़चन नहीं। बहरहाल महागठबंधन की औपचारिक रुप रेखा तो राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद ही सामने आएगी।

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