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क़ैदियों के परिवार की शिकायत पर मानवाधिकार आयोग ने मप्र सरकार को जवाब तलब किया - democracia
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क़ैदियों के परिवार की शिकायत पर मानवाधिकार आयोग ने मप्र सरकार को जवाब तलब किया

डेमोक्रेसिया ब्यूरो

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने नाज़िया बी और नौ अन्य लोगों की शिकायत के आधार पर संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार से मामले की फौरन जांच कर रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। गौरतलब है कि ये लोग प्रतिबंधित संगठन सिमी के सदस्य होने के आरोप में बीते साढ़े तीन सालों से जेल में बंद हैं। कुल 29 लोगों की गिरफ्तारी की गई थी जिनमें से 8 अंड ट्रायल्ज़ की जेल से भागने के आरोप में गोली मारकर हत्या कर दी गई। हालांकि माना जाता है कि जेल से भागने का आरोप बेबुनियाद है और ये सभी फर्जी एनकाउंटर में मारे गए थे।

इनमें से ज्यादातर जिला उज्जैन, मध्य प्रदेश के निवासी हैं। मानवाधिकार आयोग में शिकायत करने वाले 21 अंडर ट्रायल कैदियों के रिश्तेदार हैं जो भोपाल की केंद्रीय जेल में बंद हैं।आरोप है कि सभी कैदी सिमी संगठन के सदस्य हैं और विभिन्न आपराधिक मामलों में मुकदमे का सामना कर रहे हैं। आवेदकों ने आरोप लगाया है कि सभी 21 ट्रायल कैदियों पर शारीरिक और मानसिक अत्याचार किया जा रहा है। इनके हालात तब और खराब हो गए जब 8 अंडर ट्रायल कैदी न्यायिक हिरासत में भागते वक्त पुलिस मुठभेड़ में मारे गए।

कहा गया है, 26-04-2017 को, अंडर ट्रायल कैदियों में से एक मोहम्मद इक़रार ने सत्र न्यायालय के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान जेल अधिकारियों द्वारा पीटे जाने की शिकायत की। उसका कहना है कि उसे मज़हब विरोधी नारे लगाने के लिए मजबूर किया जाता है। दाढ़ी जबरदस्ती खींची जाती है।

परिवार ने आशंका जताई है कि जेल के अधिकारी जेल के अंदर उनके परिजनों को खुदकुशी के लिए दबाव बना रहे हैं। इन लोगों ने यह शिकायत भी की सकि इनके परिजनों को बहुत कम खाने के लिए दिया जाता है, नाममात्र पानी उपलब्ध करवाया जाता है। इनके शरीर पर चोट के निशान देखे जा सकते हैं।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान अंडर ट्रायल कैदियों में से एक, अबू फज़ल ने न्यायालय के समक्ष बताया कि उनपर शारीरिक रूप से अत्याचार किया जा रहा है। धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया जा रहा है। शारीरिक रूप से अत्याचार किए जा रहे हैं।

मोहम्मद। जुबैर, मोहम्मद आदिल, मोहम्मद इरफान, साजिद गुडु ने आरोप लगाया है कि उन्हें अकेले कारावास में रखा जा रहा है। बिना किसी ब्रेक के। यह भी उल्लेख है कि अंडर ट्रायल कैदियों, आदिल वाहिद, मोहम्मद अजीज, हबीब और सजीद ने 16.12.2016 को अपनी शिकायतें राज्य मानवाधिकार आयोग को सौंपी लेकिन राज्य मानवाधिकार आयोग ने अपनी शिकायत का संज्ञान नहीं लिया है।

एक कैदी, मोहम्मद इरफान ने आरोप लगाया है कि उन्हें अपनी आंख के तत्काल इलाज की ज़रूरत है लेकिन जेल अधिकारियों ने उसे कोई इलाज नहीं दिया है। उन्होंने आगे कहा है कि अब वह अपनी दाहिनी आंखों से नहीं देख पा रहा है और बांई आंख की रौशनी भी बिगड़ती जा है।

उन्होंने 16.01.2016 को माननीय उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक शिकायत भेजी है।सभी अंडर ट्रायल कैदियों को कथित तौर पर न्यायिक हिरासत में शारीरिक और मानसिक रूप से अत्याचार किया जा रहा है। उन्हें बुनियादी सुविधाएं और स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं प्रदान नहीं की जा रही हैं। एकान्त कारावास में रखा गया है और उन्हें पांच मिनट से अधिक समय तक अपने रिश्तेदारों से मिलने की इजाज़त नहीं दी जा रही है।

यह भी कहा गया है कि मुलाकात के वक्त जेल अधिकारी हमेशा उपस्थित रहते हैं।मानवाधिकार आयोग का कहना है कि एक एसएसपी की अध्यक्षता में अधिकारियों की एक टीम का गठन किया जाए, जो स्पॉट की जांच करने और शिकायत में किए गए आरोपों की सत्यता के संबंध में जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे।