Generic selectors
Exact matches only
Search in title
Search in content
Search in posts
Search in pages

ईवीएम वहीं खराब होती हैं जहां दलित-अल्पसंख्यक वोट हैं: कपिल सिब्बल

लोकसभा चुनाव 2019 में विपक्ष ईवीएम को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। उसने इस सबंध में चुनाव आयोग से शिकायतें भी की हैं।

सवाल : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पराजय तय देखकर आप लोग ईवीएम पर सवाल करने लगे हैं। इस पर क्या कहेंगे? 

जवाब : पहले तीन चरणों में भाजपा को बहुत नुकसान हुआ है। वैसे हार-जीत का निर्णय तो 23 मई को होगा । सवाल यह है कि जहां भी मशीन खराब होती हैं वहां वोट भाजपा को ही क्यों जाता है?

सवाल : ईवीएम को लेकर शिकायतें कई बार गलत पाई गई हैं, इस पर आपको क्या कहना है? 

जवाब : कुछ दिनों पहले ही एक ही जगह 300 मशीनों के खराब होने की बात सामने आई थी। मेरा यह कहना है कि चुनाव में मतदाता को यह चिंता नहीं होनी चाहिए कि उसने जिसे वोट दिया है, उसे वोट नहीं मिल रहा है। यह मशीन भी वहीं खराब होती हैं जहां दलित वोट और अल्पसंख्यक वोट होता है। अगर दो-तीन घन्टे मशीन खराब रहेगी तो वोट नहीं पड़ेगा क्योंकि लोग घर वापस चले जाएंगे।

सवाल : ईवीएम से जुड़ी शिकायतों पर चुनाव आयोग ने कई कदम उठाए हैं, उनसे आप लोग संतुष्ट हैं? 

जवाब : हम बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। हमें बड़ी निराशा हुई है। इनको हमारी मांगे मानने में दिक्कत क्या है? हमारी मुख्य मांग है कि 50 फीसदी वीवीपीएटी पर्चियों का मिलान किया जाए। ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतों को दूर किया जाए, ताकि चुनाव प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बना रहे।

सवाल : उच्चतम न्यायालय ने तो पांच फीसदी पर्चियों के मिलान का आदेश दिया है क्योंकि 50 फीसदी पर्चियों के मिलान में काफी समय लगेगा। इस पर आप क्या कहेंगे? 

जवाब : हम तो यह कह रहे हैं कि एक तरफ चुनाव आयोग की सुविधा है और दूसरी तरफ जनता का विश्वास है। अदालत को भी विश्वास के साथ जाना चाहिए और चुनाव आयोग को भी विश्वास के साथ जाना चाहिए। लेकिन ये (आयोग) अपनी सुविधा की तरफ झुक रहे हैं।

सवाल : अब ईवीएम के मुद्दे पर आगे विपक्ष क्या करेगा? 

जवाब : हमारी कोशिश जारी रहेगी। हम चाहते हैं कि 50 फीसदी पर्चियों का मिलान हो। ये कहते हैं कि 50 फीसदी वीवीपीएटी की पर्चियों के मिलान में छह दिन का समय लगेगा, जबकि ऐसा नहीं है। चलिए, अगर दो-तीन दिन लग भी जाएं तो कम से कम लोगों को चुनाव प्रक्रिया में विश्वास तो रहेगा।

Democracia एक गैर-लाभकारी मीडिया संस्था हैं। जो पत्रकारिता को सरकार-कॉरपोरेट दबाव से आज़ाद रखने के लिए वचनबद्ध है। इसे जनमीडिया बनाने के लिए आर्थिक सहयोग करें।