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गोवा की भाजपा सरकार पशु अधिसूचना के ख़िलाफ़ केंद्र को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज करवाएगी

वध के लिए पशु बाज़ार में पशुओं की ख़रीद-फरोख़्त पर प्रतिबंध लगाने वाली हालिया केंद्र सरकार की अधिसूचना पर आपत्तियां जताने के लिए गोवा सरकार केंद्र को पत्र लिखेगी। राज्य के एक मंत्री ने शनिवार को कहा कि इस अधिसूचना ने स्थानीय लोगों के मन में आशंकाएं पैदा की हैं।

संवाददाताओं से बात करते हुए राज्य के कृषि मंत्री विजय सरदेसाई ने बताया, ‘मैंने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर से चर्चा की है और उन्होंने कहा कि वह केंद्र को पत्र लिखेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘राज्य सरकार कुछ निश्चित आपत्तियां उठाने के साथ पशुओं के प्रति क्रूरता रोकथाम अधिनियम पर अधिसूचना के लिए कुछ सुधारात्मक सुझाव देने जा रही है।

उन्होंने कहा कि अधिसूचना ने गोवा के लोगों के मन में आशंकाएं पैदा कर दी हैं. उन्हें यह डर है कि सरकार हर किसी को शाकाहारी बनाना चाहती है। उन्होंने कहा, गोवा में कुछ अहम वर्ग बीफ खाते हैं और लोगों के मन इसे लेकर शंका है जिन्हें स्पष्ट किए जाने की ज़रूरत है।

सरदेसाई के अनुसार, संबंधित केंद्रीय मंत्री ने भी पर्रिकर से बात की और उन्हें अधिसूचना को लेकर आपत्तियों के बारे में लिखने के लिए कहा।बीते मई महीने में पर्यावरण मंत्रालय ने पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम के तहत सख़्त पशु क्रूरता निरोधक (पशुधन बाज़ार नियमन) नियम, 2017 को लेकर नई अधिसूचना जारी की है।

इस अधिसूचना के मुताबिक, पशु बाज़ार समिति के सदस्य सचिव को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी शख़्स बाज़ार में अवयस्क पशु को बिक्री के लिए न लेकर आए। किसी भी शख़्स को पशु बाज़ार में मवेशी को लाने की इजाज़त नहीं होगी जब तक कि वहां पहुंचने पर वह पशु के मालिक द्वारा हस्ताक्षरित लिखित घोषणा-पत्र न दे दे जिसमें मवेशी के मालिक का नाम और पता हो और फोटो पहचान-पत्र की एक प्रति भी लगी हो. साथ ही मवेशी की पहचान का पूरा ब्योरा देने के साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि मवेशी को बाज़ार में बिक्री के लिए लाने का उद्देश्य उसका वध नहीं है।

इस अधिसूचना के बाद मेघालय, केरल, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी की राज्य सरकारें और कई ग़ैर भाजपा पार्टियां केंद्र के इस फैसले का विरोध कर रही हैं। 12 जून को मेघालय विधानसभा ने पशु बाज़ार में वध के लिए मवेशियों की ख़रीद-बिक्री संबंधी केंद्र की अधिसूचना के विरोध में एक प्रस्ताव पारित कर दिया है।मेघालय सरकार का कहना है कि केंद्र की इस अधिसूचना से राज्य की अर्थव्यवस्था के साथ ही लोगों के खान-पान की संस्कृति प्रभावित होगी।

मेघालय सरकार ने प्रस्ताव पास करते हुए बताया था कि बीफ मेघालय के आदिवासी लोगों के खान-पान का अभिन्न अंग है। पशु बाज़ार में वध के लिए मवेशियों की ख़रीद-बिक्री पर रोक से राज्य के 5.7 लाख परिवार यानी 79 प्रतिशत जनसंख्या की आजीविका प्रभावित होगी, जो इस कारोबार से जुड़े थे।

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