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मंदसौर में किसानों पर गोली चलाने वाले किसी पुलिसकर्मी पर अभी तक नहीं हुई एफआईआर

एजेंसी से इनपुट्स

मध्य प्रदेश के मंदसौर में हुए किसान आंदोलन के दौरान हुई गोलीबारी को हफ्तेभर से ज़्यादा समय बीत चुका है। खूब राजनीति हो रही है बयानबाज़ी हो रही है लेकिन अभी तक पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी में मारे गए किसानों के मामले में किसी अधिकारी के खिलाफ मुक़दमा दर्ज़ नहीं किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राज्य पुलिस के एक आला अधिकारी ने इस बात को माना है किसी भी पुलिस अधिकारी पर किसी भी प्रकार की एफआईआर दर्ज़ नहीं हुई है। हालांकि सरकार ने रिटायर्ड न्यायाधीश एके जैन की अध्यक्षता में न्यायिक जांच कमेटी का गठन किया गया है। साथ ही राज्य गृह सचिव मधु खरे को स्थानांतरित भी कर दिया गया है। इसके अलावा दो अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। हालांकि क़ानूनी जानकारों का मानना है कि जांच दल का गठन पर्याप्त नहीं है, पांच किसानों की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज करके जांच की जानी चाहिए।

दूसरी ओर एक पुलिस अधिकारी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि उन्होंने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी। इस पर इस गोलीबारी में मारे गए 12वीं के छात्र अभिषेक पाटीदार के भाई मधुसूदन पाटीदार ने कहा है कि ये विरोध-प्रदर्शन इतना उग्र नहीं था कि पुलिस को गोली चलाने की ज़रूरत पड़ती। वह उस वक़्त घटनास्थल पर मौजूद थे।

उन्होंने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, ‘पुलिस ने बिना किसी चेतावनी के खुलेआम गोलियां चलानी शुरू कर दी थीं। हम वहीं खड़े थे। अगर उन्होंने चेतावनी दी होती तो हम भागते। हम गोली खाने का इंतज़ार थोड़े न करते?’ गौरतलब है कि मंदसौर में किसान आंदोलन में हुई हिंसा के मामले में अब तक 46 एफआईआर दर्ज़ की गई हैं, जिसमें सिर्फ आगजनी, दंगे भड़काने और बर्बरता से संबंधित मुक़दमे दर्ज़ किए गए हैं। इस बीच ख़बर यह भी है कि 14 जून को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंदसौर के हालात का जायज़ा लेने वहां पहुंच सकते हैं।

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