Generic selectors
Exact matches only
Search in title
Search in content
Search in posts
Search in pages

घंटाघर आंदोलन ने योगी की तानाशाही को दी थी चुनौती: अलीमुल्लाह खान

सीएए , एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ लखनऊ के घंटाघर पर पिछले 66 दिनों से जारी आंदोलन को कोराना संकट के मद्देनजर स्थगित करने के संघर्षशील महिलाओं के फैसले का यूपी कोआर्डिनेशन कमेटी अगेंस्ट सीएए , एनआरसी, एनपीआर ने स्वागत किया है।
आज एक बैठक कर कोआर्डिनेशन कमेटी के संयोजक मैग्सेसे पुरस्कार विजेता डॉ संदीप पांडेय , सह संयोजक डॉ अलीमुल्लाह खान , अजीत सिंह यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता जफरयाब जिलानी , डॉ मलिक फैसल , मोहम्मद साबिर खान , मौलाना सैफ अब्बास नकवी आदि ने आज उक्त संयुक्त बयान जारी किया।

कोआर्डिनेशन कमेटी के संयोजक डॉ संदीप पांडेय ने कहा कि घंटाघर आंदोलन लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के संघर्ष को हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। कमेटी की ओर से हम उन सभी महिलाओं को सेल्यूट करते हैं जिन्होंने ना कड़ी धूप देखी, ना सर्द रात, लगातार पड़ते ओले , बरसात भी उनको हिला नहीं सकी , वे संविधान , लोकतंत्र और मुल्क को बचाने की लड़ाई में युद्ध के मैदान में डटी रहीं।

कोआर्डिनेशन कमेटी के सह संयोजक डॉ अलीमुल्लाह खान ने कहा कि घंटाघर आंदोलन ने योगी की तानाशाही को चुनौती दी थी। महिलाओं ने योगी सरकार के दमन का मुकाबला कर यह साबित कर दिया कि कोई भी तानाशाह दमन के बल पर जनता की आवाज को दबा नहीं सकता।
कोआर्डिनेशन कमेटी के सह संयोजक अजीत सिंह यादव ने कहा कि लखनऊ की महिलाओं ने साबित कर दिया कि वे 1857 की पहली जंगे आजादी की लीडर बेगम हजरत महल की बेटियां हैं । मुल्क के लिए कुर्बानी देने की 1857 की विरासत की असली वारिस हैं।

घंटाघर आंदोलन की संघर्षशील महिला कमेटी की सदस्य शबीह फातिमा रिजवी ने कहा कि कोरोना वाइरस के देश और दुनिया के पैमाने पर बढ़ते खतरे को देखते हुए हम नागरिकता संशोधन अधिनियम, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर व राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के खिलाफ चल रहे धरने का रूप बदल रहे हैं ताकि महिलाओं का बड़ा जमावड़ा एक जगह पर न रहे। हम धरना स्थल से हट रहे हैं किंतु हमारा संघर्ष जारी रहेगा। हमारे पोस्टर, बैनर, चप्पल, जूतियां, दुपट्टे, आदि अन्य सामान धरना स्थल पर हमारी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। लोकतंत्र व संविधान को बचाने हेतु शुरू किया गया हमारा संघर्ष हमारे घरों व मोहल्लों से जारी रहेगा।

घंटाघर की महिला आंदोलनकारी एरम, रुखसाना जिया, मेहनाज , नसरीन आदि ने बताया कि हम सभी आंदोलनकारी महिलाओं ने पुलिस कमिश्नर लखनऊ को पत्र सौंपकर आंदोलन स्थगित करने के निर्णय से अवगत करा दिया है। हम चाहते हैं कि पूरा देश एकजुट होकर कोरोना संकट का मुकाबला करे और नागरिकों की जिंदगियों की हिफाजत करने के लिए सरकार सभी की निशुल्क कोरोना जांच कराए। सभी नागरिकों को जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाए। जिलों व शहरों के लॉक डाउन की स्थिति में सरकार तत्काल राहत पैकेज घोषित करे।

गरीबों मजदूरों समेत आम नागरिकों को जीवन उपयोगी बस्तुओं की निशुल्क आपूर्ति की जाए। सभी जनधन खाता धारकों , मनरेगा मजदूरों , असंगठित क्षेत्र के मजदूरों समेत नागरिकों को 10 हजार रुपया की सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए। संविदा मजदूरों , निजी क्षेत्र के कर्मचारियों समेत सभी कार्मिकों को वेतन का भुगतान कराया जाए।

महिला आंदोलनकारियों ने धरना स्थगित करने पर मुख्यमंत्री योगी से अपील की है कि वे भी बड़ा दिल दिखाएं और सभी आंदोलनकारियों पर लगाये गए सभी मुकदमें , नोटिस आदि वापस ले लें , लखनऊ में लगाये गए आंदोलनकारियों के होर्डिंग हटवा दें।और एनपीआर की प्रक्रिया को उत्तर प्रदेश में वापस लेने की घोषणा कर दें।

Democracia एक गैर-लाभकारी मीडिया संस्था हैं। जो पत्रकारिता को सरकार-कॉरपोरेट दबाव से आज़ाद रखने के लिए वचनबद्ध है। इसे जनमीडिया बनाने के लिए आर्थिक सहयोग करें।