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पार्टी की मुखिया तो मैं ही रहूँगी: मायावती

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने शुक्रवार को कहा कि अगले 20-22 वर्ष तक वे स्वयं पार्टी की मुखिया बनी रहेंगी और पार्टी में किसी को भी उनका उत्तराधिकारी या पार्टी मुखिया बनने का सपना भी नहीं देखना चाहिए. साथ ही, चुनावी गठबंधन के सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी किसी भी राज्य में और किसी भी चुनाव में किसी पार्टी के साथ केवल सम्मानजनक सीटें मिलने पर ही कोई चुनावी गठबंधन या समझौता करेगी.

बसपा अध्यक्ष लखनऊ में पार्टी के प्रदेश कार्यालय में शनिवार को आयोजित पार्टी की अखिल भारतीय बैठक को संबोधित कर रही थीं. उन्होंने कहा कि पार्टी किसी भी राज्य में और किसी भी चुनाव में किसी भी पार्टी के साथ केवल सम्मानजनक सीटें मिलने पर ही वहां उस पार्टी के साथ कोई चुनावी गठबंधन या समझौता करेगी. अन्यथा हमारी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ना ज्यादा बेहतर समझती है.

उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘हालांकि इस मामले में हमारी पार्टी की उत्तर प्रदेश सहित कई और राज्यों में भी गठबंधन करके चुनाव लड़ने की बातचीत चल रही है, लेकिन फिर भी आप लोगों को हर परिस्थिति का मुकाबला करने के लिए अपने-अपने प्रदेश में पार्टी के संगठन को हर स्तर पर तैयार करना है.’

मायावती ने कहा, ‘अभी मैं अगले लगभग 20-22 वर्षों तक खुद ही आगे और सक्रिय रहकर पार्टी की गतिविधियों को आगे बढ़ाती रहूंगी और अब ऐसे में अगले लगभग 20-22 वर्षों तक पार्टी में किसी को भी पार्टी का मुखिया बनने का सपना नहीं देखना चाहिए और न ही किसी को अभी मेरा उत्तराधिकारी बनने का भी सपना देखना चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘मैं पार्टी कार्यकर्ताओं का ध्यान जल्द ही लोकसभा के होने वाले आम चुनाव की तरफ तथा इससे पहले देश के कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की तरफ भी दिलाना चाहती हूं. कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के बाद सरकार बनाने के मामले में भाजपा की किरकिरी होने की वजह से अब यह पार्टी समय से पहले भी लोकसभा के आम चुनाव करा सकती है.’

मायावती ने अपनी पार्टी के संविधान में कुछ जरूरी फैसले लिए जाने की जानकारी देते हुए बताया, ‘मुझे खुद को भी मिलाकर तथा मेरे बाद अब आगे भी बसपा का जो भी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जायेगा तो फिर उसके जीते जी व न रहने के बाद भी उसके परिवार के किसी भी नजदीकी सदस्य को पार्टी संगठन में किसी भी स्तर के पद पर नहीं रखा जाएगा अर्थात उनके परिवार के सदस्य बिना किसी पद पर बने रहकर और एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में ही केवल अपनी निःस्वार्थ भावना के साथ ही पार्टी में कार्य कर सकते है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘इसके अलावा उनके परिवार के किसी भी नजदीकी सदस्य को न कोई चुनाव लड़ाया जाएगा और न ही उसे कोई राज्यसभा सांसद, एमएलसी और मंत्री आदि बनाया जाएगा और न ही उसे अन्य किसी भी राजनीतिक उच्च पद पर रखा जाएगा. लेकिन पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद को छोड़कर बाकी अन्य सभी स्तर के पदाधिकारियों के परिवार के लोगों पर विशेष परिस्थितियों में यह सब शर्तें लागू नहीं होगीं.’

मायावती ने इस दौरान पार्टी संगठन में कुछ परिवर्तन भी किए. पार्टी में पहली बार नेशनल कोआर्डिनेटर की नियुक्ति की गई है. पहले चरण में दो नेशनल कोआर्डिनेटर वीर सिंह एडवोकेट व जयप्रकाश सिंह को नियुक्त किया गया है. उत्तर प्रदेश में आरएसकुशवाहा पार्टी के नए अध्यक्ष नियुक्त किए गए.