Generic selectors
Exact matches only
Search in title
Search in content
Search in posts
Search in pages
Filter by Categories
home
margin
slider
top three
top-four
travel
Uncategorized
viral
young india
कल्चर
दुनिया
देश
लीक से हटकर
विशेष
वीडियो
सटीक
सियासत
हाशिया
हेल्थ

बिहार दंगा पर फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट जारी,दोषियों पर कार्यवाई की मांग

नई दिल्ली, 9 अप्रैल 2018,यूनाइटेड अगेंस्ट हेट की ओर से बिहार के 7 ज़िलों में हुए साम्प्रदायिक हिंसा की खोजपरख फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट आज प्रेस क्लब नई दिल्ली में जारी की गई। बिहार के कई ज़िलों में रामनवमी के जुलूस के बाद फैली साम्प्रदायिक हिंसा की  ज़मीनी सच्चाई को जानने और तथ्यों की बारीक़ पड़ताल के लिए  यूनाइटेड अगेंस्ट हेट और पत्रकारों की टीम ने दंगा प्रभावित ज़िलों का दौरा किया था। नदीम खान (सोशल एक्टिविस्ट), प्रशांत टंडन (पत्रकार), हसनुल बन्ना (पत्रकार), तारिक अनवर (पत्रकार),साग्रिका क्यूसू (पत्रकार), महताब आलम (सामाजिक कार्यकर्ता),फर्राह शेकब (सोशल एक्टिविस्ट),आदि इस फैक्ट फाइंडिंग टीम में शामिल थे।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत टंडन ने कहा कि स्थिति और घटनाओं की भयावता को देखने पर यह स्पष्ट होता है कि यह बहुत सुनोयोजित तरीके से हिंसा भड़काने और लोगों के बीच नफरत पैदा करने की कोशिश की  गई थी।  एक ही तरह के नारे, भड़काऊ गानों की सीडी और पेन ड्राइव बाटें गए,हज़ारों की तादाद में तलवारें बांटे गए

तलवारों को ऑनलाइन आर्डर दे कर मंगवाया गया था।  जुलूस बाइक रैली की शक्ल में मुस्लिम आबादी में घुस कर तनाव पैदा करने की कोशिश करती थी।  और फलस्वरूप एक विशेष समुदाय को निशाना बना कर उन्हें नुकसान पहुँचाया गया।

सागरिका किस्सू ने कहा कि बिहार जैसे शांतिप्रिय राज्य में नफ़रत  हिंसा की यह कोशिशें सभ्य समाज के लिए कलंक है। राज्य सरकार को न्याय सुनिश्चित करना चाहिए।

यूनाइटेड अगेंस्ट हेट टीम के सदस्य नदीम खान ने कहा कि हिंसा की यह घटना राजनीति से प्रेरित है जिसमे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों केवल वोट बैंक के लिए नफरत पैदा कर रही है।  बीजेपी अब विकास के मुद्दे से हैट कर दंगों और नफ़रत की राजनीति पर उतर आई है , यह2019 की तैयारी है। प्रोफेसर रतनलाल ने कहा कि यह मानसिकता एक दो साल में  नहीं विकसित की गई है बल्कि सैकड़ों वर्षों के  बाद नफ़रत  का यह माहौल बनाया गया है जो राजनीति से लेकर सभी जगह पाया जाता है। वरिष्ठ पत्रकार अजित साही ने कहा कि देश में नफ़रत पैदा कर राजनैतिक रोटी सेकने की कोशिश है।  प्रशासन पूरी तरह विफल रहा है। नीतीश कुमार को अविलंब इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।

टीम ने इस वर्ष रामनवमी के आसपास  सांप्रदायिक हिंसा के बाद टीम बिहार का दौरा किया। टीम सिवान, गया, काइमूर, औरंगाबाद,समस्तीपुर, मुंगेर, नवादा, नालंदा,हैदरगंज और रोज़ारा का दौरा की और दोनों समुदायों के इलावा,पुलिस अधिकारियों व अन्य अधिकारियों से भी मिली। टीम ने दोनों समुदायों के संबंधित दंगा प्रभावित स्थानों के लोगों से बातचीत कर हिंसा की असल वजहों की पड़ताल की ।

इस दौरान अधिकारियों से बात कर हिंसा की पड़ताल की गई और सद्भाव की अपील की। लोगों से बात करने और दंगा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद यह बहुत स्पष्ट था कि ये हिंसा स्वतः स्फूर्त नहीं हुई ,बल्कि पूर्व नियोजित और योजनाबद्ध भाजपा और बजरंग  दल के गुंडों द्वारा किए गए थे।

हिंसा का एक समान स्वरूप था जो हर जगह पर हमला करते थे। शांतिपूर्ण जुलुस और रैली  के लिए शांति समिति की बैठक आयोजित की गई थी, जिसने हिंसा से बचने के लिए अगले दिन रैलियों को नियम और शर्तें तय की थी। यहां तक ​​कि पुलिस ने सभी राम नवमी रैलियों को सशर्त अनुमति दी और अपने निश्चित मार्ग सेट कर दिया। लेकिन अगले दिन, इन सभी स्थितियों और मार्गों का उल्लंघन किया गया।

रैलियों को जबरदस्ती मुस्लिम क्षेत्रों में ले जाया गया, जहां बेहद अपमानजनक सांप्रदायिक गीतों को बजाया गया और सांप्रदायिक,भड़काऊ नारे दिए गए। इसके बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई ।

मुस्लिम इलाकों विशेष रूप से मस्जिदों और मुस्लिमो के दुकानों को भीड़ द्वारा लक्षित किया गया था। कई जगहों पर लाखों की संपत्ति वाली बड़ी दुकानों को नष्ट कर दिया। भीड़ जो ऑनलाइन आदेश दिए गए थे और कुछ दिनों पहले खरीदी गई थी। कुछ दिन पहले सीडी और पेन ड्राइव के गाने वितरित किए गए थे,जो हिंसा की  योजना दिखाते हैं।

कई जगहों पर पुलिस मूक दर्शकों के तौर पर रही, जबकि अन्य में वे भीड़ को नियंत्रित करने में असमर्थ थे। भाजपा के कैबिनेट मंत्री अश्विनी कुमार चौबे के बेटे अरिजीत सरस्ववत, भाजपा सांसद सुशील कुमार सिंह और कांग्रेस के विधायक आनंद शंकर सिंह के दंगों के लिए भागीदारी स्पष्ट थी,क्योंकि कई लोगों  बयान बयान दिया और फोटोग्राफ और वीडियो  साक्ष्य थे।

आरएसएस बीजेपी और बजरंग दाल के सांप्रदायिक गुंडों को रामनवमी के नाम पर हंगामा बनाने की अनुमति देने में पुलिस और नीतीश सरकार की सहभागिता बिल्कुल स्पष्ट थी।